डंकुनी-सूरत तक रेल कॉरीडोर से माल की आवाजाही होगी आसान

रेल कॉरीडोर

– केंद्रीय बजट में एमपी को 15,188 करोड़ रुपए का रेल बजट आवंटित

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केन्द्रीय बजट में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स दक्षता की क्षमता को बढ़ावा देने पश्चिम बंगाल के डंकुनी से गुजरात के सूरत तक नए मालवाहक कॉरिडोर का प्रस्ताव किया है, जो ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा। 2,052 किमी लंबा यह कॉरिडोर मौजूदा पश्चिमी समर्पित मालवाहक कॉरिडोर से जुड़ेगा, जिससे बंदरगाहों तक बाल की बिना किसी रुकावट के आवाजाही हो सकेगी। वैष्णव वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए डीआरएम मुख्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता को संबोधित कर रहे थे। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में रेलवे के विस्तार, सेफ्टी, इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं यात्री सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2026-27 के बजट में 15,188 करोड़ रूपए का आवंटन किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट 2026 भाषण ने डंकुनी-सूरत डीएफसी को भारत के अवसंरचना विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए इसकी शुरुआत की। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में इसे क्रांतिकारी बताया और पश्चिम बंगाल के डंकुनी केंद्र को गुजरात के सूरत कपड़ा उद्योग के केंद्र से जोडऩे में इसकी भूमिका पर जोर दिया। यह कॉरिडोर केवल पटरियों को ही नहीं जोड़ता, बल्कि लुधियाना से डंकुनी तक पूर्वी डीएफसी (ईडीएफसी) और दादरी से मुंबई के पास जेएनपीटी तक पश्चिमी डीएफसी (डब्ल्यूडीएफसी) को निर्बाध रूप से जोड़ता है। इस कदम से माल ढुलाई की लंबे समय से अटकी महत्वाकांक्षाओं को नई जान मिली है, जो 2010 में डंकुनी-लुधियाना लाइन के प्रस्ताव की याद दिलाती है, जो राजनीतिक गतिरोध के कारण 16 वर्षों तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही। अब, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) के नेतृत्व में, रेल मंत्रालय के तहत कार्यान्वयन में तेजी आई है। अधिक एक्सल-लोड वाले वैगन और डबल-स्टैक कंटेनर मिश्रित यातायात लाइनों की तुलना में कहीं अधिक गति से चलेंगे, जिसका लक्ष्य उन लॉजिस्टिक्स लागतों को कम करना है जो वर्तमान में भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 14त्न हिस्सा खर्च करती हैं, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी है।
पूर्व-पश्चिम मार्ग से बंदरगाह पर भीड़भाड़ में भारी कमी आई है
जऱा कल्पना कीजिए, अगर कंटेनर जहाज़ गुजरात के कांडला या महाराष्ट्र के जेएनपीटी में पेट्रोकेमिकल्स, कपड़ा और खनिज पदार्थ उतारते हैं, तो उन्हें रेल की बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे माल ढुलाई में लगने वाला समय बहुत बढ़ जाता है। डंकुनी-सूरत डीएफसी इन सभी बाधाओं को दूर करते हुए एक निर्बाध माल ढुलाई राजमार्ग का निर्माण करती है। कोलकाता के पास डंकुनी से शुरू होकर, यह पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर गुजरती है और माल को सीधे पश्चिमी तट के बंदरगाहों तक पहुंचाती है।
छत्तीसगढ़ की इस्पात मिलें या ओडिशा की खदानें जैसे पूर्वी और मध्य क्षेत्रों के उद्योगों को निर्यात केंद्रों तक सीधी पहुँच मिलती है। वहीं दूसरी ओर, हजीरा, पिपावाव या मुंबई बंदरगाहों से माल पूर्व की ओर बिना यात्री ट्रेनों से टकराए आसानी से पहुँच जाता है। इससे रेल नेटवर्क पर भीड़ कम होती है, जहाँ मालगाडिय़ाँ और यात्री ट्रेनें एक ही पटरी पर चलती हैं, जिससे अक्सर प्रमुख मार्गों पर देरी होती है। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाहों की माल ढुलाई क्षमता में 20-30 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
मध्यप्रदेश को विशेष प्राथमिकता
रेल मंत्री ने कहा कि प्रस्तुत बजट में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में रेलवे के विकास को विशेष प्राथमिकता दिया गया है, जिसमें उच्च-गति कनेक्टिविटी, माल ढुलाई और सुरक्षा शामिल है। केन्द्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेल ने राज्यों के लिए 2,93,030 करोड़ रूपए के रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय की योजना बनाई है। इनमें मध्यप्रदेश भी शामिल है। रेलवे बजट प्रेस कॉन्फ्रेस में भोपाल मंडल के डीआरएम पंकज त्यागी उपस्थित रहे।
1.18 करोड़ से मप्र में रेलवे का हो रहा विकास
रेल मंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश में रेलवे का विकास कार्य बहुत तेजी से हो रहे हैं। राज्य में 1.18 करोड़ रूपए की लागत से विकास परियोजनाओं के अंतर्गत 100 प्रतिशत विद्युतीकरण, अमृत भारत योजना में 80 रेलवे स्टेशनों का 3, 163 करोड़ से पुनर्विकास, 1283 फ्लाइओवर और रोड अंडर ब्रिज, 4591 रूट किलोमीटर रेलमार्ग पर कवच प्रणाली कार्य योजना विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में 5 जोड़ी वंदेभारत एक्सप्रेस ट्रेनें एवं 4 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें संचालित की जा रही हैं। भविष्य में एमपी को और नई वंदेभारत और अमृत भारत ट्रेनों की सौगात मिलेगी।

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