एकल नल जल योजनाओं में इस माह से शुरू हो जाएगी पानी की सुचारू रूप से आपूर्ति

  • अब ग्रामीणों को नहीं मिलेगा मुफ्त में पानी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र में जल जीवन मिशन के तहत चल रही एकल नल जल योजनाओं को तेजी से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। संभावना जताई जा रही है कि इस माह एकल नल जल योजनाएं पूरी हो जाएंगी, जिसके बाद पानी की आपूर्ति सुचारू रूप से शुरू कर दी जाएगी। हालांकि, इन योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए ग्रामीणों को अब पानी मुफ्त में नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें हर महीने 100 रुपये (या पंचायत द्वारा निर्धारित रखरखाव शुल्क) देना होगा। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की डेडलाइन मार्च, 2024 रखी थी। चूंकि इस अवधि में अधिकतर राज्यों में जल जीवन मिशन का काम पूरा नहीं हो पाया, इस कारण केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में पुनर्गठित कर देश में मिशन की अवधि दिसंबर, 2028 तक बढ़ा दी है।
गौरतलब है कि प्रदेश में जल जीवन मिशन में दो तरह की योजनाओं (एकल नल जल और समूह नल जल) पर काम चल रहा है। प्रदेश में एकल नल जल योजनाओं की संख्या 28 हजार से ज्यादा है। एकल नल जल योजनाओं का 98 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल के अंत तक एकल नल जल योजनाओं का काम पूरा कर लिया जाएगा। पूर्व में इसकी डेडलाइन दिसंबर, 2025 और फिर मार्च, 2026 निर्धारित की गई थी। समूह नल जल योजनाओं की कुल संख्या 147 है। समूह नल जल योजनाओं का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। समूह नल जल योजनाओं का काम पूरा करने की डेडलाइन मार्च, 2027 निर्धारित है।
अलग-अलग रहेंगे शुल्क
उधर, प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सप्लाई मुफ्त नहीं की जाएगी। गांवों में नलों से पानी सप्लाई का शुल्क लिया जाएगा। शुल्क का निर्धारण कर दिया गया है। जिन गांवों में नल-जल योजना शुरू हो चुकी है, वहां पानी सप्लाई के लिए प्रति कनेक्शन प्रति माह 100 रुपए शुल्क लिया जाएगा। जनजातीय विकास खंडों के गांवों में यह शुल्क 60 रुपए प्रति माह और मास्टर प्लान वाले गांवों में 120 रुपए प्रति माह होगा। स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी जैसे सार्वजनिक संस्थानों के लिए यह शुल्क 200 रुपए प्रति माह होगा। यह व्यवस्था मई से लागू करने की तैयारी है। मप्र पंचायत (ग्रामीण नल जल योजना संचालन-संधारण एवं प्रबंधन नीति)2026 में नलों से पानी सप्लाई के शुल्क के संबंध में प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित औद्योगिक इकाइयों से पानी की खपत के आधार पर उत्पादन शुल्क के रूप में बिल वसूला जाएगा, वहीं अन्य व्यावसायिक संस्थानों से 500 रुपए प्रति माह शुल्क लिया जाएगा। यही नहीं नई नीति में नल कनेक्शन का शुल्क भी तय किया गया है। नल कनेक्शन के लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति परिवारों को 1000 रुपए और अन्य परिवारों को 2500 रुपए देने होंगे। सार्वजनिक संस्थानों के लिए नल कलेक्शन का शुल्क 5000 रुपए, औद्योगिक संस्थानों के लिए 10,000 रुपए और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के लिए 8000 रुपए निर्धारित किया गया है। जिन परिवारों ने पहले बिना शुल्क के कनेक्शन ले लिया था, उन्हें भी यह राशि किश्तों में जमा करनी होगी। इसके अलावा बल्क जल मीटर की स्थापना और रखरखाव का खर्च संबंधित उपभोक्ता को ही उठाना होगा। पानी की आपूर्ति और शुल्क वसूली को व्यवस्थित करने के लिए गांवों में वॉल्व सह पंप ऑपरेटर नियुक्त किए जाएंगे। नियमों के तहत सरपंच और पानी समिति के सदस्यों को लोक सेवक का दर्जा दिया जाएगा, जिससे जल प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। बता दें कि मध्य प्रदेश में एकल नल जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी गई है। अब तक प्रदेश के सिर्फ दो जिलों- बुरहानपुर एवं निवाड़ी को हर घर जल जिला प्रमाणित घोषित किया गया है।

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