
- मप्र में किसान और आदिवासी बनेंगे आत्मनिर्भर
मप्र की मोहन सरकार को वर्ष 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का निर्माण करना सर्वोच्च लक्ष्य है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार का फोकस हर वर्ग को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए सरकार साल 2026 को कृषि वर्ष मना रही है। इसके तहत पहली कृषि कैबिनेट बड़वानी में आयोजित की गई। जिसमें सरकार ने संकेत दिया है कि मप्र में किसान और आदिवासियों को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की पहली प्राथमिकता है।
गौरव चौहान/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बड़वानी के नागलवाड़ी में 2 मार्च को प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। इसे आम बोलचाल की भाषा में ‘मोहन’ की ‘खेत’ वाली कैबिनेट कहा जा रहा है। इस पहली कैबिनेट में सरकार ने किसानों के लिए 27,746 करोड़ के भारी-भरकम बजट को मंजूरी देकर बड़े वर्ग को साधाने की कोशिश की है। वहीं कृषि कैबिनेट बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रिपरिषद के सदस्यों के साथ नागलवाड़ी स्थित भीलट देव मंदिर में दर्शन-पूजन किया। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के एक इस कदम से प्रदेश का सबसे बड़ा वोट बैंक आदिवासी गदगद नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भीलट देव के देवस्थान से कृषि कैबिनेट की शुरुआत होना निमाड़ अंचल के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने खेती और बागवानी में आई प्रगति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्पों का परिणाम बताया। मुख्यमंत्री ने बताया कि पानसेमल सिंचाई परियोजना पर 1208 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कृषि कल्याण विभाग के तहत 3500 करोड़ रुपये, जबकि पशुपालन व डेयरी विकास योजनाओं में करीब 9 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सहकारिता विभाग और नर्मदा विकास प्राधिकरण की योजनाएं भी इस पैकेज का हिस्सा हैं। सोयाबीन उत्पादकों को भावांतर योजना का लाभ मिलेगा और प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना के तहत 2397 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। कृषि कल्याण वर्ष में कुल 38 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। बड़वानी जिले के लिए कई खास घोषणाएं की गई। पाटी क्षेत्र में 5940 हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य तय किया गया है। बड़वानी की खेतिया कृषि उपज मंडी को आदर्श मंडी के रूप में विकसित किया जाएगा। जिले के 25 किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा और प्रशिक्षण के लिए प्रदेश के बाहर भेजा जाएगा। इसके अलावा बीज निगम के तहत बजट्टा खुर्द को आदर्श केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। किसानों से जुड़े छह विभागों की 16 अलग-अलग योजनाओं के लिए 27746 करोड़ की राशि का प्रस्ताव किया गया है। कृषि कल्याण विभाग के एक प्रस्ताव में 3502.48 करोड़, उद्यानकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के तीन प्रस्ताव में 426 3.94 करोड रुपए, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के चार कार्यों के लिए 9508 करोड रुपए, मछुआ कल्याण के दो प्रस्ताव में 218.5 करोड रुपए सहकारिता के चार प्रस्तावों में 8186 करोड रुपए और एनवीडीए से जुड़े दो कामों मे 2067.97 करोड़ के प्रस्ताव शामिल है।
बिजनेस बनेगा अब किसानी
मप्र में अब सिर्फ खेती नहीं बल्कि किसानी अब बिजनेस बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़वानी में केला, मिर्च और आम का बंपर उत्पादन हो रहा है। इसे देखते हुए यहां फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की अपार संभावनाएं हैं। सरकार यहां कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग और पैकिंग के लिए क्लस्टर विकसित करेगी। साथ ही, खेतिया में एक आदर्श कृषि मंडी और बड़वानी में एक आधुनिक सब्जी मंडी बनाई जाएगी, ताकि किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिले और सही दाम मिल सके। सरकार सरदार सरोवर बांध से प्रभावित मछुआरों के लिए सरकार एकीकृत मत्स्योत्पादक नीति 2026 लेकर आई है। इसके तहत एक्वा-पोनिक्स, हाइड्रो-पोनिक्स और इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, जिले के 25 किसानों को प्राकृतिक खेती का मास्टर ट्रेनर बनाया जा रहा है, जो गांव-गांव जाकर केमिकल फ्री खेती का गुर सिखाएंगे। सीएम ने एक और बड़ी जानकारी दी कि सरसों की फसल पर भी भावांतर योजना का लाभ दिलाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं, धार्मिक आस्था के केंद्र भिलट देव क्षेत्र को अब पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसके लिए निर्माण कार्यों का लोकार्पण भी कर दिया गया है। सरदार सरोवर बांध के विस्थापित मछुआरों के लिए एकीकृत मत्स्योत्पादक नीति 2026 लागू होगी, जिससे उनकी आय कई गुना बढ़ेगी। बड़वानी में आधुनिक सब्जी मंडी और खेतिया में आदर्श कृषि मंडी बनाने का फैसला लिया गया है, ताकि किसानों को फसल का सही दाम मिले। मिर्च, केला और आम के लिए विशेष फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर और कोल्ड स्टोरेज विकसित किए जाएंगे। किसानों को राहत देने के लिए सरसों की फसल को भावांतर योजना में शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने साफ किया कि सरकार सिर्फ घोषणाएं नहीं कर रही, बल्कि धरातल पर योजनाओं को लागू करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्णय के मुताबिक अलग-अलग वर्ष को जनता के कल्याण के साथ जोडक़र चार श्रेणियों की उन्नति के लिए कार्य योजना तैयार की गई थी। इसी क्रम में इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष घोषित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत अलग-अलग प्रदेश के अलग अलग अंचलों में कृषि कैबिनेट आयोजित की जाएगी। इसमें खेत, टेंट और तंबू में बैठकर किसानों के हित में नीतियों को तैयार कर क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को स्थान प्रदान किया जाएगा।
5 योजनाएं करेंगी किसानों को मालामाल
गौरतलब है कि 24 फरवरी की कैबिनेट में किसान कल्याण वर्ष में कृषकों के लिए लगभग 10 हजार 500 करोड़ रूपये की 5 योजनाओं की निरंतरता की स्वीकृति दी गयी। पीएम राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन योजना, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना तथा राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना को 1 अप्रैल 26 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर जारी रखने की स्वीकृति दी गयी। कृषि विकास की दक्षता वृद्धि, विभिन्न कृषि घटकों की प्रभावकारिता को बढाने, दोहराव से बचने अभिसरण सुनिश्चित करने तथा राज्य सरकार को योजना बनाने में लचीलापन प्रदान करने के लिये मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना संचालित है। इसके तहत कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की आवश्यकता की पूर्ति के लिए परियोजना तैयार कर क्रियान्वित की जाती है। इस योजना को आगामी 5 वर्षों 01 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 2008.683 करोड़ रूपये से अधिक की स्वीकृति प्रदान की गयी है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में पर ड्रॉप-मोर क्रॉप घटक का आगामी 5 वर्षों 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन की स्वीकृति प्रदान की गयी। आगामी 5 वर्षों में इसके क्रियान्वयन के लिए 2393 करोड़ 97 लाख रूपये से अधिक की स्वीकृति प्रदान की गयी। प्रदेश में दलहन, धान, गेंहूँ, मोटा अनाज (श्रीअन्न), पोषक तत्व अनाज, व्यवसायिक फसलों (गन्ना एवं कपास) का क्षेत्र, उत्पादन एवं उत्पादकता बढाने के उद्देश्य से केन्द्र सहायतित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन संचालित है। आगामी 5 वर्षों 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च, 2031 तक मिशन के निरंतर संचालन के लिए 3285 करोड़ 49 लाख रूपये का वित्तीय प्रावधान किये जाने की स्वीकृत प्रदान की गयी। मप्र में प्राकृतिक खेती के क्षेत्रफल उत्पादन बढाने, मिट्टी की उर्वरकता बनाये रखने, पर्यावरण का संरक्षण एवं रसायन मुक्त खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए केन्द्र सरकार सहायतित नेशनल मिशन ऑन नेचरल फार्मिंग को आगामी 5 वर्षों 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च, 2031 तक के लिए निरंतर संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए केन्द्रांश 60 प्रतिशत एवं राज्यांश 40 प्रतिशत के अनुपात अनुसार कुल राशि 1011 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी। प्रदेश में तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहित कर आयातित खाद्य तेलो पर भारत की निर्भरता को कम करने और किसानों की आय में सुधार करने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए केन्द्र सहायतित योजना राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन ऑयल सीड संचालित है। आगामी 5 वर्षों 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 1793 करोड़ 87 लाख रूपये से अधिक के वित्तीय प्रावधान की स्वीकृति प्रदान की गयी। वहीं रबी वर्ष 2025-26 में प्रदेश के सरसों उत्पादक किसानों को लाभान्वित किये जाने के लिए केन्द्र सरकार की प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम लागू की जा रही है। मध्यप्रदेश में भावांतर योजना-सरसों को स्वीकृति दी गयी है। प्रदेश में सरसों भावांतर योजनान्तर्गत 23 मार्च से 30 मई 2026 तक सरसों का विक्रय राज्य की अधिसूचित मंडियों में किया जायेगा। प्रदेश की मंडियों में 14 दिवस के सरसों के विक्रय मूल्य के भारित औसत के आधार पर सरसों के मॉडल रेट की गणना की जायेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य से विक्रय दर/औसत दर अंतर की राशि पंजीकृत कृषकों के पोर्टल पर दर्ज बैंक खाते में डीबीटी से अंतरित की जायेगी।
टंट्या मामा के बाद अब भीलट देव
किसानों के साथ ही आदिवासियों को साधने के लिए डॉ. मोहन सरकार ने नई पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले श्रीकृष्ण पाथेय योजना के साथ भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े स्थान तीर्थ स्थल के तौर पर तैयार किये। अब आदिवासियों के भगवान भीलट देव के स्थान से कैबिनेट करने के साथ मोहन सरकार ने फिर एक और मास्टर स्ट्रोक खेला है। जिस तरह से मोहन यादव भीलट देव की पूजा अर्चना के लिए पहुंचे, मध्य प्रदेश में आदिवासियों की राजनीति के नजरिए ये तस्वीर बहुत कुछ बयां करती है। आदिवासियों के नायक टंट्या मामा के बाद अब जनजाति समाज के देवता भीलट देव, मध्य प्रदेश में आदिवासी सियासत का नया चेहरा होंगे। क्या इस रास्ते के सहारे भाजपा चुनाव में नेक टू नेक फाइट वाली निमाड़ में खोई जमीन लौटा पाएगी। भीलट देव के मंदिर में ठेठ भील भिलालों की वेशभूषा में पहुंची कैबिनेट। आदिवासी रंग ढंग में रंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ इसी आदिवासी समाज से आने वाले मंत्री विजय शाह अगुवाई कर रहे थे। भीलट देव की आरती उतारते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ये तस्वीर एक आयोजन की स्मृति से ज्यादा संदेश है। 2028 की राजनीति की दिशा तय करता संदेश। मध्यप्रदेश में आदिवासी सीटों के बहुत वाले निमाड़ इलाके में भाजपा ने चुनाव के तीन सा पहले से चुनावी जमावट मजबूत कर दी है। मध्य प्रदेश में राजनीतिक दलों की जीत का मजबूत रास्ता मालवा-निमाड़ की इन आदिवासी सीटों से होकर ही जाता है, जो गेमचेंजर कही जाती हैं। दरअसल, निमाड़ में कांग्रेस व भाजपा बराबर की स्थिति में है। भाजपा जाहिर तौर पर यहां बढ़त चाहती है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार के दौर में जननायक टंट्या मामा के साथ भाजपा ने आदिवासी वोटर के बीच पैठ बनाई थी। लेकिन मोहन यादव ने दो कदम आगे बढक़र और चुनाव से काफी पहले भीलट देव के स्थान नागलवाड़ी को आदिवासी राजनीति का एपिसेंटर बना दिया है। आदिवासियों की आस्था के केन्द्र भीलट देव को विकसित किया जा रहा है। संदेश दूर तक पहुंचाने का दांव हैं ये। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ आदिवासी पारंपरिक वस्त्रों आभूषणों से सजे कैबिनेट की तस्वीरें केवल एक स्मृति नहीं है। संदर्भ भी है इस तस्वीर का कि मुख्यधारा से अलग आदिवासियों के रंग में रंगी सरकार ने सीधे मध्यप्रदेश की जनजाति में 37 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी रखने वाले भील भिलालों को चुनाव से 3 साल पहले ही संबोधित कर दिया है। मध्य प्रदेश में भिलाला समाज की आबादी करीब 60 लाख से ऊपर है। रणनीाति के तहत भगोरिया उत्सव की शुरुआत के साथ इस पर्व को मोहन सरकार ने राष्ट्रीय पर्व घोषित किया। मुख्यममंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगोरिया को राष्ट्रीय पर्व बनाने के बाद भगोरिया हाट के इस आयोजन में हमारे सारे कैबिनेट के साथी पहुंचे। भीलट देव के स्थानों पर कई निर्माण कार्यों का लोकार्पण साथ ही कृषि कैबिनेट बड़वानी अंचल में करने का निर्णय किया गया। हमारे इस अंचल में जिस तरह से खेती बागवानी सभी प्रकार के हार्टीकल्चर में उन्नति हुई है, निमाड़ का सूखा बेल्ट जहां पलायन होता था, वह अब हरा-भरा है। हम हर वर्ष को एक वर्ग के कल्याण से जोडक़र आगे बढ़ रहे हैं। इसीलिए ये वर्ष किसान कल्याण को समर्पित किया और कृषि कैबिनेट बड़वानी में की। निमाड़ की जो 28 सीटें हैं, वे चेंजमेकर भी कही जा सकती हैं। बीते चुनाव में ये ही इलाका था, जहां कांग्रेस ने भाजपा को बराबर की टक्कर दी थी। यहां की 14 सीटों पर भाजपा को जीत हासिल हुई तो 14 ही सीटों पर कांग्रेस का कब्जा हुआ। मालवा में मजबूत भाजपा अब निमाड़ की सीटों का गणित बदलना चाहती है और कोशिश ये है कि 14 का ये आंकड़ा 2028 के चुनाव में आगे बढ़े, जिसके लिए 3 साल पहले से इन आदिवासी जिलों में तैयारी शुरू हो गई है। बड़वानी जिले में कैबिनेट उसी का हिस्सा है।
आदिवासियों के गढ़ पर सबकी नजर
मध्यप्रदेश में हर चौथा वोटर आदिवासी है और यहां देश की सबसे ज्यादा आदिवासी आबादी रहती है। बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में हुई प्रदेश की पहली किसान कैबिनेट बैठक को मोहन सरकार का आदिवासी वोटर पर सीधा फोकस माना जा रहा है। 2027 के निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय बहुल जिले बड़वानी के नागलवाड़ी में पहली किसान कैबिनेट आयोजित की। यह बैठक भीलट देव मंदिर परिसर में टेंट-तंबू में हुई और मंत्रिमंडल ने आदिवासी संस्कृति के प्रमुख पर्व भगोरिया में भी सहभागिता की। इसने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम किसानों के साथ-साथ आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है। आदिवासी वर्ग पर परंपरागत रूप से कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछले एक दशक में भाजपा ने इस वर्ग में अपना आधार बढ़ाया है। प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2023 के चुनाव में भाजपा ने 24 और कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि रतलाम जिले की सैलाना सीट पर भारत आदिवासी पार्टी को सफलता मिली। मालवा-निमाड़ अंचल में आदिवासी वर्ग की 22 सीटें हैं, जहां कांग्रेस ने 11, भाजपा ने 10 और एक भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की। यह क्षेत्र आदिवासी राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। नागलवाड़ी आदिवासी बहुल गांव है जहां भिलटदेव मंदिर आदिवासी आस्था का केंद्र है। यहां केला-कपास उत्पादन प्रमुख है। मोहन यादव सरकार ने आदिवासी बहुल इलाकों में अपनी छवि मजबूत करने और जमीनी स्तर पर विकास को गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बड़वानी जिले के नागलवाड़ी गांव में पहली कृषि कैबिनेट की है। यह बैठक भिलटदेव मंदिर परिसर में तंबू में आयोजित की गई, जो आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है। सरकार ने 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है, जिसके तहत किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को उद्योग से जोडऩे और ‘बगीचे से बाजार तक’ जैसी योजनाओं को मजबूत करने पर फोकस रहेगा। सरकार का यह मास्टर स्ट्रोक का कदम न सिर्फ कृषि प्रधान क्षेत्रों में नीतिगत फैसले लेने का माध्यम बना बल्कि आदिवासी बहुल निमाड़ अंचल के 7 जिलों खंडवा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, झाबुआ और अलीराजपुर को सीधे संबोधित किया है। इन जिलों में केला और कपास का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, इसलिए स्थानीय चुनौतियों जैसे सिंचाई, फूड प्रोसेसिंग और बाजार पहुंच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहल राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि निमाड़ क्षेत्र की 28 विधानसभा सीटों में से आधी पर कांग्रेस और आधी पर भाजपा का कब्जा है। 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले आदिवासी वोट बैंक को साधना सरकार की रणनीति का हिस्सा लगता है।
22 प्रतिशत आबादी, 84 सीटों पर असर
प्रदेश की कुल आबादी में लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा आदिवासी समुदाय का है। 47 सीटें आरक्षित होने के बावजूद यह वर्ग करीब 80 से अधिक सीटों पर जीत-हार तय करने की स्थिति में माना जाता है। 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 30 आदिवासी सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा झटका दिया था, जबकि भाजपा 16 सीटों तक सीमित रह गई थी। मालवा-निमाड़ में भी भाजपा को 22 सीटों में से केवल 6 सीटें मिली थीं। वहीं, 2023 में भाजपा ने वापसी करते हुए 24 सीटें जीतींं। हालांकि, इस चुनाव में कांग्रेस 66 सीटों पर सिमट गई, इसके बावजूद उसने आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 22 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, मालवा निमाड़ में दोनों ही पार्टियों ने आधी आधी सीटों पर जीत दर्ज की। 2013 में आरक्षित 47 सीटों में से 31 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को 15 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता। वहीं, मालवा निमाण की 22 सीटों में से 15 भाजपा, 6 कांग्रेस और 1 सीट निर्दलीय को मिली। 2018 में आरक्षित 47 सीटों में से 16 सीटों पर भाजपा सिमट गई। वहीं, कांग्रेस ने 30 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। वहीं, मालवा-निर्माण की 22 सीटों में से 6 भाजपा, 15 कांग्रेस और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। 2023 में आरक्षित 47 सीटों में से 24 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट पर निर्दलीय के खाते में आई। वहीं, मालवा- निर्माण की 22 सीटों में से 11 पर कांग्रेस, 10 पर भाजपा और एक सीट पर भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की। बता दें, अगले दो साल मोहन सरकार के लिए अग्नि परीक्षा के हैं, इसलिए अब उसे तमाम वो काम करके दिखाना होंगे, जिनका वादा भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किया है। इनमें सबसे बड़ा वादा लाडली बहना योजना में शामिल बहनों को हर माह 3000 रुपये देने का है। अभी इसकी आधी राशि दी जा रही है। अगले तीन साल में इसे दोगुना करना है। यदि भाजपा यह करने में सफल रही तो 2027 के निकाय चुनाव और इसके बाद 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उसकी सत्ता में वापसी की राह कोई नहीं रोक सकेगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि वर्ष 2026 को राज्य में कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि विभिन्न जलवायु क्षेत्रों, पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं और सुदृढ़ सडक़ नेटवर्क के साथ, इन सुविधाओं का लाभ उठाते हुए किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में रोजगार सृजन के उद्देश्य से लक्ष्य-उन्मुख गतिविधियों को कार्यान्वित किया जाना चाहिए, जिससेसमृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश के दृष्टिकोण को साकार किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि कि कृषि वर्ष 2026 में शुरू की गई सभी गतिविधियों को एक स्पष्ट तीन वर्षीय रोडमैप के साथ लागू किया जाना चाहिए। कृषि मशीनीकरण, प्रशिक्षण और एक्सपोजर दौरों के माध्यम से किसानों की क्षमता निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, बागवानी का विस्तार और किसान-उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन पर आधारित गतिविधियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि किफायती ब्याज दरों पर ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने, बाजार संबंधों को मजबूत करने, किसानों की उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने और पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जाएं। जलवायु-अनुकूल कृषि प्रबंधन, सतत कृषि, श्री अन्न (बाजरा) को बढ़ावा देने, जैव विविधता और पारंपरिक कृषि ज्ञान के संरक्षण और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने राज्य के कृषि उत्पादों की राष्ट्रीय और वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करने के लिए कृषि में अनुसंधान, नवाचार और मजबूत डिजिटल प्रणालियों को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को अन्य राज्यों में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में किए जा रहे सफल नवाचारों से अवगत कराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि किसानों को कृषि क्षेत्र में उन्नत राज्यों और इजऱाइल तथा ब्राजील जैसे नवाचार में अग्रणी देशों की यात्राओं पर ले जाया जाए। समृद्ध किसान, समृद्ध राज्य के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसान कल्याण, सहकारिता, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, मछुआरा कल्याण एवं मत्स्य विकास तथा सिंचाई सहित विभिन्न विभागों को घनिष्ठ समन्वय से कार्य करना चाहिए।
