- पांच साल बाद फिर बाहर आया कमलनाथ सरकार गिरने का जिन्न

गौरव चौहान
मप्र में कमलनाथ सरकार गिरने का जिन्न पांच साल बाद फिर बाहर आया। इसे लेकर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के बीच बयानबाजी हुई। जिससे सियासी भूचाल मच गया। दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बयान ने साढ़े पांच साल पुराने इस मुद्दे को हवा दे दी है। वहीं, दिग्विजय के बयान पर पूर्व सीएम कमलनाथ की कड़ी प्रतिक्रिया से इस मुद्दे पर राजनीति गर्मा गई है। दिग्विजय और कमलनाथ के बयानों को उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा नेताओं ने दोनों वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इन बयानों से कांग्रेस सरकार गिरने की सच्चाई सामने आ गई है। सरकार गिराने के लिए कांग्रेस नेता खुद जिम्मेदार थे। इस मामले में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का बड़ा बयान सामने आया हैं। उन्होंने कहा कि दोनों की केमिस्ट्री समझना बहुत मुश्किल है। सिंधिया को सरकार गिराने की सजा मिलनी चाहिए। वहीं सरकार गिरने के खुलासे पर पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। बता दें कि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी, जबकि भाजपा को 109 सीटें मिली थीं। बसपा (2), सपा (1) और निर्दलीयों (4) के समर्थन से कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी, लेकिन 15 महीने बाद मार्च, 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस छोडकऱ भाजपा में शामिल हो गए, जिसके बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई और 20 मार्च, 2020 को गिर गई।
दरअसल, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने हाल में एक न्यूज चैनल के पोडकास्ट में कहा था कि कमलनाथ सरकार का पतन कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच मतभेद के कारण हुआ था। उन्होंने कहा कि कमलनाथ और सिंधिया के बीच मतभेद विचारधारा नहीं, बल्कि व्यक्तिगत थे। उन्होंने कई बार दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ा और सरकार गिर गई। दिग्विजय सिंह के बयान पलटवार करते हुए कमलनाथ ने एक्स पर ट्वीट कर कहा, मप्र में 2020 में मेरे नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिरने को लेकर हाल में कुछ बयानबाजी की गई है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि पुरानी बातें उखाडऩे से कोई फायदा नहीं, लेकिन यह सच है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह लगता था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं। इसी नाराजगी में उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा और हमारी सरकार गिराई।
दोनों की केमिस्ट्री समझ से परे
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ बड़े छोटे भाई हैं, दोनों की केमिस्ट्री है। दोनों का 45 साल का रिश्ता है, उनकी केमिस्ट्री समझना बहुत मुश्किल है। पुरानी बातों का कोई औचित्य नहीं है। हमें पीछे की बात नहीं करनी है। मुझे आने वाले भविष्य की ओर देखना है। वहीं पटवारी ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को सरकार गिराने की सजा मिलनी चाहिए।
कांग्रेस को बुढ़ापे में बच्चा रूपी सरकार हुई थी
पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भी प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने शायराना अंदाज में तंज कसा है। मिश्रा ने कहा कि तरन्नुम कानपुरी की एक शायरी है ‘ऐ काफिले वालों, तुम इतना भी नहीं समझे थे। लूटा है तुम्हे रहजन ने, रहबर के इशारे पर।’ उन्होंने आगे कहा कि काफिला क्यों लुटा था ? कौन दोषी है अब यह सामने आ गया है। कांग्रेस को बुढ़ापे में बच्चा रूपी सरकार हुई थी। इन्होंने उसे चूम चूम कर ही मार डाला। हम तो पहले से कहते थे कि कमलनाथ नहीं दिग्विजय सिंह सरकार चला रहे थे। यही कारण था सरकार गिरने का। नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि यह बात कमलनाथ के मंत्री उमंग सिंगार ने भी उस वक्त कही लेकिन कमलनाथ की आंखों पर दिग्विजय ने पट्टी बांध रखी थी और आज कमलनाथ को सच्चाई याद आ रही है। कमलनाथ जब आप सच की राह पर चल ही दिए है तो लगे हाथ यह भी बता दे कि डेढ़ साल की सरकार में सुपर सीएम दिग्विजय सिंह ने आपसे भ्रष्टाचारी फैसले करवाए, नही तो जनता यह मान लेगी की आप दोनों एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ कर सबको गुमराह कर रहे है। असलियत यही है कि आप दोनों के सच ने बता दिया है कि कांग्रेस की नाव जो डूबी उसे कप्तान ने ही छेद कर डुबाया था। दिग्विजय सिंह के छोटे भाई व कांग्रेस के पूर्व विधायक लक्ष्मण सिंह ने कहा कि भले ही में पार्टी से बाहर, लेकिन दिल में आज भी हूं। गाना गाते हुए उन्होंने कहा कि छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी, अब नई कहानी का समय है।