आरटीआई दस्तावेजों में भ्रष्टाचार की कई पर्ते, लेकिन जांच हुई, न ही कार्रवाई

  • भोपाल गैस त्रासदी को चार दशक से ज्यादा का समय पूरा हो जाएगा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
कुछ ही दिनों में भोपाल गैस त्रासदी को 41 साल यानी चार दशक से ज्यादा का समय पूरा हो जाएगा। त्रासदी ने तो लोगों की जान ली ही थी, लेकिन उसके बाद गैस पीड़ितों के साथ हुई सिस्टम की त्रासदी ने पीड़ितों की तकलीफों को कई गुना बढ़ा दिया। इलाज और मुआवजे से लेकर उनके पुनर्वास तक के सभी मामले सरकारी सिस्टम की उदासीनता और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए। इसी कड़ी में जुड़ा है राजधानी के गैस पीड़ितों के आर्थिक पुनर्वास का मामला। गैस पीड़ित संगठनों द्वारा आरटीआई के जरिये जुटाई गई जानकारी में गैसपीडि़तों के आर्थिक पुनर्वास की निधि भी गंभीर भ्रष्टाचार सामने आया। 2011 से 2013 के बीच 22 प्रशिक्षण एजेंसियों को 13 से 18 करोड़ रुपये पीड़ितों के आर्थिक पुनर्वास के लिए दिए गए ताकि वे गैस पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए 133 व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चला सकें, लेकिन यह पूरी योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गई, 12 साल बाद भी न पीड़ितों का पुनर्वास हुआ न स्वरोजगार मिला। न कभी इस मामले की कोई जांच-पड़ताल हुई ना ही जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई।
100 करोड़ होने थे खर्च: केन्द्र सरकार की तरफ से गैस पीड़ितों की मदद के लिए दी गई 272 करोड़ की राशि में से 100 रु. उनके आर्थिक पुनर्वास के लिए खर्च होने थे, ताकि त्रासदी से बीमार और अपाहिज हो चुके गैस पीड़ितों को ऐसा रोजगार दिया जा सके, जिससे वे घर पर ही कुछ पैसे कमाकर अपना गुजारा कर सकें, लेकिन दस्तावेज और आंकड़े बताते हैं कि योजना के शुरूआती दौर में ही इतना भ्रष्टाचार हुआ पुनर्वास की योजना ही ठप हो गई। पुनर्वास के लिए जो राशि खर्च की गई, उसका भी वास्तविक लाभ गैस पीड़ितों तक नहीं पहुंच सका। आज भी शहर की गैस पीड़ित बस्तियों में कई गैस पीड़ित दयनीय जिंदगी जी रहे है, कई लोगों को गुजारा करना भी मुश्किल हो गया।
फर्जी लाभार्थी और जाली नियुक्ति पत्र
आरटीआई दस्तावेजों और 380 कथित लाभार्थियों के साक्षात्कार से सामने आया कि लगभग 25 प्रतिशत लाभार्थी नाम फर्जी थे, आधे से अधिक नियुक्ति पत्र जाली थे, और केवल 6 प्रतिशत प्रशिक्षुओं को ही उनके स्टाइपेंड मिले। लगभग 94 प्रतिशत भुगतान धोखाधड़ीपूर्ण था। विभाग ने लगभग पूरे 100 करोड़ रुपये इन निरर्थक प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर खर्च करने की योजना बनाई थी, लेकिन भ्रष्टाचार उजागर होने के कारण योजना रोकी गई। सूत्र बताते है कि गैस राहत विभाग की उदासीनता के चलते ठेकेदारों और अधिकारियों जमकर मलाई खाई और भोपाल गैस पीडि़तों के संवैधानिक और न्यायालय द्वारा सुनिश्चित पुनर्वास को पूरी तरह नजरअंदाज किया है।

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