10 करोड़ के निवेश पर उसी दिन एलओआई

  • नए औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम-2026 लागू, एमपी में उद्योग लगाने की प्रक्रिया होगी तेज

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम।  मध्यप्रदेश में निवेश आकर्षित करने और उद्योग लगाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए राज्य सरकार ने औद्योगिक भूमि एवं भवन आवंटन के नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक निवेश वाली परियोजनाओं को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उसी दिन आशय पत्र (एलओआई) जारी किया जाएगा। वहीं, अन्य पात्र आवेदकों को आवेदन के सात कार्य दिवस के भीतर आशय पत्र देने का प्रावधान किया गया है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य निवेश संबंधी औपचारिकताओं को कम करना और औद्योगिक परियोजनाओं की शुरुआत में होने वाली देरी को रोकना है। प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत मध्यप्रदेश राज्य औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2026 जारी किए गए हैं। इनके दायरे में बड़े उद्योगों के साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई), लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, औद्योगिक आवास और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी इकाइयां भी आएंगी।
    ई-बिडिंग से होगा भूखंडों का आवंटन
    नए और निरस्त किए गए औद्योगिक भूखंडों का आवंटन मुख्य रूप से ऑनलाइन ई-बिडिंग के माध्यम से किया जाएगा। हालांकि, 500 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार देने वाले मेगा प्रोजेक्ट को इस प्रक्रिया से छूट मिल सकेगी। इससे बड़े निवेश और रोजगार सृजन की क्षमता वाली परियोजनाओं को भूमि आवंटन में विशेष सुविधा मिलने का रास्ता खुलेगा। सरकार का जोर औद्योगिक जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के साथ निवेशकों के लिए समयसीमा तय करने पर है। आशय पत्र जारी होने की समयसीमा निर्धारित होने से निवेशकों को परियोजना की शुरुआती औपचारिकताएं पूरी करने में मदद मिल सकती है।
    जमीन के लिए 99 साल तक की लीज
    नियमों में औद्योगिक भूमि के लिए अधिकतम 99 वर्ष और भवनों के लिए 30 वर्ष की पट्टा अवधि निर्धारित की गई है। ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में भूमि का मूल्य कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर तय होगा। हालांकि, प्रीमियम की न्यूनतम दर 250 रुपये प्रति वर्गमीटर से कम नहीं रखी जा सकेगी। विकसित औद्योगिक भूमि पर स्लैब पद्धति से 75 प्रतिशत तक की रियायत देने का भी प्रावधान है। इसके अलावा वार्षिक भू-भाटक भूमि के कुल प्रीमियम का दो प्रतिशत होगा। इस राशि का प्रत्येक 30 वर्ष में पुनरीक्षण किया जाएगा। आवंटियों को सुरक्षा निधि के रूप में वार्षिक लीज रेंट की तीन गुना राशि जमा करनी होगी।
    प्रदूषणकारी उद्योगों के लिए अलग जोन
    नए नियमों में पर्यावरण संबंधी प्रावधानों पर भी जोर दिया गया है। अति प्रदूषणकारी उद्योगों को सामान्य औद्योगिक क्षेत्रों में जगह नहीं दी जाएगी। इनके लिए अलग से आरक्षित जोन निर्धारित किए जाएंगे। इससे औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ प्रदूषण नियंत्रण और क्षेत्रवार नियोजन को व्यवस्थित करने की कोशिश की जाएगी। निवेश की समयसीमा, ऑनलाइन आवंटन और भूमि मूल्य में रियायत जैसे प्रावधानों से प्रदेश में उद्योग स्थापना और विस्तार की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक असर परियोजनाओं को जमीन मिलने, जरूरी अनुमतियां पूरी होने और निवेश के धरातल पर उतरने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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