- प्रतिवर्ष 1000 करोड़ रुपए खर्च करेगी सरकार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र में एकल ग्राम नल जल योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए सीएम डॉ. मोहन यादव सरकार ने नीतिगत फैसला किया है। इसके तहत अब प्रदेश में एकल ग्राम नल जल योजना की मरम्मत का काम पीएचई (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) विभाग करेगा। इसके लिए सरकार ने प्रतिवर्ष 1000 करोड़ रुपए खर्च करने का फैसला किया है। बता दें कि प्रदेश में मल्टी विलेज नल जल योजना को लेकर विभागों के काम के बीच बंटवारा साफ-साफ है, लेकिन एकल ग्राम नल जल योजना में काम को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। इस वजह से आए दिन पंचायत विकास विभाग और पीएचई विभाग में मामला झूलता रहता है। दोनों विभाग में तनातनी भी देखने को मिलती है जो सीएम डॉ. मोहन यादव के सामने भी देखने को मिली। जहां एक ओर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी ने कहा कि पंचायत से जुड़े काम पंचायत विकास विभाग को ही मिलने चाहिए।
तीन महीने की लंबी कवायद के बाद प्रदेश में एकल नल जल योजनाओं के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (संचालन एवं संधारण) का मामला सुलझ गया है। मुख्य सचिव और मंत्रियों के स्तर पर जब यह विवाद नहीं सुलझा, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। अब तय हुआ है कि प्रदेश में एकल नल जल योजनाओं का मेंटेनेंस लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अनुबंधित एजेंसी के माध्यम से करेगा। ग्राम पंचायतों को योजना के संचालन यानी नलों को चालू एवं बंद करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश में जल जीवन का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है, लेकिन पिछले तीन महीने से एकल नल जल योजनाओं के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का विवाद पीएचई और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के बीच उलझा था। मई में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने दोनों विभाग के प्रमुख सचिवों के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर लंबी चर्चा की, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला था। फिर तय हुआ की दोनों विभागों के मंत्रियों की संयुक्त बैठक कर उनके समक्ष मामले को रखा जाए, लेकिन यह बैठक नहीं हो पाई। इसके बाद यह मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास पहुंचा।
सीएम ने पीएचई को सौंपा 3 साल तक काम
इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फैसला किया कि अगले 3 साल तक एकल ग्राम नल जल योजना में मरम्मत का काम पीएचई विभाग ही देखेगा। इसके लिए हर साल 1000 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इसका मतलब है कि इस काम के लिए पीएचई विभाग को 3 साल में 3 हजार करोड़ रुपए का बजट मिलेगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, पीएचई मंत्री संपतिया उइके और मुख्य सचिव अनुराग जैन व अन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर जल जीवन मिशन की प्रगति और एकल नल जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण के संबंध में चर्चा की। बैठक में प्रमुख सचिव पीएचई पी. नरहरि ने ग्रामीण नल जल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन नीति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद निर्णय लिया गया कि एकल नल जल योजनाओं के सुचारू एवं दीर्घकालिक संचालन के लिए ग्रामीण नल जल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन नीति को 3 साल के लिए लागू किया जाए। इस नीति में एकल नल जल योजना का संचालन पूर्व की भांति संबंधित ग्राम पंचायत के द्वारा किए जाने और ग्राम पंचायतों को योजना के ऑपरेशन (संचालन) में सहयोग देने का प्रावधान किया गया है। नीति में योजना में मेंटेनेंस से संबंधित कार्य लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा अनुबंधित एजेंसी के माध्यम से किए जाने का प्रावधान है। जल्द ही ग्रामीण नल जल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन नीति को मंजूरी के लिए कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा।
योजना पर 20 हजार करोड़ खर्च
मप्र में जल जीवन मिशन में एकल नल जल योजनाओं पर सरकार करीब 20 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। गांवों में आने वाले वर्षों में नलों से सुचारू रूप से पानी की सप्लाई हो और मिशन पर खर्च होने वाले हजारों करोड़ रुपए व्यर्थ न जाएं, इसलिए नई नीति तैयार की गई है। इस नीति के लागू होने से समूह जल प्रदाय योजनाओं की भांति एकल ग्राम नल जल योजनाओं का सुचारू एवं दीर्घकालिक संचालन हो सकेगा। इस नीति के अनुसार ग्रामीण नल जल योजनाओं का संचालन, संधारण एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। प्रदेश में जल जीवन मिशन में एकल नल जल योजनाओं की संख्या 27 हजार 990 है। इनके मेंटेनेंस पर सालाना करीब एक हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। यह राशि राज्य सरकार वहन करेगी। प्रदेश में अगस्त, 2019 तक जहां केवल 12.11 प्रतिशत अंतर्गत 13 लाख 53 हजार ग्रामीण परिवारों को ही नल से जल मिल रहा था, वहीं अब यह संख्या बढकऱ 78 लाख 64 हजार से अधिक हो गई है। इस प्रकार 70.41 प्रतिशत ग्रामीण परिवार नल से जल सुविधा से जुड़ चुके हैं। कुल 1 करोड़ 11 लाख 69 हजार परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। पीएचई विभाग ने जल जीवन मिशन का कार्य मार्च, 2027 तक पूर्ण कर करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में बुरहानपुर और निवाड़ी हर घर जल प्रमाणित जिला घोषित हो चुके हैं। इन दोनों जिलों के हर घर में नल से पानी की सप्लाई की जा रही है।