पकड़ाएगा फर्जीवाड़ा… ईएसबी एग्जाम में अब नहीं बैठ सकेंगे मुन्नाभाई

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश में आयोजित हुई आरक्षक भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के बाद मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ईएसबी की परीक्षाओं में अब मुन्ना भाई आसानी से बैठ नहीं सकेंगे। इस साल होने वाली परीक्षाओं में सुरक्षा के काफी सख्त प्रबंध रहेंगे। हर अभ्यर्थी की पहचान का सत्यापन आधार आधारित चेहरे, आंखों की पुतली, स्कैन और फिंगर अंगुलियों की छाप मशीनों से किया जाएगा। इससे ऐसे लोगों की पहचान हो सकेगी, जो दूसरे के नाम पर परीक्षा देने बैठते हैं। ईएसबी के अनुसार इसके लिए ईएसबी परीक्षा केंद्रों पर आइरिस स्कैन और फेस रिकोग्निशन मशीनें लगाएगा। परीक्षा केंद्रों पर अधिक संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। नकल रोकने के लिए जैमर भी लगाए जाएंगे। इस बार ईएसबी प्रश्न पत्र तैयार करने और परीक्षा केंद्रों के चयन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई की भी सहायता लेगा।
तीन एजेंसियां करेंगी काम
एआई के माध्यम से पुलिस भर्ती परीक्षा को संपन्न कराया जाएगा। इसमें केंद्र के निर्धारण से लेकर प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और परीक्षार्थियों की जांच सब कुछ एआई के माध्यम से होगा। ऑल इंडिया बार काउंसिल की 21 वीं परीक्षा की अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके मुताबिक परीक्षा के लिए ऑनलाइन पंजीयन 11 फरवरी से शुरू हो जाएगा, जो अभ्यर्थी पिछली परीक्षा में पास नहीं हो पाए हैं, वे भी इस परीक्षा का हिस्सा बन सकते हैं। अधिसूचना के अनुसार ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 अप्रैल रखी गई है। आवेदन शुल्क 1 मई तक जमा कर सकते हैं। पंजीयन फॉर्म में अगर कोई करेक्शन करना है, तो उसकी अंतिम तारीख 3 मई रखी गई है। एडमिट कार्ड 22 मई को जारी किए जाएंगे। परीक्षा 7 जून को आयोजित होगी। रिजल्ट जारी करने की तिथि घोषित नहीं की गई है। परीक्षा में भाग लेने वाले उम्मीदवार का बार काउंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से 3 या 5 वर्षीय एलएलबी पास होना अनिवार्य है।
साल 2026 में होंगी 16 भर्ती एग्जाम
बता दें कि इस वर्ष विभिन्न सरकारी विभागों में करीब 15 हजार पदों के लिए 16 भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। ये भर्तियां पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य अहम विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए की जाएंगी। ये कदम वर्ष 2023 की आरक्षक भर्ती परीक्षा में हुई अनियमितताओं के बाद उठाया गया है, जब अभ्यर्थियों ने आधार के बायोमेट्रिक पहचान में धोखाधड़ी कर परीक्षा पास कर ली थी। शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान ऐसे कुछ अभ्यर्थी पकड़े गए थे।
ऐसे पहचाने जाएंगे फर्जी अभ्यर्थी
अधिकारियों ने बताया कि आइरिस (आंखों) के स्कैन को अंगुलियों के निशान से कहीं अधिक सुरक्षित माना जाता है। यह एक ऐसी बायोमेट्रिक तकनीक है, जो सटीक होती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हर व्यति की आंख की पुतली का पैटर्न बेहद अनोखा और जटिल होता है, जिसे बदला नहीं जा सकता है। इसी तरह फेस रिकोग्निशन भी सुरक्षित माना जा रहा है।

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