- निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियों का काउंटडाउन शुरू

गौरव चौहान
निगम-मंडलों और विकास प्राधिकरणों में लंबे समय से प्रतीक्षित राजनीतिक नियुक्तियों का काउंटडाउन शुरू हो गया है। भाजपा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अब अलग-अलग सूचियों के बजाय एक ही जंबो सूची जारी करने का फैसला किया है। भाजपा सूत्रों के अनुसार, निगम-मंडलों में अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर नेताओं का पुनर्वास होगा। दरअसल, विधानसभा चुनाव 2023 के बाद से ही निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर संगठन पर दबाव बना हुआ है। पहले लोकसभा चुनाव के बाद नियुक्तियां करने की योजना थी, लेकिन भाजपा के संगठन चुनाव, फिर प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में देरी के चलते मामला आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद बिहार चुनाव के चलते भी निर्णय टलता रहा।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में निगम-मंडलों और विभिन्न प्राधिकरणों में लंबित पड़ी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सरकार और संगठन के बीच अंतिम दौर का मंथन चल रहा है। मप्र विधानसभा के बजट सत्र से पहले कुछ नियुक्तियों की सूची जारी हो सकती है। बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा। इस तरह दो हफ्ते में नियुक्तियों की सूची जारी होने के आसार हैं। निगम-मंडलों में नियुक्ति की घोषणा एक साथ नहीं होगी। नियुक्तियों की घोषणा चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। सरकार और संगठन पिछले करीब चार महीनों से राजनीतिक नियुक्तियों की तैयारी में जुटा है। संगठन और सरकार स्तर पर कई दौर की चर्चा के बाद सूची को लगभग अंतिम रूप भी दे दिया गया था, लेकिन अब तक इसे मंजूरी नहीं मिल पाई है। पहले योजना थी कि पहली किस्त में प्रदेश के विकास प्राधिकरणों और क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों-जैसे विध्य, बुंदेलखंड और महाकौशल विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्ति की जाए। इसके लिए अलग से सूची भी तैयार कर ली गई थी, लेकिन उसे फिलहाल रोक दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही वरिष्ठ नेताओं को भरोसे में लिया है। वे उपेक्षित और घर बैठ चुके वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात कर रहे है। इस बार की नियुक्तियों में पार्टी का खास फोकस पूर्व विधायकों और पूर्व मंत्रियों के पुनर्वास पर है। ऐसे कई नेता हैं, जो चुनाव के बाद संगठन या सरकार में किसी जिम्मेदारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इनमें से कई नेताओं के पास फिलहाल कोई सक्रिय दायित्व नहीं है, जिसे देखते हुए पार्टी उन्हें निगम-मंडलों और आयोगों में समायोजित करना चाहती है।
दिग्गजों के बीच सामंजस्य का होगा प्रयास
इस बीच क्षेत्रीय क्षत्रपों ने अपने समर्थकों को एडजस्ट कराने के लिए लॉबिंग तेज कर दी है। विधायकों, सांसदों और पूर्व मंत्रियों तक ने सक्रियता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी चुनौती दिग्गज नेताओं शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों के बीच सामंजस्य बिठाने की है। वहीं, भाजपा में शामिल हुए कई पूर्व कांग्रेसी नेताओं को अब भी किसी पद की प्रतीक्षा है। ऐसे नेताओं के लिए राजनीतिक नियुक्तियां ही आखिरी उम्मीद मानी जा रही हैं। भाजपा में नियुक्तियों का दौर शुरू हो गया है, लेकिन कांग्रेस का पाला बदलकर भाजपा में आने वालों के हाथ अभी भी खाली है। ऐसे में इन नेताओं के पास अब राजनीतिक नियुक्ति की अंतिम विकल्प बचा है। फिर चाहे पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी हो या पूर्व मंत्री रामनिवास रावत। दोनों ही संगठन से बड़े दायित्व की उम्मीदें बांधे बैठे हैं। इनके साथ ही दल बदलने वाले समर्थक भी वर्चस्व की जंग में टकटकी लगाए बैठे हैं।
कांग्रेस की जिलों की कार्यकारिणी जल्द
अधर, मिशन-2028 की तैयारियों में जुटी मप्र कांग्रेस कमेटी ने लंबे इंतजार के बाद जिला कार्यकारिणी का गठन शुरू कर दिया है। पार्टी दो दिन में चार जिलों-सागर, छिंदवाड़ा, मऊगंज व झाबुआ की कार्यकारिणी घोषित कर चुकी है। आने वाले दिनों में चरणबद्ध तरीके से अन्य जिलों की कार्यकारिणी घोषित की जाएगी। कोशिश है कि फरवरी अंत तक सभी 71 जिलों की कार्यकारिणी घोषित कर दी जाए। हालांकि यह किसी चुनौती से कम नहीं है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अधिकतर जिला कार्यकारिणी के नाम फाइनल हो गए हैं। उनकी औपचारिक घोषणा होना बाकी है। कुछ जिलों की कार्यकारिणी के नामों पर मंथन चल रहा है। कार्यकारिणी के साथ ही पार्टी करीब 250 ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति की तैयारी में है। अब तक 800 से ज्यादा ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियां की जा चुकी हैं। बता दें कि मप्र में जिला कांग्रेस अध्यक्षों की घोषणा अगस्त में हुई थी, लेकिन जिलाध्यक्ष बने पांच माह बीत जाने के बाद भी जिला कार्यकारिणी की घोषणा नहीं किए जाने से स्थानीय नेताओं में असंतोष पैदा होने लगा है। विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी संगठन के गठन में देरी को लेकर भोपाल में मीडिया से चर्चा में कहा था कि जितनी जल्दी संगठन मजबूत ढांचे में बदलेगा, उतनी ही बेहतर चुनावी तैयारी होगी। हम जितनी जल्दी संगठन बनाएंगे, उतनी ही मजबूती से चुनाव की तैयारी कर पाएंगे। इसकेतीन दिन बाद शुक्रवार को पीसीसी ने तीन जिला कार्यकारिणी और 18 जिला संगठन महासचिवों की घोषणा कर दी। मध्य प्रदेश कांग्रेस के संगठन महासचिव डॉ. संजय कामले का कहना है कि संगठन के गठन की प्रक्रिया तेजी से जारी है। जिला, ब्लॉक, पंचायत एवं वार्ड स्तर पर नियुक्तियां की जा रही है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द संगठन के गठन का काम पूरा कर लिया जाए, ताकि पूरी ताकत से आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटा जा सके।
