
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश सरकार अब प्रदेश के दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए एक नई पहल करने जा रही है। अब राच्य के सभी प्रमुख सरकारी और गैर-सरकारी सार्वजनिक भवनों का एक्सेस सोशल ऑडिट कराया जाएगा। इसका मकसद ये तय करना है कि कोई भी दिव्यांग बिना किसी बाधा के सरकारी दफ्तरों, अस्पतालों और स्कूलों में जा सके। इस ऑडिट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भवनों की सुगम्यता की जांच करने वाली टीम में खुद दिव्यांगजन शामिल होंगे। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने इसके लिए सभी जिले में 5 सदस्यीय टीम बनाने के निर्देश जिलों के कलेक्टर को दिए हैं जिसमें एक अस्थिबाधित, एक दृष्टिबाधित और एक श्रवणबाधित दिव्यांग अनिवार्य रूप से शामिल किए जाएंगे। इनके साथ ही हर जिले में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के 2 एक्सपर्ट भी होंगे। अब तक जिलों में इस तरह की व्यवस्था नहीं थी।
सभी दफ्तरों की बनेगी लिस्ट
सरकार इसके लिए टीम में शामिल दिव्यांगों को निरीक्षण के लिए 300 रुपये मानदेय के साथ 500 रुपये परिवहन व्यय भी देगी। जिलों में जांच टीमें सबसे पहले उन जगहों पर पहुंचेंगी जहां आम जनता का आना-जाना सबसे अधिक होता है। इनमें जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला न्यायालय, सरकारी अस्पताल, प्रमुख बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, नगर निगम, नगर पालिका, प्रमुख स्कूल, प्रमुख कॉलेज और अन्य बड़े संस्थान शामिल हैं। यह टीम अपनी रिपोर्ट फोटो के साथ विभाग को सौंपेगी। यदि किसी भवन में रैंप नहीं है या शौचालय सुगम्य नहीं है, तो ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर वहां सुधार कार्य कराए जाएंगे। इसके लिए सभी टीमों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। आयुक्त, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण सोनाली पोंक्षे वायंगणकर ने सभी कलेक्टरों को इन टीमों का गठन पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
