अवैध कॉलोनियां… नकेल कसने बनाया जा रहा नया अधिनियम

अवैध कॉलोनियां
  • अवैध कॉलोनी बसाई तो 10 साल की सजा, एक करोड़ का जुर्माना

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। सरकार की कोशिशों के बावजूद मप्र में अवैध कॉलोनियों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अवैध कॉलोनियों की संख्या 8000 से अधिक हो चुकी है। ऐसे में अवैध कॉलोनी बसाने की प्रक्रिया पर नकेल कसने के लिए खिलाफ नया कानून तैयार किया जा रहा है, जो 2026 से लागू हो सकता है। नए अधिनियम में बिल्डरों को एक ही लाइसेंस से शहर और गांव में कॉलोनी बनाने की अनुमति मिलेगी। अवैध कॉलोनियों के खिलाफ 45 दिन के भीतर  कार्रवाई की जाएगी और जमीन जब्त भी होगी। अवैध कॉलोनी बनाने वालों को 10 साल की सजा और। करोड़ रूपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में अवैध कॉलोनियों पर कड़ी कार्रवाई के लिए नए नियमों का मसौदा तैयार किया जा रहा है। नगरीय विकास विभाग जल्द ही मध्यप्रदेश कॉलोनी एकीकृत अधिनियम-2026 को लागू करने की योजना बना रही है। इस अधिनियम के लागू होते ही शहरों और गांवों में कॉलोनी निर्माण के नियम समान हो जाएंगे। नए कानून का उद्देश्य ईमानदार बिल्डरों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाना है। वहीं, अवैध कॉलोनी निर्माण करने वालों पर कड़ा रुख अपनाना है। जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों की संख्या 8000 से अधिक हो चुकी है। सरकार ने पहले 31 दिसंबर 2016 तक बनी 6,077 कॉलोनियों को वैध (नियमित) करने की प्रक्रिया शुरू की थी। बाद में कट ऑफ डेट बढ़ाकर 31 दिसंबर 2022 कर दिया गया। इससे लगभग 2500 अतिरिक्त कॉलोनियां इस सूची में जुड़ गईं। वर्ष 2025 तक 16 नगर-निगमों के क्षेत्रों में ही लगभग 4,000 स्थानों पर अवैध प्लॉटिंग की पहचान की गई है। यदि सभी नगरीय निकायों (कुल 413) को शामिल किया जाए, तो यह आंकड़ा 8,000 पार होगा।
एक ही लाइसेंस से होंगे शहरों और गांवों में काम
नए कानून के तहत बिल्डर्स को एक ही लाइसेंस से गांव और शहर दोनों क्षेत्रों में कॉलोनी बनाने की अनुमति मिल जाएगी। इसके लिए बिल्डर्स को पांच साल के भीतर कॉलोनी का पूरा विकास करना होगा। जब कॉलोनी का विकास पूरा होगा, तो उसे कंप्लीशन सर्टिफिकेट  मिलेगा। यदि यह सर्टिफिकेट 45 दिन के भीतर नहीं मिलता, तो स्वचालित रूप से मंजूरी (डीम्ड परमिशन) मान ली जाएगी। अभी तक अवैध कॉलोनियों को बनाने पर 7 साल की सजा या 10 लाख रुपए का जुर्माना था। वहीं, अब इसे बढ़ाकर 10 साल की सजा या । करोड़ रुपए का जुर्माना कर दिया जाएगा। इससे पहले बिल्डर जुर्माने की राशि चुका कर बच जाते थे। वहीं, अब उन्हें एक करोड़ रूपए का जुर्माना चुकाना होगा।
लोकसेवा गारंटी की तरह होगी कार्रवाई
नगर पालिका अधिनियम और पंचायत एवं ग्राम स्वराज के मौजूदा अधिनियम की कुछ धाराओं को शामिल करके नया एक्ट बनाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नया एक्ट लागू होने के बाद पुराने अधिनियम से वो धाराएं हट जाएंगी जो कॉलोनी डेवलपमेंट और कॉलोनाइजर से जुड़ी हैं। इन्हें नए एक्ट में रखने के साथ एग्जीक्यूट किया जाएगा। नए अधिनियम में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई का बड़ा अधिकार कलेक्टरों के हाथ में जाएगा। नगर निगम क्षेत्र में कमिश्नर सक्षम होंगे, जबकि बाकी क्षेत्र में कलेक्टरों को कार्रवाई का अधिकार मिलेगा। वे एसडीएम को भी सक्षम अधिकार दे सकते हैं। ताकि निर्णय तुरंत हो सके। नया कानून लोकसेवा गारंटी की तर्ज पर अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। अवैध कॉलोनियों को 45 दिन के भीतर रोकने, हटाने और जब्त करने की प्रक्रिया शुरु हो जाएगी। यह प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी होगी, जिससे अवैध कॉलोनियों की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सके।
ईमानदार बिल्डरों के लिए राहत
 नया कानून जहां ईमानदार बिल्डरों के लिए प्रक्रिया आसान करेगा, वहीं दावा है कि अवैध कॉलोनी बनाने वालों के लिए यह कड़ा कानून साबित होगा। नए कानून के तहत बिल्डर एक ही लाइसेंस से गांव और शहर दोनों में काम कर सकेगा। पांच साल की तय अवधि में कॉलोनी विकसित होने के बाद उसे कंप्लीशन सर्टिफिकेट (कार्यपूर्ति प्रमाण-पत्र) भी 45 दिन में मिल जाएगा। इसमें एक दिन की भी देरी होती है तो डीम्ड परमिशन की व्यवस्था लागू मानी जाएगी। अवैध कॉलोनी बनाने पर अभी 7 साल की सजा या दस लाख जुर्माने का नियम है, जिसे बढ़ाकर क्रमश:10 साल कैद या एक करोड़ जुर्माना(दोनों भी) किया जा रहा है। पूर्व में दस लाख जुर्माने की व्यवस्था का बिल्डर फायदा उठा लेते थे। राशि चुकाकर बच जाते थे। लेकिन अब उन्हें एक करोड़ रुपए देना होगा। इसके अलावा अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई को भी लोकसेवा गारंटी की तरह लाया जाएगा। यानी 45 दिन के भीतर अवैध कॉलोनी रोकने, हटाने और जब्ती की कार्रवाई हो जाएगी। पांच साल की तय अवधि में कॉलोनी का विकास होने के बाद 45 दिन में ही कार्यपूर्ति सर्टिफिकेट मिल जाएगा, 1 दिन भी अधिक होने पर डीम्ड मंजूरी होगी।

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