‘वरिष्ठों’ को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

  • मप्र में निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में जल्द होंगी नियुक्तियां

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र में लंबे समय से प्रतीक्षित निगम-मंडलों और विकास प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है। भाजपा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अब सभी नियुक्तियां एक साथ करने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठों को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।  केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के बाद अब अलग-अलग सूचियों के बजाय एक ही जंबो लिस्ट जारी की जाएगी, जिसमें करीब 35 नेताओं को जगह मिल सकती है। इससे पहले प्रदेश नेतृत्व की योजना विंध्य, बुंदेलखंड और महाकोशल जैसे क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों में पहले चरण में नियुक्तियां करने की थी। लेकिन महाराष्ट्र चुनाव और केंद्रीय व्यस्तताओं के कारण मामला टलता रहा। पुनर्वास की रेस में सबसे बड़ा नाम प्रदेश के सबसे वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का है। माना जा रहा है कि भार्गव के अनुभव और वरिष्ठता को देखते हुए सरकार उन्हें कोई बहुत महत्वपूर्ण और बड़ी संवैधानिक या राजनीतिक जिम्मेदारी सौंप सकती है। उनके अलावा पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। पन्ना से पांच बार के विधायक ब्रजेंद्र प्रताप सिंह, हरिशंकर खटीक, अजय विश्नोई और अर्चना चिटनीस जैसे कद्दावर नेताओं को भी महत्वपूर्ण निगम-मंडलों की कमान सौंपी जा सकती है। जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों और विभिन्न प्राधिकरणों में लंबित राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अब भाजपा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी पहले इन नियुक्तियों को चरणबद्ध तरीके से करने की तैयारी में थी, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के बाद अब सभी दर्जा प्राप्त मंत्रियों और प्रमुख पदों की सूची एक साथ जारी करने का निर्णय लिया गया है। माना जा रहा है कि यह नियुक्तियां विधानसभा के बजट सत्र से पहले घोषित की जा सकती हैं। सरकार और संगठन पिछले करीब चार महीनों से राजनीतिक नियुक्तियों की तैयारी में जुटा है। संगठन और सरकार स्तर पर कई दौर की चर्चा के बाद सूची को लगभग अंतिम रूप भी दे दिया गया था, लेकिन अब तक इसे मंजूरी नहीं मिल पाई है। पहले योजना थी कि पहली किस्त में प्रदेश के विकास प्राधिकरणों और क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों जैसे विंध्य, बुंदेलखंड और महाकौशल विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्ति की जाए।
35 नेताओं का होगा पुनर्वास
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश के साथ प्रदेश नेतृत्व की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इसी बैठक में राजनीतिक नियुक्तियों की अंतिम सूची पर मुहर लग सकती है। संगठन सूत्रों का कहना है कि इस सूची में करीब 35 नेताओं को विभिन्न निगम-मंडलों, आयोगों और प्राधिकरणों में जिम्मेदारी दी जा सकती है। दरअसल, विधानसभा चुनाव 2023 के बाद से ही निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर संगठन पर दबाव बना हुआ है। पहले लोकसभा चुनाव के बाद नियुक्तियां करने की योजना थी, लेकिन भाजपा के संगठन चुनाव, फिर प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में देरी के चलते मामला आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद बिहार चुनाव के चलते भी निर्णय टलता रहा। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही वरिष्ठ नेताओं को भरोसे में लिया है। वे उपेक्षित और घर बैठ चुके वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात कर रहे हैं। इस बार की नियुक्तियों में पार्टी का खास फोकस पूर्व विधायकों और पूर्व मंत्रियों के पुनर्वास पर है। ऐसे कई नेता हैं, जो चुनाव के बाद संगठन या सरकार में किसी जिम्मेदारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इनमें से कई नेताओं के पास फिलहाल कोई सक्रिय दायित्व नहीं है, जिसे देखते हुए पार्टी उन्हें निगम-मंडलों और आयोगों में समायोजित करना चाहती है। पूर्व मंत्री जयंत मलैया को छठवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाने की संभावना जताई जा रही है। वे पहले वित्त मंत्री रह चुके हैं, इसलिए इस पद के लिए उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। इसी तरह बजेंद्र प्रताप सिंह, जो पांच बार विधायक और दो बार मंत्री रह चुके हैं, तथा हरिशंकर खटीक, जो चार बार विधायक रहने के साथ भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष और संगठन में कई दायित्व निभा चुके हैं, भी सूची में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा अजय विश्नोई, अर्चना चिटनीस, दीपक सक्सेना जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम भी पुनर्वास की दौड़ में बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नियुक्तियों में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की पूरी कोशिश की जाएगी। कांग्रेस से भाजपा में आए छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा सीट से विधायक कमलेश शाह भी किसी अहम पद की प्रतीक्षा में हैं। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व उन्हें भी संगठनात्मक संतुलन के तहत जिम्मेदारी दे सकता है। यदि सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार रहा, तो बजट सत्र से पहले निगम-मंडलों और आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों की घोषणा कर दी जाएगी, जिससे लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति समाप्त हो सकेगी।

Related Articles