
- अब भोपाल में ही दर्ज होंगी साइबर ठगी की शिकायतें
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में साइबर ठगों का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। बीते चार साल में साइबर फ्रॉड का काला कारोबार 1124 फीसदी तक बढ़ गया है। ठगों का सबसे बड़ा निशाना प्रदेश के बड़े शहरों के लोग बन रहे हैं। 2025 में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, सीहोर और ग्वालियर में ठगों ने सबसे ज्यादा वार किया। इन चार शहरों के 7573 लोगों से 165 करोड़ रुपए की ठगी हुई। अनूपपुर, अशोकनगर, दतिया और टीकमगढ़ जैसे जिलों में ठगी के मामले कम रहे। इसको देखते हुए साइबर जालसाजों द्वारा ठगी गई राशि को बैंक खातों में होल्ड (बचाने) कराने की प्रक्रिया को और तेज करने के लिए मप्र साइबर पुलिस मुख्यालय में 50 सीटों वाला एक अत्याधुनिक कॉल सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई गई है, जो सातों दिन 24 घंटे सक्रिय रहेगा।
गौरतलब है कि मप्र में हर साल ठगों का नेटवर्क बढ़ता गया। साल 2025 में स्थिति बेहद गंभीर हो गई। पूरे प्रदेश में 62 हजार से ज्यादा लोग साइबर ठगों के जाल में फंस गए और ठगों ने कुल 551 करोड़ रुपए उड़ा लिए। औसतन हर दिन 178 लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठग रोजाना 1.51 करोड़ रुपए की रकम ऐंठते रहे। इसको देखते हुए मप्र साइबर पुलिस मुख्यालय में एक अत्याधुनिक कॉल सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई गई है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज होने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस पीडि़तों से संपर्क करती है, जिसमें काफी कीमती समय बर्बाद हो जाता है। नए कॉल सेंटर के शुरू होने से प्रदेश से जुड़ी सभी शिकायतें सीधे भोपाल स्थित साइबर मुख्यालय पहुंचेंगी। इससे पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने का मौका मिलेगा और एक विशेष टीम तत्काल बैंकों से संपर्क कर ठगी गई राशि को फ्रीज कराने का काम करेगी।
सरकार को भेजा गया है प्रस्ताव
साइबर पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि इस 24&7 कॉल सेंटर के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। जैसे ही वहां से हरी झंडी मिलती है, इसका निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस नई व्यवस्था से न केवल ठगी गई राशि वापस मिलने की उम्मीद बढ़ेगी, बल्कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोडऩे में भी मदद मिलेगी। गौरतलब है कि साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठगी के शुरुआती दो घंटे गोल्डन आवर कहलाते हैं। यदि पीडि़त इस अवधि के भीतर हेल्पलाइन पर सूचना दे देता है, तो पुलिस के लिए पैसा होल्ड कराना आसान होता है। कॉल सेंटर में तैनात विशेष टीम न केवल पैसा होल्ड कराएगी, बल्कि पीडि़तों को वह राशि वापस दिलाने के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया और एनओसी दिलाने में भी मदद करेगी। साइबर ठगी के खिलाफ कार्रवाई के मामले में मध्य प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2024 में ठगी गई राशि होल्ड कराने के मामले में प्रदेश देशभर में 22वें स्थान पर था, जो वर्ष 2025 में छलांग लगाकर छठवें स्थान पर पहुंच गया है। आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष प्रदेशवासियों से 581 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जिसमें से पुलिस की सक्रियता के चलते 137 करोड़ रुपये होल्ड कराए जा सके।
साल-दर-साल बढ़ता गया काला कारोबार
राष्ट्रीय साइबर रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म (एनसीआरपी) के आंकड़े बताते हैं कि 2022 में प्रदेशवासियों से 45 करोड़ रुपए ठगे। 2023 में ठगी की राशि बढकऱ 196 करोड़ रुपए पहुंच गई। 2024 में यह आंकड़ा 465 करोड़ रुपए हो गया। वहीं 2025 में साइबर ठगों ने 551 करोड़ रुपए 62 हजार से ज्यादा लोगों के खातों से उड़ा लिए। साइबर ठग कभी बैंक अधिकारी बनकर केवाईसी अपडेट करने का झांसा देते हैं तो कभी लॉटरी, इनाम या सरकारी योजनाओं के नाम पर पैसे ऐंठते हैं। फर्जी नौकरी, ऑनलाइन शॉपिंग, तत्काल लोन, सोशल मीडिया फ्रेंड या तकनीकी मदद के बहाने मोबाइल एक्सेस लेकर, क्यूआर कोड व यूपीआई लिंक भेजकर ठगी करते हैं। साइबर ठगी के बढ़ते मामले चिंता की बात है। 2025 में प्रदेश के 62 हजार से अधिक लोगों से 551 करोड़ रुपए की ठगी की गई। हालांकि साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच-पड़ताल के बाद 100 करोड़ रुपए पीडि़तों को वापस दिलाए हैं। ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार सावधानी है।
