- संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
वन विभाग को सिवनी में अनाथ मिला बाघ शावक जल्दी ही नौरादेही टाइगर रिजर्व में दहाड़ेगा और यहां की मादाओं के साथ मिलकर संतान उत्पत्ति भी करेगा। अपनी मां से बिछड़ चुके इस बाघ को रीवाइल्डिंग प्रोग्राम के तहत कान्हा टाइगर रिजर्व में रखकर शिकार करना सिखाया गया। इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने बाघ की हर हरकत पर बारीकी से नजर रखी। कई बार इसे विभिन्न बाड़ों में शिफ्ट कर शिकार करने के तौर तरीके सिखाए गए। जब वन विभाग के अधिकारी संतुष्ट हो गए तो इसे वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़ने का निर्णय लिया गया। ताकि कम बाघ घनत्व वाले इस टाइगर रिजर्व में युवा बाघ बिना किसी भय के विचरण कर सके और परिपक्व होकर मादाओं के साथ मेटिंग कर संतान उत्पत्ति कर सके। जिसके कारण मध्य प्रदेश के टाइगर स्टेट के तमगे को बरकरार रखा जा सके। बता दें कि कान्हा टाइगर रिजर्व में इसके पहले भी 11 बाघ शावकों को रीवाइल्डिंग प्रोग्राम के तहत शिकार के गुर सिखाकर विभिन्न टाइगर रिजर्व में छोड़ा जा चुका है।
वर्तमान में नौरादेही में हो रही टाइगर की शिफ्टिंग
वर्तमान में विभिन्न टाइगर रिजर्व से पकड़े गए बायों को नौरादेही टाइगर रिजर्व में छोड़ा जा रहा है। दरअसल नौरादेही का क्षेत्रफल अन्य टाइगर रिजर्व की तुलना में अधिक है और यहां बायों की संख्या कम है, जिसके कारण टाइगर शांति पूर्वक तरीके से विचरण कर सकते हैं। यहां बाघों का टकराव होने की संभावना भी कम है। इसी तरह माधव नेशनल पार्क में भी बायों की शिफ्टिंग की जा रही है। जबकि भोजपुर से पकड़े गए बायों को मानवीय बस्ती तक जाने से रोकने के लिए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में छोड़ा गया था।
इस तरह शुरू हुई थी बाघ शावक की यात्रा
इस बाघ शावक को सिवनी के पेंच टाइगर रिजर्व से घायल अवस्था में बचाया गया था। तब शावक की उम्र मात्र 4 से 5 माह थी। वन विभाग द्वारा सबसे पहले इसे कान्हा नेशनल पार्क के मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया। जहां पशु चिकित्सकों ने इसका इलाज किया और शावक के दुरुस्त होने तक का इंतजार किया। एक बार शावक के पूरी तरह से स्वस्थ हो जाने के बाद इसे इसे 21 जनू 2023 को कान्हा के घोरेला रीवाइल्डिंग सेंटर में छोड़ा गया। ताकि बाघ शावक को शिकार के गुर सिखाए जा सके। यहां पर छोटे प्राणियों को इसके बाड़े में छोडक़र शिकार सिखाया गया। बाद में 21 दिसंबर 2023 शिकार केअभ्यास के लिए बड़े बाड़े में शिफ्ट कर दिया गया। लगातार इस बाघ पर नजर रखने के बाद और इससे संतुष्ट होने के बाद 18 जनवरी 2026 को बाघ को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में शिकार के लिए छोड़ा गया है। ताकि यहां पर यह अपना जीवन यापन कर सके और अपने परिवार व वंश को भी आगे बढ़ा सके। टाइगर रिजर्व में छोड़े जाने के दौरान बाघ की उम्र करीब 3 साल या 35 माह की हो चुकी है। बाघ शावक का स्थानांतरण वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 के तहत उचित अनुमतियों के साथ पूरा किया गया है।
