विधायक ने बेटे-बेटी के नाम कराई आदिवासी की जमीन

आदिवासी की जमीन

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। विधानसभा में गुरुवार को कांग्रेस विधायक बाला बच्चन के सवाल पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा था 2009 से 2023 के बीच आदिवासियों की 1500 एकड़ जमीन तत्कालीन समय में कलेक्टर व अपर कलेक्टर ने विक्री की मंजूरी दे दी। इन अधिकारियों में नीमच के तत्कालीन कलेक्टर भी शामिल रहे है, जिन्होंने आदिवासी की अहस्तातरणीय जमीन को नीमच के भाजपा विधायक दिलीप सिंह परिहार के बेटे-बेटी को बिक्री करने की मंजूरी दे दी थी। महू-नीमच हाईवे से लगी इस भूमि पर पेट्रोल पंप चल रहा हैं। हाइवे से लगी आदिवासी भील की जमीन को मात्र 25 लाख 46 हजार रूपए में खरीदा है। जनप्रतिनिधि अपने प्रभाव को किस तरह से उपयोग करते हैं इसकी एक बानगी नीमच विधायक के संदर्भ में देखने को मिली है।
कलेक्टर के आदेश पर विक्रय: एक माह के भीतर नामांतरण नीमच के तत्कालीन कलेक्टर जितेन्द्र सिंह राजे के 23 दिसंबर 2020 को जारी आवेश से लालुराम भील व प्रेमबाई ने अपनी कृषि भूमि सर्वे नंबर 181 रकबा 0.09 है। सर्वे नंबर 186/1 रकबा 0.34 है. कुल रकबा 0.43 जनप्रतिनिधिर विधायक को बेची थी। चूंकि जमीन विधायक के बेटे-बेटी ने खरीवी, तो प्रशासनिक तंत्र भी सक्रिय हो गया। जहां लोगों को कृषि भनि का नामवरण कराने में महीनों का समय लग जाता है वहीं विधायक की जमीन का नामांतरण एक माह के अंदर कर दिया गया।
नायब तहसीलदार ने दी मंजूरी
जनवरी 2021 को तत्कालीन नायब तहसीलदार 21 नीमच रश्मि श्रीवास्तव ने विधायक के बेटे यशराज और बेटी हर्पना के नाम उक्त जमीन का नामांतरण स्वीकृत कर दिया। हाइवे से लगी जिस जमीन पर पेट्रोल पंप संचालित हो रहा है, वहां कीमतें आसमान छू रही है। आदिवासी से औने-पौने दाम पर जमीन खरीदने के भी आरोप है। जानकारों का कहना है कि यदि आदिवासी को पट्टा मिले दस साल से अधिक का समय हो गया है तो वह उसे बेच सकता है। इस प्रकरण में आदिवासी भील और विधायक परिहार द्वारा नियमों का पालन किया गया है या नहीं इसकी जांच की मांग अब कांग्रेस कर रही है।

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