विधायक प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

  • कांग्रेस के प्रदीप अहिरवार ने लगाई थी हाईकोर्ट में याचिका

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
प्रदेश सरकार की नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने वापस लेने के कारण खारिज कर दी है। बुधवार को जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत में कांग्रेस के अनुसूचित जाति के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार याचिका दाखिल करने के लिए अपना लोकस स्टैंडी (अदालत में चुनौती देने का अधिकार) साबित नहीं कर सके। काफी लंबी बहस के बाद लोकस के मुद्दे पर याचिका वापस ले ली गई। प्रदीप अहिरवार की याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रतिमा बागरी के पक्ष में जारी किया गया प्रमाण पत्र फर्जी है। याचिकाकर्ता का दावा था कि महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड में बागरी जाति राजपूत समुदाय में आती है, जबकि निमाड़ व मालवा क्षेत्र में यह अनुसूचित जाति में शामिल है। ऐसे में प्रतिमा बागरी ने अनुसूचित जाति की न होते हुए भी सतना जिले में अजा वर्ग के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा।
कार्रवाई न होने पर दाखिल की याचिका: इस मामले में राज्य स्तरीय जाति प्रमाण पत्र परीक्षण प्राधिकरण को शिकायत देने के बाद भी 2 माह में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद हाईकोर्ट में यह याचिका दाखिल की गई। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने याचिका पर आपत्ति जताई। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वे इस मामले में कैसे प्रभावित हैं? उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब पेश नहीं किया गया और याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई।
राजपूत समुदाय में आदे हैं बागरी
उन्होंने कहा कि सतना जिले के रैगांव विधानसभा क्षेत्र, जहां से प्रतिमा बागरी विधायक हैं, वह अनुसूचित जाति (अजा) के लिए आरक्षित है। लेकिन तथ्य यह है कि बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र में रहने वाले ‘बागरी’ जाति के लोग मूल रूप से ठाकुर (राजपूत) समुदाय से आते हैं और अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आते। इसके बावजूद, प्रतिमा बागरी एवं इनके परिवार ने प्रशासनिक मिलीभगत से फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और मंत्री पद हासिल कर लिया, जो संविधान और सामाजिक न्याय की मूल भावना के खिलाफ है।

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