- सरकार ने विधानसभा में दी जानकारी

- पूर्व मुख्य सचिव और आजीविका मिशन के सीईओ की जांच में लोकायुक्त को तथ्य नहीं दे रहा पंचायत विभाग
गौरव चौहान
प्रदेश में लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज 1,123 मामले विशेष न्यायालयों में लंबित हैं। इसके अलावा 979 आपराधिक प्रकरणों की जांच अभी जारी है। यह जानकारी विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन को बताया कि जनवरी 2022 से जनवरी 2026 तक 462 मामलों में आरोपियों को दंडित किया गया, जबकि 270 मामलों में विशेष न्यायालयों ने आरोपियों को बरी कर दिया। वहीं सरकार ने स्पष्ट किया कि मार्च 2025 में लोकायुक्त को दी गई शिकायत के आधार पर पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है।
यही नहीं विधानसभा में सवाल के जबाव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से पेश लिखित जबाव में कहा गया है कि पोषण आहार और टेक होम राशन घोटाले में पूर्व सीएस इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के सीईओ ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ जांच के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अफसर जानबूझकर लोकायुक्त को जानकारी नहीं दे रहे हैं। विधानसभा में पेश जानकारी के मुताबिक आजीविका मिशन में पोषण आहार और टेकहोम राशन घोटाले के मामले में पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के पूर्व सीईओ ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ मार्च 2025 में जांच प्रकरण दर्ज है। लेकिन, इस मामले में अभी तक आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया जा सका है, क्योंकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की ओर से इस मामले में जानकारी नहीं दी जा रही है। बार-बार कहने के बावजूद पंचायत विभाग के अफसर लोकायुक्त में जानकारी देने उपस्थित नहीं हो रहे हैं।
जानकारी देने नहीं आए अफसर
मुख्यमंत्री की ओर से पेश जबाव में बताया गया है कि इकबाल सिंह और ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ प्रकरण में लोकायुक्त में वर्ष 2025 में 12 अगस्त, इसके बाद 28 नवंबर और वर्ष 2026 में 5 फरवरी को साक्ष्य एवं जानकारी के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और आजीविका मिशन के अफसरों को बुलाया गया था, लेकिन जानकारी देने के लिए कोई भी अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ, ना ही किसी ने जानकारी भेजी। ऐसा लगातार तीन बार हो चुका है। इसके बाद इसके बाद लोकायुक्त के विधिक सलाहकार जसवंत सिंह यादव ने 16 फरवरी को पंचायत विभाग की एसीएस दीपाली रस्तोगी, सचिव जीवी रश्मि और आजीविका मिशन की सीईओ हर्षिका सिंह को पत्र लिखकर पोषण आहार के क्रियान्वयन को लेकर कैग द्वारा 2022 में की गई टिप्पणी से संबंधित जानकारी 13 अप्रैल तक आवश्यक रूप से उपलब्ध करवाने को कहा है। पूर्व विधायक पारस सकलेचा की 2023 में की गई शिकायत के आधार पर यह जांच प्रकरण दर्ज किया गया था। इसको लेकर विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सदन में सवाल पूछा था।
8 साल में 2041 आपराधिक मामले दर्ज
सीएम की ओर से दिए जवाब में बताया गया है कि मप्र लोकायुक्त संगठन में पिछले 8 साल (वर्ष 2018 से 2026 तक) में सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के भ्रष्टाचार की कुल 37967 शिकायत आई हैं। लेकिन, इनमें से सिर्फ 3716 शिकायतों (सिर्फ 9.77त्न) पर ही जांच प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जबकि 34251 शिकायत निरस्त कर दी गई हैं। इसी अवधि में जांच के बाद 2041 आपराधिक प्रकरण दर्ज लोकायुक्त संगठन ने दर्ज किए हैं। इनमें सरकारी सेवकों पर 2018 से 2026 के तक पद के दुरुपयोग के 236 आपराधिक प्रकरण भी शामिल हैं। लोकायुक्त में भ्रष्टाचार की सर्वाधिक 5493 शिकायतें वर्ष 2019-20 में मिली थीं। लोकायुक्त संगठन की ओर से पेश आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में 236 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए, इनमें से 16 आम लोगों की शिकायत पर दर्ज किए। 2024 में 176 मामलों में कोर्ट में चार्जशीट दायर की गई, यह सभी केस 2012 से 2017 के बीच दर्ज किए गए थे। वर्ष 2025 मे लोकायुक्त स्पेशल कोर्ट में कुल 1106 प्रकरण लंबित थे । 31 जनवरी 2026 तक कुल 979 आपराधिक प्रकरण विवेचना में है। जनवरी 2007 की शिकायत एक शिकायत पर अगस्त 2024 में 17 साल बाद और नवंबर 11 की शिकायत पर जून 2024 में 13 साल बाद आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
