खाली होने से पहले ही राज्यसभा की कुर्सी दौड़ शुरू

राज्यसभा
  • मप्र में अप्रैल में खाली हो रही हैं राज्यसभा की तीन सीटें

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में साल 2026 राजनीतिक हलचलों से भरा रहने वाला है। इसी कड़ी में फिलहाल राज्यसभा की उन तीन सीटों के लिए सियासी हलचल शुरू हो गई है, जो अप्रैल और जून में को खाली होंगी। सीटें अभी  भले ही खाली नहीं हुई हैं, लेकिन राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी उठापटक शुरू हो गई है।  इनमें भाजपा के खाते की दो सीटें और कांग्रेस की एक सीट है। 9 अप्रैल को दिग्विजय सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके साथ ही भाजपा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी का भी कार्यकाल इसी दिन पूरा होगा। वहीं जून में जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल पूरा होगा। बताया जा रहा है कि जॉर्ज कुरियन को दोबारा मौका मिल सकता है। जबकि सुमेर सोलंकी पर सस्पेंस है, उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजा जाएगा या उनकी जगह भाजपा किसी नए चेहरे को मौका देगी। वहीं दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में फिर न जाने की घोषणा कर दी है।
मप्र में आने वाले तीन महीने राजनीतिक तौर पर सरगर्मी भरे होंगे। दरअसल इस दौरान जहां निगम-मंडलों में नियुक्तियां की जानी हैं, तो वहीं मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार भी हो सकता है। इतना ही नहीं इसी दौरान दलों को अप्रैल माह में संभावित राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के लिए 3 खाली हो रही सीटों के लिए उपयुक्त चेहरे भी तय करने हैं। सूत्रों की मानें तो राज्यसभा के लिए इस बार नाम तय कर पाना सत्ताधारी भाजपा व कांग्रेस के लिए मुश्किल भरा हो सकता है, क्योंकि इन तीनों के लिए कई अनजाने चेहरों ने भी राज्यसभा जाने के लिए अपनी दावेदारी जतानी शुरू कर दी है।  गौरतलब है कि मप्र में राज्यसभा की 11 सीटें हैं। इसमें मौजूदा समय में 11 पर भाजपा का कई वर्षों से कब्जा है, जबकि 3 सीटों पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं।
भाजपा से इनके नाम चर्चा में
 खासकर भाजपा दोनों सीटों पर कौन जाएगा, इसे लेकर मंथन भी शुरू हो गया है। भाजपा के जानकारों का दावा है कि शीर्ष नेतृत्व एक बार फिर से केन्द्रीय मंत्री जार्ज कुरियन को दोबारा राज्यसभा भेज सकती है, जबकि सोलंकी के स्थान पर कोई अप्रत्याशित चेहरों को भेजा जा सकता है। बताया गया है कि स्थानीय नेतृत्व मप्र की दोनों सीटों पर राज्य से ही नए चेहरों को भेजना चाहता है। नेतृत्व की मंशा भांपकर कई ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अभी से अपना दावा जताना शुरू कर दिया है, जो समर्पित होकर वर्षों से पार्टी के लिए काम करते आ रहे हैं और उनके द्वारा पहले कभी भी न तो किसी भी स्तर पर चुनावी टिकट की मांग नहीं की है। उनके द्वारा पार्टी द्वारा उन्हें सौंप कर हर तरह की जिम्मेदारियों का पूरी तरह से निर्वाहन किया है। भाजपा में राज्यसभा के लिए कई दावेदार हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य, पूर्व कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त विनोद गोटिया, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व मंत्री रामनिवास रावत, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा इस रेस में शामिल है। वहीं विनोट गोटियां, पूर्व मंत्री और संघ से करीबी अरविन्द भदौरिया के अलावा किसी महिला नेत्री में से किसी दो को पार्टी नेतृत्व राज्यसभा भेज सकता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा के लिए अभी विचार चल रहा है। जल्द ही नाम सामने आ सकते हैं। वहीं भाजपा में युवा चेहरे को भी मौका मिल सकता है। बताया जा रहा है कि भाजपा साधु-संत पर भी दांव खेल सकती है।
कांग्रेस के दावेदार
वहीं कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सीट भी खाली हो रही है। इस बीच उन्होंने ऐलान भी किया है कि वे अपनी राज्यसभा सीट खाली कर रहे है। यानी दिग्विजय ने तीसरी बार उच्च सदन जाने से मना कर दिया है। दिग्गी के इस बयान के बाद कांग्रेस में दावेदारी शुरू हो गई है। विधानसभा में संख्या बल के मुताबिक कांग्रेस को एक सीट मिलना तय है। ऐसे में इस सीट पर अगली बार कौन जाएगा, इसे लेकर चर्चाओं ने जोर पकडऩा शुरू कर दिया है। पार्टी हाईकमान इस सीट से ऐसे किसी नेता को दिल्ली भेजने की तैयारी में है, जो पिछले कुछ वर्षों से वनवास जैसी स्थिति में हैं। इनमें वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव का नाम लिया जा रहा है। एआईसीसी सदस्य कमलेश्वर पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल, मौजूदा पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के नाम पर भी चर्चा की जा रही है। हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ या उनके पूर्व सांसद पुत्र नकुल नाथ को भी पार्टी राज्यसभा भेज सकती है। चर्चा यह भी है कि कांग्रेस ऐसे किसी नेता को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देना चाहती है, जो दिग्विजय सिंह की तरह सदन में पार्टी का चेहरा बन सके। पार्टी ने ऐसे नेता की खोज करनी शुरू कर दी है।

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