
- दूसरी जमानत अर्जी भी खारिज
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मो.नं. 7999388569 परिवहन विभाग के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा के पार्टनर शरद जायसवाल की दूसरी जमानत अर्जी भी मप्र हाईकोर्ट खारिज कर दी है। जस्टिस प्रमोद ने कुमार अग्रवाल की बेंच ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा यह एक संगठित अपराध है। इसके कई पहलू हैं। आरोपी शरद के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत हैं और रिहा होने पर उसके दोबारा अपराध करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में इस स्टेज पर आरोपी को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। 10 फरवरी 2025 को गिरफ्तार हुए शरद जायसवाल ने यह दूसरी अर्जी दाखिल की थी। पहली अर्जी 29 जुलाई 2025 को वापस लेने पर खारिज हुई थी। उसके खिलाफ ईडी ने मामला दर्ज किया है। प्रकरण के अनुसार, परिवहन विभाग के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप हैं।
शरद बोला- अपराध की जानकारी नहीं
सुनवाई के दौरान आरोपी शरद जायसवाल की ओर से कहा गया कि जो भी आरोप उस पर लगाए गए हैं, वो उसकी जानकारी में नहीं थे। वहीं, ईडी की ओर से अधिवक्ता विक्रम सिंह ने इस दावें का जमकर विरोध किया। अदालत ने शरद के दावे को ठुकराते हुए कहा कि रिकॉर्ड में उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह नहीं माना जा सकता कि उसको अपराध की जानकारी नहीं थी। सिर्फ आरोपों से इनकार करना पर्याप्त नहीं है।
