- मनमानी करने वालों की तैयार हो रही गोपनीय लिस्ट, गिरेगी गाज

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र में मंत्रियों के साथ की सत्ता और संगठन की नजर मंत्रियों के ओएसडी और पीए पर है। सूत्रों का कहना है कि संघ उन मंत्रियों के ओएसडी और पीए की गोपनीय लिस्ट तैयार करवा रहा है, जिनकी कार्यप्रणाली से भाजपा और सरकार की साख पर दाग लग रहा है। दरअसल कई ओएसडी और पीए मनमानी पर आमादा हैं। भाजपा नेता भी इनसे खुश नहीं हैं। संघ इनकी गोपनीय लिस्ट बना रहा है, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन मोहन को सौंपी जाएगी। माना जा रहा है कि मंत्रियों के विवादित ओएसडी और पीए पर जल्द ही गाज गिर सकती है।
गौरतलब है कि सरकार के गठन के दौरान ही मुख्यमंत्री ने इस बात को लेकर सख्ती की थी कि किसी भी मंत्री के पास विवादित छवि वालों को ओएसडी और पीए ने बनाया जाए। लेकिन धीरे-धीरे अधिकांश मंत्रियों ने अपनी पसंद के अफसरों को अपना ओएसडी बना लिया। अब प्रदेश सरकार के आधा दर्जन मंत्रियों की कार्यप्रणाली से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाखुश है। संघ के अनुषांगिक संगठन के पदाधिकारियों की शिकायत है कि इन मंत्रियों के ओएसडी पूरा विभाग अपनी मर्जी से चला रहे हैं और कार्यकर्ताओं की नहीं सुन रहे हैं। संघ की बैठक में यह मुद्दा उठ चुका है। अब माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन मंत्रियों के यहां पदस्थ अफसरों को बदला जाएगा। इनमें कुछ मंत्रियों के ओएसडी, तो कुछ के निज सचिव शामिल हैं। गौरतलब है कि मप्र के पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ में संघ पदाधिकारियों के साथ भाजपा के आला नेताओं की बैठक में भी वहां के कुछ मंत्रियों के स्टाफ को लेकर संघ पदाधिकारियों ने शिकायत की थी। इसके बाद वहां आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए मंत्रियों के यहां पदस्थ कुछ अधिकारियों को बदल दिया गया था। यह कार्रवाई वहां के सीएम सचिवालय के निर्देश पर हुई थी।
आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों ओएसडी से नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांतीय स्तर के पदाधिकारियों की बैठक ली थी। इस बैठक में संघ के कुछ पदाधिकारियों ने आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों के विशेष सहायकों की कार्यप्रणाली को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की। इन पदाधिकारियों का कहना था कि विभाग मंत्री के पास है, लेकिन वहां पूरी तरह ओएसडी हावी हैं और वे मंत्री के कहने के बावजूद उचित काम में भी अंडग़ा लगाते हैं। संघ से जुड़े लोगों के काम करने में उनकी कोई रुचि नहीं है। यह भी कहा गया कि उनसे भाजपा के कार्यकर्ता भी खुश नहीं है। अब इस बैठक के बाद इन ओएसडी को हटाया जा सकता है। जिन मंत्रियों के स्टाफ की शिकायत की गई, उनमें एक मंत्री मालवा क्षेत्र से आते हैं। इन मंत्री का संघ से जुड़ाव भी है, पर इनके ही ओएसडी की कार्यप्रणाली से संघ के लोग खुश नहीं है। ये ओएसडी लंबे समय से मंत्री से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा एक महिला कैबिनेट मंत्री और महिला राज्यमंत्री की शिकायत भी संघ की ओर से आई है। इनमें राज्यमंत्री पहली बार की विधायक हैं। इन दोनों मंत्रियों को लेकर कहा गया है कि वे पूरी तरह अपने ओएसडी के कहने पर कार्य करती हैं। इनमें से एक मंत्री विंध्य से आती हैं। एक अन्य मंत्री के यहां तैनात एक रिटायर्ड व्यक्ति की कार्यप्रणाली को लेकर भी शिकायत की गई है। बैठक में यह भी कहा गया कि भाजपा के कार्यकर्ताओं के काम भी इन मंत्रियों के यहां पूरी तरह से नहीं हो रहे हैं। वहीं, दो वरिष्ठ मंत्रियों के यहां तैनात निज सचिव और निज सहायक को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही इन्हें मंत्रियों के यहां से हटाया जा सकता है। गौरतलब है कि इनमें से अधिकतर अधिकारी और कर्मचारी वे हैं, जो वर्षों से मंत्रियों के यहां जमे हैं। सरकार कोई भी रही हो, पर ये अधिकारी और कर्मचारी किसी न किसी मंत्री के स्टाफ में रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस बैठक में अगर कुछ मंत्रियों के यहां पदस्थ स्टाफ की शिकायतें सामने आईं, तो मालवा और महाकौशल समेत चंबल से जुड़े मंत्री ऐसे भी हैं, जिनके व्यवहार और कामकाज को जमकर सराहा गया और कहा गया कि उनका स्टाफ भी पूरी तरह सहयोग करता है। वर्ष 2020 में कमलनाथ सरकार की सत्ता से विदाई के बाद जब भाजपा फिर से सत्ता में आई थी, तब केंद्रीय नेतृत्व ने फरमान जारी किया था कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों को मंत्री स्टाफ में न रखा जाए, जो पहले मंत्रियों के यहां रह चुके हैं। इसके बाद कुछ मंत्रियों के ओएसडी, निज सचिव व निज सहायकों को उनके मूल विभाग में पदस्थ कर दिया गया था। हालांकि बाद में ये अधिकारी जोड़-तोड़ करके फिर से मंत्री स्टाफ में पहुंचने में कामयाब हो गए।
