आवारा जानवर बने मुसीबत: एक साल में 20 हजार शिकायतें पहुंची

आवारा जानवर
  • शहरों की परेशानी बने आवारा जानवर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश के शहरों में सडक़ों और गलियों में घूमते आवारा जानवर लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के ताजा आंकड़ों ने शहरों की इस सच्चाई पर मुहर लगा दी है। आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी 2025 से इस साल 23 मार्च के बीच प्रदेश के नागरिक आवारा श्वानों (कुत्तों), मवेशियों और सुअरों से जुड़ी लगभग 20 हजार शिकायतें विभाग के पास पहुंची हैं। विभाग के पास आवारा जानवरों से जुड़ी औसतन 45 शिकायतें प्रतिदिन आ रही हैं। राजधानी भोपाल में आवारा कुत्तों की 5161 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जो प्रदेश में सर्वाधिक हैं। क्लीनेस्ट सिटी इंदौर इस मामले में चौथे पायदान पर है, जबकि ग्वालियर और जबलपुर दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। ये आंकड़ा केवल इन शिकायतों का है जो सीएम हेल्पलाइन, कॉल सेंटर, कलेक्टर ऑफिस आदि के जरिए विभाग के पास पहुंची हैं।
सुअर और मवेशियों पर फुर्ती, श्वानों पर सुस्ती
विभाग के आंकड़ों में एक दिलचस्प विरोधाभास सामने आया है। आवारा सुअरों और मवेशियों की शिकायतों पर नगर निगम तेजी से कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन जब बात श्वानों की आती है तो सिस्टम सुस्त पड़ जाता है। प्रदेश में पिछले 447 दिनों में आवारा मवेशी से जुड़ी 3102 शिकायतों में से 77 फीसदी का निपटारा कर दिया गया, जबकि आवारा सुअर की 385 शिकायतों में से 70 प्रतिशत पर एक्शन लेकर क्लोज किया गया। इसके अलावा प्रदेश के 14 नगर निगमों में आवारा श्वानों से जुड़ी 16,427 शिकायतों में से केवल 54.30 पर ही एक्शन हो सका।
शिकायतों का पेंडेंसी रेट सबसे ज्यादा
श्वानों के खिलाफ कार्रवाई में आने वाली बाधा पर विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि डॉग और पेट लवर्स अक्सर कार्रवाई के दौरान बीच में आ जाते हैं। कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है, जिसके कारण टीमें चाहकर भी कार्रवाई नहीं कर पातीं। यही कारण है कि श्वानों से जुड़ी शिकायतों का पेंडेंसी रेट सबसे ज्यादा है।

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