राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कृत डॉ. महालक्ष्मी को किया बर्खास्त

  • आईसर में फर्जी मेल आईडी कांड…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईसर) ने फर्जी और आपत्तिजनक ईमेल प्रकरण पर राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक डॉ. आर महालक्ष्मी की सेवाएं बर्खास्त कर दी गई हैं। आईसर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) द्वारा न्यायिक जांच और साइबर सेल की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रो महालक्ष्मी की सेवाएं समाप्त की गई हैं। जानकारी के मुताबिक दिसंबर 2024 में एक फर्जी ई-मेल भेजा गया था। इसमें पीएचडी में प्रवेश लेने के लिए साक्षात्कार में शामिल होने देश के विभिन्न राज्यों से आयीं करीब एक दर्जन छात्राओं को संस्थान के प्रोफेसरों के नाम से फर्जी ईमेल आईडी बनाकर अश्लील और आपत्तिजनक संदेश भेजे गए। ईमेल में यहां तक लिखा गया कि पीएचडी की डिग्री हासिल करने के लिए शारीरिक शोषण जरूरी है। लगातार ऐसे संदेश मिलने से छात्राओं में हडक़ंप मच गया था। इस कार्रवाई के बाद आईसर प्रबंधन ने अपनी बेवसाइड से प्रोफेसर महालक्ष्मी का नाम और सभी फोटो हटा दिए हैं।
सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय
बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद डॉ. महालक्ष्मी की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। आईसर प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि छात्राओं की सुरक्षा और संस्थान की गरिमा सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की अनैतिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्हें नियंत्रित करने के लिए हर प्रयास किए जाएंगे। डॉ. महालक्ष्मी ने आईसर के निलंबन के खिलाफ हाई कोर्ट ने स्थगन आदेश जारी कर रखा है। सेवाएं समाप्त करने का आदेश डॉ महालक्ष्मी को थमा दिया गया है। विभागीय जांच पूरी होने और बीओजी के निर्णय के बाद उनकी सेवाएं औपचारिक रूप से समाप्त कर दी गई है। उक्त कार्रवाई से शैक्षणिक संस्थानों में भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना समय की मांग है।
प्रोफेसर के खिलाफ की गई थी शिकायत
मामला संस्थान की प्रतिष्ठा का था। दिसंबर 2024 को छात्राओं ने संबंधित प्रोफेसरों से शिकायत की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए खजूरी सडक़ थाने में एफआईआर और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई गई थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जिन ईमेल आईडी से संदेश भेजे गए, वे फर्जी थीं और संस्थान के आधिकारिक ईमेल से उनका कोई संबंध नहीं था। प्रारंभिक जांच में आईसर प्रबंधन ने डॉ. महालक्ष्मी को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया था। इसके बार साइबर सेल की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि प्रो महालक्ष्मी के मोबाइल का आईपी नंबर उनके मोबाइल नंबर से मिलान खा रहा है। तब उनके खिलाफ न्यायिक जांच करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय सक्सेना को नियुक्त किया गया। साइबर सेल, आंतरिक जांच समिति और न्यायाधीश की जांच में प्रो महालक्ष्मी को दोषी करार दिया गया है। उक्त तीनों रिपोर्ट को बीओजी में रखा गया। जहां आईसर की प्रतिष्ठा और प्रोफेसरों पर गलत आरोप लगाने के आरोपों की पुष्टि होने पर उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

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