18 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था का रोडमैप तैयार

अर्थव्यवस्था
  • डॉ. मोहन के विजन पर जगदीश की धनवर्षा

मप्र को विकसित बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का जो विजन है उसे अमलीजामा पहनाने के लिए वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में प्रावधान करते हुए धनवर्षा की है। 4.38 लाख करोड़ रुपए के रोलिंग बजट में 18 लाख करोड़ रुपए की इकोनॉमी का रोडमैप छिपा है।

गौरव चौहान/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश बजट कोई सामान्य बही-खाता नहीं है। यह साफ तौर पर एक संकेत है कि मप्र अब अपनी छवि बदल रहा है। यह सूबा अब अपने बजट में खुद को जोड़-जुगाड़ के दौर से निकालकर खुद का निर्माण करने और अपनी संपत्ति तैयार करने की बड़ी तैयारी करने या यूं कहें मेगा ब्लूप्रिंट तैयार करने की ओर बढ़ता दिख रहा है। मप्र के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का ये बजट 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए का है। देवड़ा ने कहा कि ये बजट ग्यानी के स्वरूप में है। इसमें गरीब, युवा, अन्नदाता (किसान), नारी, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियलाइजेशन पर फोकस है। इनके लिए 3 लाख करोड़ रुपए यानी कुल बजट के करीब 9 प्रतिशत हिस्से का प्रावधान किया गया है। 2028 में होने वाले सिंहस्थ के लिए 3600 करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है। विधायक निधि नहीं बढ़ाने पर विपक्ष ने हंगामा कर दिया। स्व-सहायता समूह, उज्ज्वला योजना समेत नारी कल्याण की विविध योजनाओं के लिए 1 लाख 27 हजार 555 करोड़ के प्रावधान किए हैं। वर्किंग वूमन के लिए 5700 हॉस्टल बनाए जाएंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास के लिए 40062 करोड़ रुपए की घोषणा की। लाड़ली बहनों के लिए 23,882 करोड़ के प्रावधान का ऐलान किया। युवाओं के लिए 15 हजार शिक्षकों की भर्ती का ऐलान किया। 8वीं तक के बच्चों को फ्री टेट्रा पैक दूध देने की घोषणा की। प्रदेश में कोई नया टैक्स नहीं लगेगा। वित्तमंत्री ने विधानसभा में 438317 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने 106156 करोड़ रुपए से अधिक का पूंजीगत व्यय बताया। 44.42 करोड़ रुपये राजस्व आधिक्य। राज्य स्वयं के करों से 117667 करोड़ रुपए जुटाएगा। केंद्रीय करों के हिस्से में प्रदेश को 112137 करोड रुपए मिलेंगे। इसके साथ ही केंद्रीय सहायता अनुदान 54505 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे। वित्तमंत्री ने कहा कि यह बजट पीएम के सपने को साकार करने वाला है। उन्होंने बजट भाषण की शुरुआत में ही कहा कि एमपी का बजट किसानों को समर्पित है। मध्य प्रदेश में कोई नया टैक्स नहीं लगाया जाएगा और न ही वर्तमान में किसी टैक्स में कोई बढ़ोतरी की गई है। वित्त मंत्री देवड़ा ने जी राम जी के लिए 10428 करोड़ और पीएम जनमन के लिए 900 करोड़ रुपए के प्रावधान का ऐलान किया। वहीं, 1 लाख किसानों को सोलर पंप देने की घोषणा की। इसके अलावा श्रम विभाग के लिए 1 हजार 335 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। सडक़ों की मरम्मत के लिए 12690 करोड़, जल जीवन मिशन के लिए 4 हजार 454 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि ये पीएम के सपने को साकार करने वाला बजट है। हर नारी को न्याय हमारी सरकार का उद्देश्य है। हम देश के तीसरे युवा प्रदेश हैं। युवाओं के हाथ को काम मिले ये हमारा संकल्प है। सरकार ने दावा किया कि वर्ष 2011-12 से 2025-26 तक प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में औसतन 12.73 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई है। वर्ष 2025-26 के लिए जीएसडीपी का पुनरीक्षित अनुमान 16 लाख 69 हजार 750 करोड़ रुपए है। वहीं राजकोषीय घाटा 74 हजार 323 करोड़ रुपए यानी जीएसडीपी का 4.45 प्रतिशत अनुमानित है। हालांकि केंद्र से मिलने वाली विशेष सहायता राशि को अलग रखने पर यह 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के अनुरूप बताया गया है। इसे वित्तीय अनुशासन का संकेत माना जा रहा है। वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में बजट का आकार 11 प्रतिशत बढ़ा है। राजस्व व्यय 3 लाख 8 हजार 659 करोड़ रुपए और पूंजीगत व्यय 80 हजार 266 करोड़ रुपए प्रस्तावित है। सामाजिक और आर्थिक उत्थान की योजनाओं के लिए 1 लाख 83 हजार 708 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 26 प्रतिशत और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 17 प्रतिशत राशि सुरक्षित की गई है। एमपी में पहली बार डिजिटल बजट पेश किया गया है। बजट में हर वर्ग को ध्यान में रखा गया है। मध्य प्रदेश विकसित भारत बनाने में अपना योगदान दे रहा है। मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा- हर युवा को रोजगार और हर उपज को दाम उपलब्ध कराना हमारी सरकार का लक्ष्य है। वित्तमंत्री का भाषण शुरू होने से पहले ओमकार सिंह मरकाम ने विरोध भी जताया।

लाड़ली बहनों की बल्ले-बल्ले
मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार की मास्टर स्ट्रोक लाड़ली बहना योजना पूरी रफ्तार से चलेगी। अभी लाड़ली बहनों को डेढ़ हजार रुपये प्रति माह मिल रहे हैं। सरकार की योजना इस राशि को धीरे-धीरे बढ़ाकर 3 हजार करने की है। सरकार द्वारा लाए गए बजट में इसकी झलक दिखती है। पूरा बजट नारी शक्ति को समर्पित है। लाड़ली बहना योजना के साथ ही लाड़ली लक्ष्मी योजना सहित महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मनिर्भरता पुख्ता करने का प्रयास बजट में दिखता है। महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और कौशल उन्नयन कार्यक्रमों से जोडऩे के लिए विभिन्न प्रकार के फंड तय किए गए हैं। बजट में जहां लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 1801 करोड़ का प्रावधान है तो लाड़ली बहना योजना के लिए 23, 800 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। अभी महिलाओं को हर माह डेढ़ हजार की आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार कई बार संकेत दे चुकी है कि इसे बढ़ाकर 3 हजार किया जाएगा। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने भी बजट पेश करते समय इसके संकेत दिए। लाड़ली बहना योजना की राशि बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी कई बार सार्वजनिक मंच से ऐलान कर चुके हैं। योजना की शुरुआत 1,000 से हुई थी, जिसे पहले 1,250 और फिर 1,500 किया गया। यह राशि सीधे महिलाओं आधार से जुड़े बैंक खाते में जमा की जाती है। बजट में बताया गया कि इस योजना में 1 करोड़ 25 लाख महिलाएं पंजीकृत हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना में 23,882 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। जून 2023 से फरवरी 2026 तक महिलाओं को 33 किश्तों का नियमित भुगतान किया जा चुका है।
जानकारों का कहना है कि लाड़ली बहनों को अचानक 1500 से 3000 मिलना इस सत्र में मुश्किल लगता है। लेकिन ढाई से लेकर 500 रुपये की वृद्धि लाड़ली बहनों के लिए की जा सकती है। ऐसा हुआ तो इस सत्र में महिलाओं को 500 रुपये बढक़र यानी हर माह 2000 रुपये मिल सकते हैं। विधानसभा चुनाव के पहले ये राशि बढक़र 3000 की जाएगी, इसमें कोई संश्य नहीं है। बजट नारी सशक्तिकरण पर फोकस है। लाड़ली बहना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए भारी भरकम रकम का प्रवाधान किया गया तो वहीं, महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर कराने पर फोकस किया गया है। भविष्य में महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और कौशल विकास कार्यक्रमों से जोडऩे की योजनाएं बजट में हैं। सरकार का दावा है कि लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ 52 लाख 29 हजार बालिकाओं को लाभ मिल रहा है। अब तक 14 लाख 12 हजार बालिकाओं को छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। इस योजना के लिए 1800 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा महिला और बाल विकास विभाग को सशक्त बनाने पर फोकस है। इस बजट में महिला सशक्तिकरण और नारी कल्याण को केंद्र में रखा गया है। बजट में महिलाओं और बालिकाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 8,801 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वहीं लाड़ली बहना योजना के लिए 23,882 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिससे प्रदेश की करोड़ों महिलाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण अभियान को मजबूत करने के लिए 80 लाख दूध पैकेट वितरित किए जाएंगे। इस योजना के लिए 6,700 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। कामकाजी महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई जिलों में ‘सखी भवन’ का निर्माण किया जा रहा है, ताकि बाहर से आने वाली महिलाओं को सुरक्षित और किफायती आवास मिल सके। सरकार ने नारी कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के लिए कुल 1,27,555 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। सरकार का कहना है कि यह बजट महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

अन्नदाता को आर्थिक संबल…
मप्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए किसानों और ग्रामीण विकास को केंद्र में रखा है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट भाषण की शुरुआत अर्थशास्त्र के श्लोक प्रजा सुखम राजनाह से की और कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों और आमजन की समृद्धि है। वित्त मंत्री ने बताया कि मप्र देश का तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादन वाला प्रदेश है और सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री वृंदावन योजना लागू की गई है। वहीं, अहिल्या बाई कौशल विकास योजना के जरिए ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बजट पेश किए जाने के दौरान कांग्रेस विधायकों ने हंगामा भी किया, जिस पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरा किया है और कथनी-करनी में अंतर नहीं है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि दाल उत्पादन में मप्र देश में पहले स्थान पर है, जबकि गेहूं और तिलहन उत्पादन में दूसरा स्थान रखता है। संतरा, धनिया और लहसुन उत्पादन में भी प्रदेश अग्रणी है। सरकार किसानों को खेत में उत्पादन से लेकर उपज की बिक्री तक हर स्तर पर सहायता दे रही है। किसानों के लिए अल्पकालीन ऋण योजना भी उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए 3000 करोड़ रुपये की लागत से 1 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराने की घोषणा की है। इससे किसानों को सिंचाई में सुविधा मिलेगी और बिजली पर निर्भरता कम होगी। किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत किसान परिवारों को प्रतिवर्ष कुल 12 हजार रुपये की नकद सहायता दी जा रही है। यह राशि छोटे और सीमांत किसानों को खाद और बीज खरीदने में सीधी मदद प्रदान कर रही है। भावांतर योजना की सफलता से प्रभावित होकर अन्य राज्यों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। सरकार ने कृषक उन्नति योजना की घोषणा की है, जिसके तहत किसानों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 21 लाख 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पंजीकृत किया गया है। साथ ही 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य तय किया गया है। किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के लिए 25 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 1,299 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों को सुरक्षा मिलेगी। सीएम कृषक उन्नति योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों को 337 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी और 6.69 लाख किसानों को यह राशि वितरित की जाएगी। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया गया है।

युवा, विद्यार्थी, खेल…
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट भाषण में कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने वाला है। उन्होंने बताया कि कार्यशील जनसंख्या का बढ़ता अनुपात प्रदेश के आर्थिक विकास को गति देने के अवसर प्रदान करता है। हमारी सरकार युवा वर्ग के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, रोजग़ार के अवसर एवं उनकी आवश्यकताओं तथा आकांक्षाओं की पूर्ति की दिशा में प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि शिक्षा नई पीढ़ी के सृजनात्मक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है। सरकार नवीन शैक्षणिक संस्थाओं की शुरुआत करने के साथ पूर्व से संचालित संस्थाओं में उत्कृष्ट शैक्षणिक व्यवस्था और अधोसंरचना सुनिश्चित कर रही है। स्कूलों को बिजली आपूर्ति, इंटरनेट सुविधा और स्मार्ट कक्षाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पीएमश्री योजना के अंतर्गत 799 विद्यालय संचालित हैं। साथ ही 274 सांदीपनि विद्यालय भी कार्यरत हैं। प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। छात्रों तक पहुँच आसान बनाने के लिए 4 लाख 85 हज़ार साइकिलें वितरित की गई हैं। 94,300 मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप प्रदान किए गए हैं।
प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के लिए 15,000 शिक्षकों की नियुक्तियाँ प्रक्रियाधीन हैं। विद्यालय भवनों के संधारण एवं रख-रखाव कार्य योजनाबद्ध रूप से किए जा रहे हैं। शिक्षा संबंधी प्रमुख योजनाओं जैसे सांदीपनि विद्यालय में 3,892 करोड़, साइकिल वितरण योजना में 210 करोड़, पी.एम.श्री योजना में 530 करोड़ और नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकों की योजना में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित 25,439 विद्यालयों में लगभग 20 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। 94 सांदीपनि विद्यालयों को उत्कृष्ट अधोसंरचना और शैक्षणिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में लगभग 3,40,000 विद्यार्थियों को 458 करोड़ रुपये से अधिक की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति प्रदान की गई। अनुसूचित जनजाति की शैक्षणिक संस्थाओं हेतु 4,485 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रियाधीन है। छात्रवृत्ति की विभिन्न योजनाओं के लिए 2026-27 के बजट में 986 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों हेतु प्रदेश में 10 ज्ञानोदय विद्यालयों को सीबीएसई मापदंडों के अनुसार अपग्रेड किया जा रहा है। इस वर्ग के विद्यार्थियों हेतु 1,913 छात्रावास संचालित हैं जिनकी कुल क्षमता 95,000 है। युवाओं के स्वरोजग़ार के लिए संत रविदास स्वरोजग़ार योजना के अंतर्गत 1,927 और डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना के अंतर्गत 2,316 प्रकरणों में ऋण वितरण किया गया है। प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 56 विश्वविद्यालय और 1,360 शासकीय उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग 16 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। उच्च शिक्षा को सुलभ और रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए प्रत्येक जिले में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस संचालित हैं। नैक मूल्यांकन के तहत 205 महाविद्यालय नैक एक्रिडिटेड हो चुके हैं। 31 नए महाविद्यालय भवनों का निर्माण और 96 भवनों का सुदृढ़ीकरण कार्य प्रचलित है। विश्वविद्यालयों में संचालित इन्क्यूबेशन केन्द्रों में एक वर्ष में 174 स्टार्टअप आरंभ किए गए और 22 पेटेंट कराए गए। विदेशों में उच्च शिक्षा अध्ययन हेतु छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 में तकनीकी पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की संख्या 26 प्रतिशत बढ़ी। सभी शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में वाई-फाई कैंपस और स्मार्ट क्लास रूम स्थापित किए गए। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का परिसर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल में शुरू हो चुका है। वर्ष 2025 में आयोजित 608 रोजगार मेलों और युवा संगम कार्यक्रमों के माध्यम से 85,000 युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किए गए।
खेल गतिविधियां और स्वस्थ मनोरंजन युवाओं के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। पिछले 2 वर्षों में प्रदेश के खिलाडिय़ों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 19 स्वर्ण, 29 रजत और 26 कांस्य पदक तथा राष्ट्रीय स्तर पर 189 स्वर्ण, 131 रजत और 118 कांस्य पदक प्राप्त कर प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया। युवाओं की खेल अभिरुचियों को प्रोत्साहित करने हेतु सीएम युवा-शक्ति योजना के अंतर्गत सभी विधानसभा क्षेत्रों में सर्वसुविधा संपन्न स्टेडियम उपलब्ध कराने का कार्य प्रारंभ किया गया। वर्तमान में प्रदेश में 11 खेल अकादमियों में 18 खेलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर की अधोसंरचना, उपकरण और प्रशिक्षण सुविधा एं हैं। साथ ही 4 हॉकी टर्फ और 30 खेल स्टेडियम निर्माणाधीन हैं। खेल और युवा कल्याण के लिए 815 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 23,747 करोड़
मप्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल 23,747 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा कि स्वास्थ्य मानव की पूंजी है। हमारी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने और प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। डिजिटल स्वास्थ्य पहल के क्षेत्र में मप्र देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में अब तक 55 जिला चिकित्सालय, 158 सिविल चिकित्सालय, 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 1,442 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और 10,256 उप स्वास्थ्य केन्द्रों में कुल 48 हजार बिस्तर उपलब्ध हैं। मैहर, मऊगंज और पांदुर्णा में नए जिला चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। विशेष ध्यान उच्च जोखिम वाले दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर दिया गया है। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य संस्थाओं में 228 बर्थ वेटिंग रूम स्थापित किए गए हैं। फाइनेंस मंत्री देवड़ा ने बताया कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 5 नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय शुरू किए गए हैं। एमबीबीएस पाठ्यक्रम की सीटें 2,275 से बढ़ाकर 2,850 की गई हैं। स्नातकोत्तर सीटें 1,262 से बढक़र 1,468 हो गई हैं। इंदौर, रीवा और सतना के चिकित्सा महाविद्यालयों को उन्नत किया गया है। भोपाल, इंदौर, रीवा, जबलपुर, सागर और ग्वालियर में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था की गई है। सरकार ने जन-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से धार, बैतूल और पन्ना में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए अनुबंध किए हैं। इसके अलावा भिंड, मुरैना, खरगौन, अशोकनगर, गुना, बालाघाट, टीकमगढ़, सीधी और शाजापुर में 9 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया चल रही है। लोक स्वास्थ्य संवर्ग में 3,850 चिकित्सक और 1,256 नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती भी प्रक्रियाधीन है। फाइनेंस मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान) के तहत 4 करोड़ 46 लाख से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं। वहीं 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए आयुष्मान वय वंदना योजना के तहत 15 लाख 48 हजार कार्ड बनकर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल कर दिया गया है। इस योजना के तहत 1,118 शासकीय और 720 निजी अस्पताल जुड़े हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के लिए 2,139 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। प्रदेश सरकार भारतीय चिकित्सा पद्धति के माध्यम से निदान और इलाज में भी तेजी ला रही है। प्रदेश में 8 नए आयुर्वेद महाविद्यालय और चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं।

एक साल में बनेंगे 48 इंडस्ट्रियल पार्क
मध्य प्रदेश में उद्योग और रोजगार को लेकर मोहन सरकार ने बजट में बड़ा ऐलान किया है। वर्ष 2025 को उद्योग और रोजगार वर्ष के रूप में मनाते हुए मप्र ने औद्योगिक विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज की हैं। पिछले दो वर्षों में प्रदेश को विभिन्न क्षेत्रों में कुल 33 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 8 लाख 63 हजार करोड़ रुपये के निवेश पर कार्य प्रारंभ हो चुका है। औद्योगिक विकास को गति देने के लिए राज्य सरकार ने बजट में म.प्र. एमएसएमई विकास नीति 2025, म.प्र. एमएसएमई औद्योगिक भूमि एवं भवन आवंटन तथा प्रबंधन नियम 2025 तथा उद्योग संवर्धन नीति 2025 लागू की है। इसके अतिरिक्त बड़े उद्योगों को आकर्षित करने और निवेशकों को समग्र पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराने के लिए मप्र लॉजिस्टिक नीति 2025 एवं मप्र एक्सपोर्ट संवर्धन नीति 2025 जारी की गई हैं। प्रदेश को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ाने हेतु मप्र स्पेसटेक नीति 2026 का प्रभावी क्रियान्वयन भी प्रस्तावित है। बजट में उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि राज्य में प्रदेश के सभी क्षेत्रों में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए 19,300 एकड़ भूमि पर 48 औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इनमें 5 आईटी पार्क, इंदौर का प्लग एंड प्ले पार्क, मंडीदीप में फ्लैटेड इंडस्ट्रीज़ और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।
2,360 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रही इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना उद्योग और निवेश को नई गति देगी। वहीं दिल्ली-नागपुर औद्योगिक कॉरिडोर के अंतर्गत बुंदेलखंड क्षेत्र में सागर के मसवासी ग्रंट औद्योगिक क्षेत्र के लिए 1,500 एकड़ से अधिक भूमि पर विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी गई है। ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना की दिशा में भी कार्य प्रगति पर है, जिससे देश को टेलीकॉम क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री देवड़ा ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 23 लाख से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्योग पंजीकृत हैं। इनमें से 4 लाख 50 हजार विनिर्माण इकाइयाँ लगभग 36 लाख रोजगार सृजित कर रही हैं। पिछले दो वर्षों में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत 16,491 युवाओं को 1,134 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए हैं। प्रदेश में संचालित 6,670 स्टार्टअप में से 3,000 से अधिक स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित हैं। एक जिला एक उत्पाद योजना के अंतर्गत ग्वालियर के मिंट स्टोन और छतरपुर के लकड़ी के फर्नीचर को जीआई टैग प्राप्त हुआ है, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। प्रदेश सरकार ने निवेश और औद्योगीकरण क्षेत्र के लिए 5,957 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान प्रस्तावित किया है, जो आने वाले समय में औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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