- ग्रामीण इलाकों के हजारों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश में अब गरीब और दूरदराज के आदिवासी परिवारों के लिए बिजली कनेक्शन लेना आसान हो जाएगा। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता में बड़ी राहत देते हुए 31 मार्च 2028 तक छूट दे दी है। इस फैसले से खासतौर पर विशेष पिछड़ी जनजाति और ग्रामीण इलाकों के हजारों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा। अब तक नियम था कि हर नए बिजली कनेक्शन के लिए स्मार्ट या प्रीपेड मीटर लगाना जरूरी होगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह रही कि दूरदराज गांवों में नेटवर्क, तकनीकी ढांचे और उपकरणों की कमी के कारण कई परिवार कनेक्शन से वंचित रह जाते थे। आयोग ने इन चुनौतियों को स्वीकार करते हुए यह अहम निर्णय लिया। बिजली कंपनियों ने आयोग को बताया था कि स्मार्ट मीटर सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि पूरा डिजिटल सिस्टम है, जिसमें सर्वर, नेटवर्क कनेक्टिविटी और बिलिंग इंटीग्रेशन जैसी सुविधाएं जरूरी होती हैं। इसके बिना स्मार्ट मीटर का उपयोग प्रभावी नहीं हो सकता। साथ ही, देशभर में स्मार्ट मीटर की बढ़ती मांग के कारण सप्लाई में भी कमी बनी हुई है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए आयोग ने डिस्कॉम को अनुमति दी है कि वे नए कनेक्शन देने और खराब या जले हुए मीटर बदलने के लिए सामान्य (कन्वेंशनल) मीटर या नॉन-स्मार्ट प्रीपेड मीटर का उपयोग कर सकते हैं। इससे उपभोक्ताओं को अब कनेक्शन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां नेटवर्क सुविधा नहीं है, वहां विशेष रूप से पारंपरिक मीटर लगाए जा सकेंगे।
अगले हफ्ते जारी होगा टैरिफ, जनता की जेब पर पड़ेगा बोझ
इधर, मध्य प्रदेश के डेढ़ करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को अप्रैल से महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ सकता है। मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने राज्य विद्युत नियामक आयोग को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में 10.20 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव सौंपा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो 1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू हो जाएंगी। बिजली कंपनियों का दावा है कि उन्हें पिछले वित्तीय वर्ष में 6044 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, जिसकी भरपाई के लिए यह बढ़ोतरी जरूरी है। कंपनियों ने आयोग से इस घाटे को रिकवर करने की अनुमति मांगी है। पिछले साल बिजली दरों में केवल 3.46 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी की गई थी, जबकि कंपनियों ने तब 7.52 प्रतिशत की मांग की थी। अब प्रस्तावित 10.20 प्रतिशत की वृद्धि उपभोक्ताओं के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। औसत घरेलू उपभोक्ता (150-300 यूनिट मासिक खपत) के बिल में 150-300 रुपये प्रतिमाह और सालाना 3600 रुपये तक की अतिरिक्त राशि का बोझ बढ़ेगा। ज्यादा खपत (400 यूनिट+) वाले परिवारों का बिल 400-600 रुपये तक बढ़ सकता है।
लाइन लॉस कम करने लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर
प्रदेश बिजली चोरी और लाइन लॉस की वजह से बिजली कंपनियों को हर साल करोड़ों का घाटा हो रहा है। इस घाटे की भरपाई के लिए बिजली कंपनियां हर साल टैरिफ में इजाफा कर रही है। इसके बाद भी लाइन लॉस कम नहीं हो रहा है और बिजली कंपनियों का घाटा भी बढ़ता जा रहा है। इसको देखते हुए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। प्रदेश की तीनों बिजली कंपनियां अपने कार्यक्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगा रही हैं। इसके बाद भी अब तक स्मार्ट मीटर लगाए जाने का काम पूरा नहीं हो पाया है। इसको देखते हुए बिजली कंपनियों ने आयोग स्मार्ट मीटर लगाए जाने की समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी। इसको देखते हुए आयोग ने बिजली कंपनियों को यह राहत दी है। विद्युत विनियामक आयोग द्वारा बिजली कंपनियों को लाइन लॉस कम करने हर साल टारगेट दिया जाता है। वितरण कंपनियों को अगले दो साल में अपने लाइन लॉस में 10 से 15 फीसदी तक की कम करना है।
