- 12 लाख कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना बना रही मप्र सरकार

- अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन कर रही है सरकार
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र सरकार राज्य के 12 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक नई और व्यापक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना (जिसे अक्सर सीएम केयर या नई आयुष्मान तर्ज की योजना कहा जा रहा है) तैयार कर रही है। इस योजना का उद्देश्य पुरानी प्रतिपूर्ति प्रणाली को हटाकर इलाज को सरल और सुलभ बनाना है। स्वास्थ्य बीमा योजना को अधिक प्रभावी, समावेशी और कैशलेस बनाने के लिए सरकार अन्य राज्यों के सफल मॉडलों का अध्ययन कर रही है। तमिलनाडु, राजस्थान, और केरल जैसे राज्यों के स्वास्थ्य मॉडल को बेंचमार्क माना जा रहा है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी और तकनीकी एकीकरण के माध्यम से व्यापक कवरेज प्रदान करते हैं।
मप्र सरकार जल्द ही कर्मचारियों के लिए कैशलेस हेल्थ स्कीम लाने की तैयारी में है। इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की टीम ने सुझाव लेने का काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री कर्मचारी एवं पेंशनर्स व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम से योजना तैयार की जा रही है। जिसे लेकर कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक कर सुझाव लिए हैं। एक वॉट्सऐप नंबर जारी कर भी सुझाव मांगे हैं। इसके अलावा, पावर पाइंट प्रजेंटेशन देकर प्रस्तावों की जानकारी दी गई है। जिसमें बताया है कि प्रदेश और राज्य के बाहर के अस्पताल चिह्नित भी किए जा रहे हैं। इसे बेहतर बनाने के लिए अन्य राज्यों के माडल का भी अध्ययन कराया जाएगा। इसके लिए तीन अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य, वित्त और सामान्य प्रशासन) की समिति बनाई गई है। यह पात्रता, वित्तीय मॉडल और क्रियान्वयन संरचना को देखने के साथ ही कर्मचारी और पेंशनर संगठन से परामर्श करके योजना का दस्तावेज तैयार करेगी। इसे पहले मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिव समिति के समक्ष रखा जाएगा। यहां से हरी झंडी मिलने के बाद कैबिनेट की बैठक में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। प्रदेश में कमलनाथ सरकार के समय से स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की तैयारी चल रही है, कई बार विचार विमर्श भी हो चुका है।
अभी योजना खाका खींचा
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अभी योजना का जो खाका खींचा है, उसके अनुसार यह अंशदायी रहेगी। कर्मचारियों से श्रेणी के हिसाब से अंशदान लिया जाएगा, जो 250 से एक हजार रुपये प्रतिमाह प्रस्तावित है। योजना का संचालन राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा किया जाएगा। इसमें कानूनी, बीमा क्षेत्र और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ रहेंगे। तकनीकी टीम भी रहेगी जो क्लेम प्रोसेसिंग, हेल्थ पैकेज, अस्पतालों की संबद्धता आदि काम देखेगी। इस योजना के तहत कर्मचारी पति-पत्नी, माता-पिता, आश्रित दो बच्चे, दत्तक बच्चे, तलाकशुदा पुत्री और पेंशनर पति-पत्नी को पात्रता मिलेगी। हितग्राही का पंजीयन राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम द्वारा ऑनलाइन होगा। सबकी यूनिक आइडी और डिजिटल कार्ड बनेंगे। हितग्राही को प्रत्येक वर्ष आश्रितों की जानकारी का सत्यापन कराना अनिवार्य रहेगा। पेंशनर का पंजीयन पेंशनर कोड के आधार पर होगा। बीमित कर्मचारी-पेंशनर को ओपीडी, दवा और उपकरण के लिए बीस हजार रुपये प्रतिवर्ष मिलेंगे। आपातकालीन परिस्थितियों में पात्र कर्मचारी असंबद्ध अस्पतालों में भी उपचार करा सकेंगे। इसके लिए एक टास्क फोर्स का गठन भी किया जाएगा, जो योजना की समीक्षा और नीतिगत निर्णय से जुड़े मामले देखेगी। उल्लेखनीय है कि राजस्थान और हरियाणा में कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना हैं। समिति इनकी जानकारी बुलाकर सभी पक्षों से फीडबैक लेकर प्रस्ताव को आगे बढ़ाएगी। प्रदेश में अभी ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों के साथ पुलिसकर्मियों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना है। पुलिसकर्मियों का एक रुपये में बीमा होता है और आठ लाख रुपये तक उपचार की सुविधा दी जाती है। वहीं, ऊर्जा विभाग ने अपने 90 हजार से अधिक कर्मचारियों के लिए अंशदायी स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की है। कैशलेस इस योजना में पांच से 25 लाख तक के उपचार की सुविधा है। अब सरकार नियमित कर्मचारियों के लिए योजना ला रही है।
