- संसदीय कार्य विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव

गौरव चौहान
दस साल बाद मप्र में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, विधायक और पूर्व विधायक के वेतन-भत्ते में वृद्धि होगी। एक दिसंबर से प्रारंभ हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सामान्य प्रशासन और संसदीय कार्य विभाग वेतन-भत्ता संशोधन विधेयक प्रस्तुत करेंगे। इसकी तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई है। माननीयों का वेतन बढ़ाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। विधायकों के वेतन में 60 हजार रुपए की बढ़ोतरी होगी। अब उन्हें 1 लाख 70 हजार रुपए मिलेंगे। वहीं, पूर्व विधायकों का पेंशन भत्ता 58 हजार करने पर सहमति बनी है। ऐसे ही मुख्यमंत्री, मंत्री और राज्य मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष की सैलरी भी 18 से 30 फीसदी बढ़ाई जाएगी। संसदीय कार्य विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे सैद्धांतिक सहमति के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास भेजा जा रहा है। प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलने के बाद इसे कैबिनेट की बैठक में लाया जाएगा। यह प्रस्ताव विधानसभा के आगामी बजट सत्र में पेश हो सकता है। मप्र में 9 साल बाद विधायक और मंत्रियों के वेतन में बढ़ोतरी होगी। पड़ोसी राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही माननीयों के वेतन में बढ़ोतरी कर चुके हैं।
दरअसल, इसी साल बजट सत्र के दौरान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार व अन्य विधायकों ने सदन में वेतन-भते बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने आसंदी से कहा कि यदि सरकार विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने पर विचार करने के लिए समिति का गठन करें, तो विधानसभा अपनी सिफारिश भेज सकती है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सहमति जताई। इसके बाद 27 अक्टूबर को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इस कमेटी में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के अलावा बीजेपी विधायक अजय विश्नोई और कांग्रेस विधायक सचिन यादव को सदस्य के रूप में शामिल किया गया। संसदीय कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन को सदस्य सचिव बनाया गया। कमेटी ने दो दौर की चर्चा कर वेतन, भत्ते और पेंशन में बढ़ोतरी संबंधी प्रस्ताव तैयार कर अपनी सिफारिश राज्य शासन को भेजी। इसमें पूर्व विधायकों की पेंशन राशि में वृद्धि का प्रस्ताव भी शामिल किया गया था, लेकिन सरकार की तरफ से कहा गया कि इसमें मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के वेतन-भत्ते बढ़ाने पर भी विचार किया जाए, इसके बाद नए सिरे से कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक विधायकों के वेतन में 60 हजार रुपए की वृद्धि की जा सकती है। यह वर्तमान वेतन की करीब 45 प्रतिशत होगी। इस तरह विधायकों का वेतन बढक़र 1 लाख 70 हजार रुपए हो जाएगा।
किसका वेतन कितना बढऩे का अनुमान
सूत्रों के अनुसार विधायकों का वेतन-भत्ता एक लाख 70 हजार रुपये, पूर्व विधायकों का 35 से बढ़ाकर 58 हजार, मुख्यमंत्री को दो लाख से बढ़ाकर 2.60 लाख, मंत्रियों का 1.70 लाख से बढ़ाकर 2.20 लाख, राज्यमंत्री का 1.50 लाख से दो लाख, विधानसभा अध्यक्ष का 1.85 से बढ़ाकर 2.20 लाख, उपाध्यक्ष का 1.70 से बढ़ाकर दो लाख, नेता प्रतिपक्ष का 1.70 से बढ़ाकर 2.20 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन-भत्ता किया जा सकता है। इसमें वेतन, सत्कार, निर्वाचन क्षेत्र के साथ दैनिक भत्ता शामिल है। प्रदेश के बाहर प्रवास पर ढाई हजार रुपये के हिसाब से दैनिक भत्ता मिलता है। मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि पूर्व विधायकों की पेंशन में 66 फीसदी का इजाफा हो सकता है। वर्तमान में पूर्व विधायकों को 20 हजार रुपए पेंशन और 15 हजार रुपए चिकित्सीय सहायता मिलाकर 35 हजार रुपए मिलते हैं। अब इसमें 23 हजार रुपए का इजाफा कर 58 हजार रुपए किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष की सैलरी में भी इजाफा करने पर सहमति बन गई है। स्पीकर को हर महीने वेतन व भते के रूप में 1 लाख 85 हजार रुपए मिलते हैं। अब इसमें 27 फीसदी का इजाफा करते हुए ये राशि 2 लाख 35 हजार रुपए करने का प्रस्ताव है। इसी तरह नेता प्रतिपक्ष को हर महीने वेतन-भते के रूप में। लाख 70 हजार रुपए मिलते है। अब इसमें 29 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए ये 2 लाख 20 हजार रुपए किए जाने का प्रस्ताव है। समिति के सामने यह प्रस्ताव भी आया था कि विधायकों का 10 लाख रुपए तक का बीमा कराया जाए, लेकिन इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया। समिति के सामने विधायकों के परिवार के सदस्यों के इलाज के खर्च पर विचार विमर्श किया गया। इस पर भी सहमति नहीं बन पाई। सरकार ने बीमा कराने के प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी, क्योंकि विधायकों के इलाज का पूरा खर्च सरकार के खजाने से ही होता है।
कमेटी ने अपना प्रस्ताव भेजा
कमेटी ने दो दौर की चर्चा कर वेतन, भत्ते और पेंशन में बढ़ोतरी संबंधी प्रस्ताव तैयार कर अपनी सिफारिश राज्य शासन को भेजी। इसमें पूर्व विधायकों की पेंशन राशि में वृद्धि का प्रस्ताव भी शामिल किया गया था, लेकिन सरकार की तरफ से कहा गया कि इसमें मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के वेतन-भत्ते बढ़ाने पर भी विचार किया जाए, इसके बाद नए सिरे से कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दस वर्ष से विधायकों के वेतन-भत्ते में वृद्धि नहीं हुई। जबकि, खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसे देखते हुए वेतन-भत्ते में संशोधन किया जाएगा। इसके लिए उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में भाजपा से अजय विश्नोई और कांग्रेस से सचिव यादव को लेकर समिति बनाई गई थी। इसकी दो बैठकों में विभिन्न राज्यों में विधायकों को दिए जा रहे वेतन-भत्ते का अध्ययन रिपोर्ट रखी गई। इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी संसदीय कार्य विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली। इसके बाद पुनरीक्षित वेतन-भत्ते का प्रस्ताव बनाकर मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा।
