फिटनेस के लिए अब सैकड़ों किलोमीटर का चक्कर

  • कमर्शियल वाहन मालिकों की बढ़ी परेशानी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने द्वारा फिटनेस सर्टिफिकेट को लेकर जारी की गई नई व्यवस्था कमर्शियल वाहन मालिकों की परेशानी बन गया है। दरअसल, नई व्यवस्था में फिटनेस सर्टिफिकेट केवल आरटीओ स्तर पर जारी किया जाने लगा है। इससे अधिकांश जिलों के वाहन मालिकों को फिटनेस सर्टिफिकेट पाने सैकड़ों किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। आना-जाना मिलाकर हर वाहन मालिक को 300 से 400 किलोमीटर का फेरा लगाने के बाद फिटनेस सर्टिफिकेट मिल पा रहा है। कोई कमी रह जाने या आरटीओ में देरी का खामियाजा वाहन मालिकों को ही भुगतना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार के सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 दिसंबर को व्यवस्था में बदलाव करते हुए राज्य के परिवहन विभाग को पत्र जारी किया है। इसमें फिटनेस सर्टिफिकेट को लेकर नई व्यवस्था व जमावट की जानकारी दी गई है। नई व्यवस्था में इंदौर, भोपाल, देवास, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सतना और सिंगरौली आरटीओ को अपने संभाग और समीपस्थ जिलों के कमर्शियल वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। आरटीओ कार्यालय के साथ ही फिटनेस के लिए प्राइवेट ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के तौर पर एजेंसी भी तय की गई हैं।
बदल गई है व्यवस्था
केंद्र का आदेश मिलने के बाद राज्य में भी व्यवस्था बदल दी गई हैं। नई व्यवस्था होने से फिटनेस लेना वाहन मालिकों के लिए टेढ़ी खीर हो गया है। जहां उन्हें लंबी दूरी तय करना पड़ रही है, वहीं खर्चा भी बढ़ गया है। केंद्र सरकार के रोड परिवहन मंत्रालय द्वारा कमर्शियल वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट की व्यवस्था में किया गया बदलाव कमर्शियल वाहन चालकों को काफी भारी पड़ रहा है। नई व्यवस्था में फिटनेस सर्टिफिकेट केवल आरटीओ स्तर पर जारी किया जाने लगा है। इससे अधिकांश जिलों के वाहन मालिकों को फिटनेस सर्टिफिकेट पाने 50 से 200 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। आना-जाना मिलाकर हर वाहन मालिक को 300 से 400 किलोमीटर का फेरा लगाने के बाद फिटनेस सर्टिफिकेट मिल पा रहा है। कोई कमी रह जाने या आरटीओ में देरी का खामियाजा वाहन मालिकों को ही भुगतना पड़ रहा है।  खंडवा जिले के वाहनों के लिए देवास आरटीओ कार्यालय तय किया गया है। खंडवा से देवास करीब 160 किलोमीटर दूर है। इससे फिटनेस सर्टिफिकेट लेने वाहन मालिकों को करीब 300 किमी की यात्रा करना पड़ रही है। ऐसे में कभी दूसरी बार जाने की नौबत आती है तो वाहन मालिकों की परेशानी दोगुनी हो जाती है। इसके चलते अब जिलों में विरोध शुरू हो गया है। इन व्यवस्था के अनुसार धार, खरगोन के वाहन मालिकों को इंदौर में फिटनेस सर्टिफिकेट मिल रहा है। वहीं भोपाल में  सीहोर, रायसेन, विदिशा, गुना, राजगढ़ का, ग्वालियर में मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी का, उज्जैन में रतलाम, आगार, मालवा, शाजापुर, धार का, जबलपुर में नरसिंहपुर, दमोह, कटनी, डिंडोरी, मंडला, सिवनी, उमरिया का,सतना में रीवा, सीधी, उमरिया, कटनी, पन्ना, शहडोल का, देवास में शाजापुर, सीहोर, हरदा, खंडवा, खरगोन का और सिंगरोली में  सीधी के वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट मिल रहा है
नई व्यवस्था का विरोध शुरू
इस नई व्यवस्था का विरोध दिनों-दिन हर जिले में तेज हो गया है। क्योंकि जिलों में परिवहन कार्यालय होने के बाद भी वहां फिटनेस सर्टिफिकेट देने की व्यवस्था नहीं है। वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की मांग है कि हर जिले के परिवहन कार्यालय को फिटनेस देने का अधीकार होना चाहिए। जरूरी व्यव्स्था जिला स्तर पर ही जुटाई जाना चाहिए। पूर्वी निमाड़ के खंडवा को देवास और पश्चिमी निमाड़ के खरगौन को देवास और इंदौर आरटीओ जाकर फिटनेस लेना पड़ रही है। देवास आरटीओ में खंडवा और खरगौन के साथ हरदा, शाजापुर को भी जोड़ा गया है। जानकारी के अनुसार खंडवा जिले में ही मध्यम और बड़े कमर्शियल वाहन करीब 20 हजार से अधिक हैं। नई व्यवस्था में इन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए 160 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। करीब 320 किमी का चक्कर लगाने के बाद इन्हें सर्टिफिकेट मिल पाता है।
परिवहन सचिव को लिखा पत्र
खंडवा बस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुनील आर्य का कहना है कि गाडिय़ों को दूसरे जिले में ले जाना न्याय संगत नहीं है। इससे वाहन मालिको पर अतिरिक्त भार बढ़ रहा है। छोटे ऑटो टेम्पो वाले इसे कैसे वहन करेंगे, यदि किसी प्रकार की दुर्घटना हो गई तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?  क्या प्रशासन देवास तक का फ्री परमिट उपलब्ध कराएगा। वाहन मालिकों की समस्याओं को देखते हुए हमने सचिव परिवहन विभाग को पत्र के माध्यम से विरोध जताया है। यदि व्यवस्था में बदलाव नहीं होता है तब वरिष्ठों के साथ आगे की रणनीति तय करेंगे। इस व्यवस्था का हर स्तर पर विराधे जताया जाएगा। खंडवा जिले के आरटीओ दीपक मांझी का कहना है कि प्रशासन के निर्देश पर जिले के समस्त कमर्शियल वाहन मालिको को सूचित कर दिया गया है। निर्देश अनुसार बताए गए सेंटर्स से फिटनेस सर्टिफिकेट लाना होगा। यह केंद्र शासन के आदेश पर बनी व्यवस्था है। इसमें हमारा कोई हस्तक्षेप नहीं है।

Related Articles