प्रदेश में ही तैयार होंगी माइक्रो चिप्स

  • मप्र को सेमीकंडक्टर हब बनाने की तैयारी

गौरव चौहान
मध्य प्रदेश अब पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर देश के सेमीकंडक्टर उद्योग का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश को भारत का सेमीकंडक्टर हब बनाने की रणनीति पर काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य देश की माइक्रोचिप के लिए विदेशी बाजारों पर निर्भरता कम करना, उच्च तकनीक विनिर्माण को बढ़ावा देना और लाखों युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर तैयार करना है। इसके लिए राज्य सरकार वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने, अत्याधुनिक औद्योगिक अधोसंरचना विकसित करने, कुशल मानव संसाधन तैयार करने और निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने की व्यापक योजना पर काम कर रही है। इसी महीने भोपाल या इंदौर में वैश्विक स्तर का निवेशक संवाद आयोजित करने की तैयारी है, जिसमें दुनिया की प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा।
आज मोबाइल फोन, कंप्यूटर, कार, चिकित्सा उपकरण, रक्षा प्रणाली, अंतरिक्ष तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और 5 जी नेटवर्क से लेकर हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की रीढ़ सेमीकंडक्टर चिप है। कोविड-19 के दौरान वैश्विक चिप संकट ने दुनिया को यह एहसास कराया कि कुछ देशों पर अत्यधिक निर्भरता कितनी बड़ी चुनौती बन सकती है। भारत अभी अपनी अधिकांश उन्नत चिप आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में केंद्र सरकार की इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और राज्य सरकारों की नई औद्योगिक नीतियों का उद्देश्य देश में ही चिप निर्माण और पैकेजिंग उद्योग विकसित करना है।
मध्य प्रदेश बन सकता है नई पसंद
राज्य सरकार का मानना है कि मध्य प्रदेश के पास ऐसी कई विशेषताएं हैं जो इसे सेमीकंडक्टर निवेश के लिए आकर्षक बनाती हैं। उसमें देश के मध्य में रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर और बेहतर सड़क-रेल नेटवर्क, पर्याप्त औद्योगिक भूमि उपलब्धता, अपेक्षाकृत कम भूमि लागत, बिजली और पानी की उपलब्धता, नई औद्योगिक एवं सेमीकंडक्टर नीति और निवेशकों के लिए आकर्षक सब्सिडी और प्रोत्साहन आदि। सरकार निवेशकों को एक माह के भीतर भूमि आवंटन और आवश्यक अनुमतियां उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रही है।
भोपाल या इंदौर में होगा ग्लोबल इन्वेस्टर डायलॉग
सरकार जल्द ही भोपाल अथवा इंदौर में ग्लोबल सेमीकंडक्टर इन्वेस्टमेंट डायलॉग आयोजित करेगी। इसमें अमेरिका, जापान, ताइवान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और यूरोप सहित विभिन्न देशों की कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। इस संवाद में निवेशकों को बताया जाएगा कि मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर नीति क्या है, कौन-कौन से वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध हैं, उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया कितनी आसान है, और राज्य किस प्रकार दीर्घकालिक सहयोग उपलब्ध कराएगा। सरकार का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं बल्कि कंपनियों को शीघ्र उत्पादन शुरू कराने का भी है।
सबसे बड़ी चुनौती-कुशल मानव संसाधन
सेमीकंडक्टर उद्योग अत्यधिक तकनीकी क्षेत्र है। इसके लिए प्रशिक्षित इंजीनियर, डिजाइन विशेषज्ञ, मशीन ऑपरेटर और गुणवत्ता नियंत्रण विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। इसी कारण राज्य सरकार विभिन्न एजेंसियों, तकनीकी संस्थानों और कॉलेजों के साथ समन्वय स्थापित कर रही है। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग , माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और संबंधित विषयों के विद्यार्थियों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा स्किल डेवलपमेंट एजेंसियों के माध्यम से उद्योगों की मांग के अनुसार विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी तैयार किए जाएंगे।
सिंगल विंडो से तेज मंजूरी
राज्य सरकार निवेशकों को लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से राहत देना चाहती है। इसके लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर पर्यावरण, अग्नि सुरक्षा और अन्य आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को तेज करेगा। लक्ष्य यह है कि उद्योगों को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और एक निश्चित समय सीमा में सभी मंजूरियां उपलब्ध हो जाएं। मध्य प्रदेश की इस महत्वाकांक्षी योजना को बड़ी मजबूती तब मिली जब पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने राज्य में लगभग 4,200 करोड़ रुपये के निवेश से अत्याधुनिक ओएसएटी इकाई स्थापित करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
रोजगार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग विकसित होता है तो इसका प्रभाव केवल एक उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। इससे  हजारों प्रत्यक्ष और लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग का विस्तार होगा। स्टार्टअप और डिजाइन कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा। अनुसंधान एवं नवाचार को नई गति मिलेगी। इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होगा। निर्यात में वृद्धि होगी। विदेशी निवेश आकर्षित होने से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
केंद्र सरकार की नीति का मिलेगा लाभ
भारत सरकार पहले ही सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अरबों रुपये की प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। गुजरात, असम और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस हाईटेक सेक्टर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है। यदि राज्य सरकार की योजनाएं समय पर लागू होती हैं और प्रस्तावित निवेश धरातल पर उतरते हैं, तो मध्य प्रदेश ऑटोमोबाइल, फार्मा और कृषि आधारित उद्योगों के साथ-साथ हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण का भी प्रमुख केंद्र बन सकता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेलवेंद्रन ने बताया कि सरकार जल्द ही भोपाल या इंदौर में वैश्विक निवेशक सम्मेलन आयोजित करेगी। इसमें निवेशकों को मध्य प्रदेश की सेमीकंडक्टर नीति, उपलब्ध सुविधाओं और निवेश अवसरों की जानकारी दी जाएगी। उनका कहना है कि सरकार का लक्ष्य है कि निवेशकों को सभी आवश्यक मंजूरियां समयबद्ध तरीके से मिलें और वे एक माह के भीतर अपनी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना शुरू कर सकें।

Related Articles