महावीर आज ज्यादा प्रासंगिक है

  • 31 मार्च महावीर जयंती पर विशेष…
  • पंकज जैन
महावीर

एक चुटकला है… शिक्षक ने छात्र से पूछा देर से क्यूँ आए? छात्र ने जवाब दिया सर मैं एक बुढिय़ा को सडक पार करवा रहा था, फिर भी तुम्हे बहुत देर हो गई सर ने कहा, छात्र ने मासूम जवाब दिया सर  दरअसल वह बुढिय़ा सडक पार ही नहीं करना चाहती थी। कमोबेश यही हालत अमेरिका औऱ इजराल की है वे जानते थे कि इरान की जनता को कोई आजादी नहीं चाहिए, कम से कम इन दोनों की मदद से तो बिल्कुल भी नहीं, फिर भी दोनों अड़ गए इरानियों को आजादी दिलाने के लिए।
आज पूरी दुनिया को युद्ध मे झोंक कर हल्कान कर रखा है, छोटे छोटे देश, शहर तबाह हो रहे है, लोग मारे जा रहे है, चारो और दशहत का माहौल है। ऐसे विकटतम समय मे भगवान महावीर के सिद्धांत ही शांति स्थापित करवा सकते है, महावीर का प्रमुख सिद्धांत अनेकान्तवाद ही है, जो, हर झगड़े की जड़ का समूल खात्मा कर सकता है। अनेकान्त याने सत्य को अलग अलग दृष्टिकोण से देखना, सत्य बहुआयामी हो सकता है, एक दृष्टिकोण से एक पक्ष सही हो सकता है, लेकिन अन्य दृष्टिकोण से कोई अन्य भी सही हो सकता है। मैं ही सही यह हठधर्मिता है, यही विवाद का मूल है, जबकि मैं भी सही, तुम भी सही यह व्यवहारिक है,यही है जो सामन्जयस्ता स्थापित करता है।
किसी ने सच ही तो कहा है…
चमन के अख्तियार मे रंग ओ बु भी चाहिए।
तुम ही तुम हो तो क्या तुम हो,
हम ही हम है तो क्या हम है।
तुम भी हो हम भी हो तो ही दुनिया चलेगी। ट्रम्प और नेत न्याहु की यही हठधार्मिता कि हम ही सहीने दुनिया को विनाश कि तरफ धकेल दिया है, यंहा अपने को सही साबित करने का घमंड तो सर चढ़ के बोल रहा है, साथ ही यह घोर लालच भी है, तेल के भण्डार का, अब यंहा आता है महावीर का एक अन्य सिद्धांत अपरिग्रह जो प्राप्त है वह पर्याप्त है, उसमे भी दुसरो को देने कि भावना रखना, जबकि युद्धरत देशो की सोच है, जो हमारा है वह तो है, पर, जो तुम्हारा है वह भी हमारा। यंहा फिर भगवान महावीर का एक औऱ महान वाक्य याद आ जाता है, जियो और जिने दो  यही वह महान वाक्य है जो हर लिविंग बिंग को जिने का अधिकार देती है। आज विश्व के परिदृश्य मे जो असंतोष औऱ भयावहता पसरी है, उसको खत्म करने का एकमात्र रास्ता महावीर के सिद्धांत ही है। महावीर कल भी प्रासंगिक थे, आज भी है, कल भी रहेंगे। त्रिशला नंदन वीर की जय बोलो महावीर की।

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