
- अब पीडब्ल्यूडी की हर परियोजना की होगी डिजिटल मॉनिटरिंग
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में बनने वाली सडक़ों की प्लानिंग और उसकी बेहतर गुणवत्ता के लिए सरकार और कसावट करने जा रही है। प्रदेश में अब किसी भी नई सडक़ की प्लानिंग जीआईएस के माध्यम से की जाएगी। राज्य सरकार ने इसके प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम 2.0 और रोड नेटवर्क मास्टर प्लान की शुरुआत की। वहीं लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्यों को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रवींद्र भवन में आयोजित क्षमता संवर्धन कार्यशाला में विभाग ने तीन ऐसी व्यवस्थाएं लागू कीं, जिनका सीधा लाभ जनता को मिलेगा। अब हर परियोजना की डिजिटल मॉनिटरिंग होगी, सडक़ नेटवर्क का वैज्ञानिक मास्टर प्लान बनाया जा रहा है और बजट आवंटन में डुप्लिकेशन खत्म करने वाला मॉड्यूल बन गया है। ग्रीन बिल्डिंग पर भी मंजूरी मिल गई।
भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित क्षमता संवर्धन कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, इंजीनियर वह है जो आप कल्पना करो और वह साकार रूप दे दे। आज के समय के हिसाब से इंजीनियर साक्षात विश्वकर्मा के अवतार हैं। हमको सिर्फ बताना होता है कि सडक़, पुल-पुलिया, बिल्डिंग, स्टेडियम चाहिए, वह सब कुछ बनाकर दे देता है। काम के दौरान आने वाली चुनौतियों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की व्यवस्था के अंदर जो सीमाएं तय की गई हैं, उसमें रहते हुए उन्हें दस्तावेजीकरण करना होता, अच्छा इस्टीमेट तैयार करना होता है, साथ ही उसकी गुणवत्ता पर भी निगाह रखनी होती है। इधर जनता अलग परेशान करती है दूसरे लोग अलग से आते हैं, लेकिन ठेकेदार मानता ही नहीं है। यह अलग तरह की चुनौती है इसमें जनप्रतिनिधि को मैंने जोड़ा ही नहीं है। ये अलग-अलग चुनौतियां सामने होती हैं।
प्राजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम से क्या होगा फायदा
मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम 2.0 से अब विभाग में सडक़ों की योजना, क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग आसान होगी। इससे पता चल सकेगा कि कौन-सा प्रोजेक्ट अभी किस स्तर पर है? कब उसकी स्वीकृत होगी, संचालित प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति क्या है और वह कब तक पूरा हो सकेगा? इससे जुड़े इंस्पेक्शन से लेकर सभी काम सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही होंगे। इंजीनियर को सॉफ्टवेयर पर ही मौके से इंस्पेक्शन रिपोर्ट डालनी होगी। सिंह ने बताया कि इससे अधिकारी की जिम्मेदारी, लंबित स्वीकृति और काम की समय-सीमा सिस्टम में दर्ज रहेगी। इससे फाइलों की देरी घटेगी। पीएम गति शक्ति पोर्टल आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर प्रबंधन विशेषज्ञ डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने ‘कैपेसिटी बिल्डिंग थ्रू इंस्पायर्ड लिविंग’ पर व्याख्यान दिया।
प्रदेश में तैयार हुआ सडक़ों का मास्टर प्लान
उधर रोड नेटवर्क मास्टम प्लान की भी शुरूआत की गई। मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि इसको भास्कराचार्य संस्थान के इंजीनियरों द्वारा तैयार किया गया है। इसमें प्रदेश की सडक़ों की गुणवत्ता के आधार पर प्रदेश के इंफ्रस्ट्रक्चर की प्लानिंग की जा सकेगी। प्रदेश में बजट की प्लानिंग जीआईएस आधारित हो सकेगी। सिस्टम बताएगा कि भौगोलिक रूप से किस क्षेत्र में कितनी सडक़ों की जरूरत हैं और सडक़ों की मौजूदा स्थिति क्या है। मंत्री राकेश सिंह ने इंजीनियरों को मंच से चेताते हुए कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि रिटायरमेंट पास में है तो क्या अभी भी कुछ सीखने की आवश्यकता है? तो उन्हें पीएम से सीखना चाहिए, जो आज भी सीखते हैं। वे बोले कि हमारे मासिक औचक निरीक्षण को राजस्थान व ओडिशा फॉलो कर रहे हैं। अब हम लोक कल्याण सरोवर का कभी भी औचक निरीक्षण कर सकते हैं। इंजीनियरों को चेताया कि वह चिंता करें कि सरोवर तय मापदंड पर मिलना चाहिए। कार्यशाला में करीब 1485 इंजीनियरों ने पंजीयन कराया था, लेकिन लगभग 300 से अधिक इंजीनियर आधे सत्र में ही गायब हो गए। इस पर मंत्री राकेश सिंह ने नाराजगी जाहिर की। लोक निर्माण विभाग में 293 सब इंजीनियर के नए पदों की स्वीकृति मिल चुकी है। इन पर भर्ती प्रक्रिया जल्दी की जाएगी। वहीं 225 इंजीनियरों के अप्रैल में इंटरव्यू है और इसके बाद उन्हें भी पोस्टिंग मिल जाएगी। बता दें कि अभी लोक निर्माण विभाग में 1076 सब इंजीनियर हैं और इनमें से 250 के पास एसडीओ का चार्ज है। केवल 774 सब इंजीनियर ही वर्किंग में हैं, जबकि विभाग में 1680 सब इंजीनियरों की आवश्यकता है।
