
- नगरीय विकास एवं आवास विभाग का मामला…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में कर्मचारी हों या अफसर स्वैछारिता बढ़ती ही जा रही है। इसका ताजा उदाहरण प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग में सामने आया है। विभाग में पदस्थ तमाम सब इंजीनियर वगैर विभाग को बताए प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए साक्षात्कार दे आए।
इसके लिए न तो उनके द्वारा कोई अनुमति ली गई और न ही कोई सूचना दी गई। इसकी पोल उस समय खुली जब विभाग को सब इंजिनियरों के दूसरे विभाग में प्रतिनियुक्ति में जाने कके लिए चयन की सूचना दी गई। दरअसल यह दूसरा विभाग भी विकास कामों से जुड़ा हुआ है। गुपचुप उठाए गए इस कदम से आला अफसर बेहद नाराज हैं, जिसकी वजह से अब उन्हें रिलीव नहीं किया जा रहा है। यही नहीं अब संबंधित इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस भी थमाए जा रहे हैं। दरअसल, नगरीय विकास विभाग पहले से ही इंजिनियरों की कमी से जूझ रहा है। जिसकी वजह से दूसरे विभाग में जाने के लिए पहले ही अनुमति मिलना मुश्किल था। कुछ समय पहले मप्र ग्रामीण सडक़ विकास प्राधिकरण में डेपुटेशन पर इंजीनियरों की भर्ती के लिए आवदेन बुलाए गए थे।
इसके लिए नगरीय प्रशासन संचालनालय के 16 सब इंजीनियरों ने विभाग को अंधेरे में रखकर आवेदन कर दिया। वहां साक्षात्कार भी दे आए और फिर चयन भी हो गया। इनके चयन के बाद प्राधिकरण ने संचालनालय को पत्र लिख कर उनके चयन की सूचना देते हुए उन्हें रिलीव करने का आग्रह किया। इस पत्र के आने के बाद विभाग में हडक़ंप मच गया। संचालनालय ने इन चयनितों को छोडऩे साफ मना कर दिया है। यह वे इंजीनियर है जो विभाग में बीते कई सालों से कार्यरत हैं। इसके बाद भी उनके द्वार नियमों का खुलकर उल्लंघन किया गया है। यही वजह है कि अब उनसे इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।
विभाग पहले से ही जूझ रहा कमी से
नगरीय विकास एवं आवास विभाग पहले से ही तकनीकी और प्रशासनिक अमले की कमी के चलते बेहद परेशान चल रहा है। स्थिति यह है कि सब इंजीनियरों को दो-दो नगरीय निकायों का काम करना पड़ रहा है। यही नहीं नगर निगमों में भी सब इंजीनियरों को सहायक यंत्री, असिस्टेंट इंजीनियरों को कार्यपालन यंत्री का प्रभार देकर काम चलाना पड़ रहा है। यही नहीं अगर भोपाल नगर निगम की बात की जाए तो वहां पर तो बिल्डिंग परमिशन शाखा में एक सहायक यंत्री को तीन से चार जोन का काम करना पड़ रहा है।
