- मंत्रालय सहित अधिकांश कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम से हो रहे काम
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र में 1 जनवरी से ई-ऑफिस सिस्टम लागू हुआ है। मंत्रालय सहित प्रदेश के अधिकांश कार्यालयों में सारा काम ऑनलाइन हो रहा है। लेकिन विडंबना यह है कि 8 महीने बाद भी प्रदेश के अधिकांश मंत्री डिजिटल सिस्टम से पूरी तरह दूर हैं। यानी वे आज भी मैनुअली काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो चुनौतियां अपनी जगह है लेकिन ई-ऑफिस सबसे बड़ी जरूरत है, जिसे काफी पहले अमल में लाया जाना चाहिए था, क्योंकि केंद्र सरकार का ज्यादातर काम ई-ऑफिस पर हो रहा है तो कई कार्पोरेट कंपनियों में भी पूरी तरह ई-ऑफिस से काम हो रहे हैं। ऐसे में कुछ विभागों व मंत्रियों द्वारा ऑफलाइन काम करना या कराना, मुश्किलों भरा हो सकता है।
गौरतलब है कि आम जनता को सहूलियत देने और प्रदेश के विकास की गति को बढ़ाने के लिए ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की गई है। ई-ऑफिस एक ऑनलाइन सिस्टम है। इसमें फाइलों के मूवमेंट के साथ अधिकारी- कर्मचारियों का पूरा डेटाबेस, उनकी छुट्टी, दौरे, गोपनीय चरित्रावली और संपत्ति के विवरण को डिजिटलाइज करने के निर्देश हैं। इसके लिए नेशनल इन्फोर्मेटिक्स सेंटर ने एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसमें ये सारी सुविधाएं मौजूद हैं। इसका सबसे अहम हिस्सा फाइलों का मूवमेंट है, क्योंकि ये सीधे आम लोगों से जुड़ा मामला है। सरकारी दफ्तरों में फाइलों के मूवमेंट में ही सबसे ज्यादा देरी होती है। कई-कई सालों तक फाइलें धूल खाती हैं, आगे नहीं बढ़तीं। ई-ऑफिस सिस्टम में अधिकारी से लेकर कर्मचारियों को अपने कंप्यूटर पर बैठकर ही फाइलें निपटानी हैं। इससे ये भी पता चलता है कि कौन सी फाइल किस अफसर के पास कब से लंबित है, उसकी क्या वजह है? यानी फाइल के मूवमेंट को रियल टाइम ट्रैक किया जा सकता है।
अभी भी ज्यादातर फाइलें ऑफलाइन
प्रदेश में ई-ऑफिस की कवायद के बीच ज्यादातर माननीयों के लिए अफसर अभी भी ऑफलाइन फाइलें दौड़ा रहे हैं। कई मंत्रियों के यहां गिनी-चुनी फाइलों को छोड़ ज्यादातर फाइलें ऑफलाइन चल रही हैं। अगर मंत्री भी ऑनलाइन काम करने लगेंगे तो फाइलें जल्दी निपटेंगी। ई-ऑफिस के जरिए एक बार मंत्रियों के कार्यालय से फाइलों पर निर्णय हो गया तो अफसर बीच में अटका नहीं सकेंगे। बल्कि ऐसी फाइलों का तय समय में निराकरण करना होगा। इसका फायदा उन लोगों को, क्षेत्रों को होगा, जो उक्त फाइलों से जुड़े हुए होंगे। यदि मंत्री के कार्यालय से एक बार फाइल चल गई तो फिर बीच में राजनीतिक व प्रशासनिक दबावों का असर नहीं पड़ेगा।
आधुनिक तकनीक से दूर मंत्री
अधिकांश मंत्री आधुनिक तकनीक से दूर है। सूत्रों के मुताबिक कार्य व्यवहार में फाइलों पर मैनुअली काम करना ज्यादा पसंद करते हैं। यदि मंत्रियों के कार्यालयों को पूरी तरह ई-ऑफिस पर शिफ्ट किया जाता है तो सभी के लिए अमल करना जरूरी हो जाएगा। सूत्रों की मुताबिक यदि मंत्री चाहेंगे तो ही बात आगे बढ़ेगी। हालांकि जिस तरह विभाग ई-ऑफिस पर शिफ्ट हो रहे हैं, यदि उसी तरह मंत्रियों के कार्यालय भी पूरी तरह ई-ऑफिस पर लाए जाते हैं तो ऐसी स्थिति में मंत्रियों के लिए भी तकनीकी रूप से दक्ष अमले की जरूरत होगी, जो कि अभी नहीं है। कैबिनेट बैठक सप्ताह में प्रत्येक मंगलवार होती है, जिसमें लाए जाने वाले प्रस्तावों का ब्यौरा प्रत्येक मंत्रियों को उपलब्ध कराना होता है। यह काम बहुत कम समय में गोपनीय तरीक से किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक यह फोल्डर तैयार करना, उसे प्रिंट कराना, मंत्रियों के बंगले तक पहुंचाना, इसमें समय के साथ-साथ राशि भी खर्च होती है।