
- परिवहन विभाग की सख्ती, एआईएस मानक पूरे नहीं करने वाली बसें होंगी ब्लैकलिस्ट
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में परिवहन विभाग की सख्ती सामने आई है। एआईएस मानक पूरे नहीं करने वाली स्लीपर बसें ब्लैकलिस्टेड होंगी। इसके लिए प्रदेशभर में स्लीपर बसों के सेफ्टी ऑडिट हो रहे हैं। बीते 15 दिन में प्रदेश में 1379 बसों का ऑडिट किया जा चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि बसों में गड़बडिय़ों की जांच में राजधानी भोपाल सबसे पीछे है। यहां अब तक सिर्फ 21 बसों की जांच ही हो पाई है। इसी कड़ी में प्रदेश में 1262 स्लीपर बस ऑपरेटर्स को नोटिस जारी किया है। जानकारी के अनुसार बस ऑपरेटर्स को एक हफ्ते की मोहलत दी गई है। बाहर गई बसों को लौटाने का समय दिया गया है। लौटने के बाद आरटीओ दफ्तर में फायर सेफ्टी ऑडिट होगा। स्लीपर बसें हाई-रिस्क कैटेगरी में घोषित है। स्लीपर बसों में एक ही फ्लोर पर ज्यादा इलेक्ट्रिकल लोड का खतरा बना रहता है। चार्जिंग पॉइंट, एसी, टीवी और बैटरी से शॉर्ट सर्किट का जोखिम बढ़ता है।
ऑडिट में ऑटोमेटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड मानकों की जांच होगी। एआईएस-119 के तहत फायर अलार्म और फायर डिटेक्शन सिस्टम अनिवार्य होगा। मानक पूरे नहीं करने पर एक महीने का समय सुधार के लिए मिलेगा। तय समय में सुधार नहीं हुआ तो वाहन पोर्टल पर बस नॉट टू बी ट्रांजेक्टेड होगी। ब्लैकलिस्ट बसों को कोई सरकारी सुविधा नहीं मिलेगी। एआईएस मानकों का पालन होने तक ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई जारी रहेगी। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की टीम ने फायर सेफ्टी ऑडिट के तहत जांच के दौरान सुरक्षा मानकों में गंभीर लापरवाही सामने आने पर दो यात्री बसों को जब्त किया गया, जबकि दो बसों की फिटनेस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गई। इसके अलावा सात यात्री वाहनों पर परमिट शर्तों के उल्लंघन के चलते कुल 3.10 लाख रुपए का जुमार्ना लगाया गया।
स्लीपर बसों में बढ़ी आग की घटनाएं
परिवहन विभाग द्वारा बीते दो सप्ताह से प्रदेश में स्लीपर बसों का सेफ्टी ऑडिट किया जा रहा है। यह ऑडिट बीते कुछ महीनों में स्लीपर बसों में हुई दुर्घटनाएं खासकर आग की घटनाओं के बाद शुरू हुआ है। जानकारी अनुसार पिछले कुछ महीनों से देश में स्लीपर बसों में आग की घटनाएं बड़ी संख्या में सामने आई हैं। बीते छह महीनों में छह बड़े हादसों में करीब 145 लोगों की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद प्रदेश में भी स्लीपर कोच बसों की पड़ताल के लिए सेफ्टी ऑडिट शुरू किया गया। बीते 15 दिन में प्रदेश में 1379 बसों का ऑडिट किया जा चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि बसों में गड़बडिय़ों की जांच में राजधानी भोपाल सबसे पीछे है। यहां अब तक सिर्फ 21 बसों की जांच ही हो पाई है, जबकि इसी दौरान इंदौर में 12 गुना ज्यादा 249 बसों का ऑडिट किया गया। मालूम हो कि ऑडिट के दौरान जिन बसों में कमियां पाई गईं, उन पर जुर्माने के साथ जब्ती की कार्रवाई की जा रही है।
जिन्हें नोटिस, उन्हें एक सप्ताह का समय दिया
प्रदेश में स्लीपर बस सेफ्टी ऑडिट के दौरान जिन 153 बसों में कमियां पाई गई हैं। उन बस आपरेटरों को परमिट रद्द करने का नोटिस परिवहन विभाग द्वारा दिया गया है। हालांकि विभाग ने एक रियायत भी दी है। नोटिस के साथ एक सप्ताह की मोहलत भी दी गई है। यदि एक सप्ताह में बस आपरेटर बस में पाईं गईं कमियों को दूर कर लेते हैं और फिर से ऑडिट कराते हैं तो उनका परमिट रद्द नहीं होगा। परिवहन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सेफ्टी ऑडिट में 90 फीसदी से ज्यादा बसों में कमियां सामने आई। राजधानी भोपाल में 21 में 17 बसों में गड़बडिय़ां मिली। इनमें से 12 बसों में इमरजेंसी गेट हटाकर अतिरिक्त सीटें जोड़ी गईं। वहीं प्रदेश में 1379 में 1262 बसों में गड़बडिय़ां मिली। आरटीओ भोपाल जितेन्द्र शर्मा का कहना है कि भोपाल में स्लीपर बसों की संख्या कम है, यहां सिर्फ 104 बसों का रजिस्ट्रेशन है। इसलिए ऑडिट में भी कम बसों की जांच हो पाई। फायर सेफ्टी ऑडिट में मौजूद इमरजेंसी एग्जिट, फायर एक्सटिंग्युशर की स्थिति की जांच की जा रही है। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीटों पर लगे स्लाइडर को भी कटवाया जा रहा है, ताकि आपात स्थिति में किसी भी तरह की बाधा न हो।
