- नमूनों की जांच के लिए लेना पड़ रहा निजी लैब का सहारा…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश में खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पास तीन प्रयोगशालाएं हैं। लेकिन इन तीनों लैब में कहीं भी जहर जांचने की सुविधा नहीं है। इसका नुकसान तब हुआ जब जबलपुर के एक मामले में प्रसाद खाने से 19 लोग बीमार हो गए और एक महिला की मौत हो गई। प्रसाद का नमूना जांच के लिए भोपाल भेजा गया, लेकिन यहां की प्रयोगशाला में टॉक्सिक यानि जहर जांचने की सुविधा नहीं है। इतना ही नहीं अधिकारियों ने बताया कि इंदौर, जबलपुर की सरकारी लैब में भी यह सुविधा नहीं है। ऐसी स्थिति में नमूने को किसी निजी लैब में भेजा जाता है, वहां से आई रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है।
अब 200 करोड़ रुपए खर्च करेगी सरकार: सरकारी प्रयोगशालाओं में जो कमियां हैं, उसे दूर करने के लिए अब सरकार 200 करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अपनी तीनों प्रयोगशालाओं भोपाल, इंदौर और जबलपुर को अपग्रेड करने का निर्णय लिया है। इन तीनों प्रयोगशालाओं में हाईटेक मशीनें, सालाना टेस्टिंग क्षमता और मैन पावर बढ़ाने के लिए करीब 200 करोड़ रुपए का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। सूत्रों ने बताया कि केंद्र से इसे मंजूरी भी मिल गई है। राज्य द्वारा केंद्र को बताया गया कि मप्र में तीन प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं, इन तीनों लैब में हर साल महज 6 हजार दवाओं के सैंपल की जांचने की क्षमता है। जबकि मप्र से हर साल 10 से 12 हजार सैंपल टेस्टिंग के लिए आते हैं। क्षमता से दोगुना भार होने के कारण प्रयोगशाला को अपग्रेड करने की जरूरत है। इसके लिए प्रयोगशालाओं में नया इंफ्रास्ट्रक्चर, अत्याधुनिक मशीनें और मैन पावर की आवश्यकता है।
नई लैब का निर्माण शुरू
मप्र में दवाओं के सैंपल जांचने की सुविधा अभी तक भोपाल, इंदौर और जबलपुर में उपलब्ध है। शासन ने अब ग्वालियर में भी एक नई लैब विकसित करने का निर्णय लिया है। इस लैब के निर्माण का कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। बहुत जल्द इसका काम पूरा हो जाएगा।
छिंदवाड़ा कफ सिरप मामला
सिंतबर 2025 में छिंदवाड़ा में अमानक कफ सिरप का सेवन करने से कई बच्चे बीमार हो गए थे, इनमें से करीब 25 बच्चों की मौत हो गई थी। उस समय प्रदेश की सरकारी ड्रग टेस्टिंग लैब की तमाम कमियां सामने आई थीं। इतना ही नहीं यह भी सामने आया था कि प्रदेश में दवाइयों की जांच का जो सिस्टम है वह बहुत ही लचीला है। अब इसे सुधारा जा रहा है।
इंदौर में पीने के पानी से मौतें: दिसंबर 2025 में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 22 लोगों की मौत हो गई थी। यहां नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पेयजल में शौचालय के सीवेज का पानी मिल रहा था। इस घटना ने भी प्रदेश में शुद्ध पेयजल व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। तब भी यह मांग उठी थी कि प्रदेश की सरकार प्रयोगशाला में पानी जांचने की सुविधा नहीं है। हालांकि इसके बाद बड़े स्तर पर जल सुनवाई कार्यक्रम चलाया गया।
जबलपुर में प्रसाद खाने से बीमार: खसारीपरि में जबलपुर के भेड़ाघाट में प्रसाद खाने से 19 लोग बीमार हो गए थे। इनमें से एक महिला की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद प्रसाद का सैंपल जांच के लिए भोपाल भेजा गया। तब पता चला कि प्रयोगशाला में जहर जांचने की सुविधा नहीं है।
