
- सीएम मोहन यादव ने लॉन्च की स्पेस टेक पॉलिसी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 में राज्य के लिए एआई-सक्षम शासन और आर्थिक परिवर्तन का रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्पेस टेक पॉलिसी का लोकार्पण किया और कई अहम एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इंडिया एआई मिशन के सहयोग से आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में एमपी इनोवेशन एक्सपो का भी उद्घाटन किया गया। एक्सपो में इंडिया एआई पवेलियन, एमपी पवेलियन, स्टार्टअप शोकेस, हैकाथॉन एरीना और स्टार्टअप प्रतियोगिता प्रमुख आकर्षण रहे। मप्र सरकार अपनी खुद की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पॉलिसी लाएगी। एआई पर मिशन मोड में काम करने के लिए जल्द ही एक बड़ी वर्कशॉप भी की जाएगी। सीएम ने कहा कि विकसित भारत 2024 के लक्ष्य को हासिल करने में एआई बेस्ड प्रशासनिक व्यवस्था और प्रबंधन की जरूरत है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में इस दौरान मप्र साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग ने 6 बड़े संस्थानों के साथ एआई पार्टनरशिप को लेकर एमओयू साइन किए। इनमें यंगोवेटर (आंसर फाउंडेशन), सीईईडब्ल्यू (कॉउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर), गूगल, नैसकॉम, एआईएसईसीटी और भाषिणी शामिल हैं।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार अपने पूरे डाटा को डिजिटाइज कर रही है, यहां तक कि 1960 का रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सांदीपनि और शंकराचार्य की ज्ञान परंपरा मध्य प्रदेश की धरती से जुड़ी है। हमारा ज्ञान इतना विस्तृत है कि एआई भी उसे पूरी तरह समझ नहीं सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि तंत्र, मंत्र और यंत्र के बाद अब एक नया ‘यंत्र’ आ गया है- षड्यंत्र, जो इन सबसे अधिक प्रभावी है। उन्होंने भगवान गणेश की बुद्धिमत्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि एमपी एआई मिशन पर तेजी से काम करेगा और जल्द ही राज्य की एआई नीति भी लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय एआई यानी कृत्रिम बुद्धि का है, लेकिन भारतीय सभ्यता में तीन प्रकार की बुद्धि मानी गई है, मांत्रिक, यांत्रिक और तांत्रिक। इसके बाद चौथी बुद्धि है षडयंत्र वाली। आज के वक्त में सबसे बड़ी चुनौती यही है। सीएम ने कहा कि मप्र के लोगों के लिए यह गौरव की बात है कि भारतीय पुरातन इतिहास में ज्ञान साधना से जुड़े दो महापुरुष हुए हैं, जिन्होंने मप्र की धरती पर ही ज्ञान हासिल किया, इनमें एक पांच हजार साल पहले भगवान कृष्ण और दूसरे एक हजार साल पहले आदि गुरु शंकराचार्य हैं। भविष्य के ज्ञान का केंद्र भी मप्र बनेगा। सीएम ने इस दौरान एआई लिटरेसी मिशन के तहत फ्यूचर स्किल्स फॉर एआई पॉवर्ड भारत के लिए कौशल रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही मप्र स्पेसटेक नीति-2026 को भी सीएम ने लॉन्च कर दिया।
सीएस बोले- नई नौकरियों भी पैदा होंगी
सीएस अनुराग जैन ने एआई कॉन्फ्रेंस में कहा कि फरवरी में दिल्ली में ग्लोबल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस होने वाली है। इससे पहले तैयारी के रूप में मप्र में यह रीजनल कॉन्फ्रेंस हो रही है। 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को हासिल करने के लिए देश को 8 से 9त्न की टिकाई विकास दर की जरूरत है। यह बिना एआई की मदद के संभव नहीं हैं। आने वाली दुनिया रिसर्च, नालेज और इनोवेशन की है। एआई के कारण बडे स्तर पर जॉब डिस्प्लेसमेंट होगा। मौजूदा नौकरियां जाएंगी, लेकिन नई अपॉर्चुनिटी भी पैदा होगी। इन्हीं मुताबिक हमें अपने लोगों को तैयार करना है। एआई के आने से प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, इससे इकोनॉमिक डिस्पेरिटी भी बढ़ सकती है। आमदनी का गैप बढऩे की आशंका है, इन सभी मुद्दों पर सोचने की जरूरत है। एआई से ग्रोथ का जो मॉडल भारत में सफल होगा, वहीं पूरे थर्ड वल्र्ड पर लागू होगा। भारत का यूपीआई अब फ्रांस, सिंगापुर और यूएई में चल रहा है। गूगलपे दूसरे देशों में पहुंचा, लेकिन यह भी हमारे यूपीआई से प्रेरित है। लेकिन, कुछ गैर सरकारी खुरापाती लोग (नॉन स्टेट एक्टर) इस एआई को हथियार बनाकर (वैपनाइज) क्राइम कर सकते हैं, डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाएं इसी का उदाहरण हैं। साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के एसीएस संजय दुबे ने कॉन्फ्रेंस का खाका पेश करते हुए कहा कि एआई को एडोप्ट करने के लिए मप्र में चार स्तर पर काम किया जा रहा है, पहला अवसंरचना, डेटा, प्रतिभा और रणनीति को सुधारा जा रहा है।
