
- प्रदेश के बाहर स्थापित विंड पावर परियोजनाओं से भी होगी बिजली खरीदेगी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। हवा से बिजली बनाने यानि विंड एनर्जी जनरेशन के मामले में मप्र लगातार प्रगति कर रहा है। पिछले 5 साल में विंड एनर्जी के मामले में काम की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है। इसकी वजह केंद्र सरकार की गाइड लाइन है जिसमें टैरिफ तय करने के अलावा टेंडर के आधार पर ही बिजली खरीदे जाने का जिक्र है। ऐसी स्थिति में अब मप्र विद्युत प्रबंधन कंपनी ( एमपीपीएमसीएल ) ने देश में कहीं भी स्थापित परियोजनाओं से 800 मेगावाट पवन ऊर्जा की खरीदी की तैयारी शुरू कर दी है, जिसमें 25 वर्षों के लिए ग्रीनशू विकल्प के तहत 800 मेगावाट तक की अतिरिक्त क्षमता शामिल है।
गौरतलब है कि प्रदेश में बिजली की कुल उपलब्धता 25081 मेगावॉट हो गई है। दो साल में 2702 मेगावॉट बिजली उत्पादन बढ़ा। इसमें 1835 मेगावॉट सौर ऊर्जा और 647 मेगावॉट पवन और अन्य नवकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी शामिल है। नवकरणीय ऊर्जा की क्षमता को बढ़ाने के लिए अब दूसरे राज्यों से खरीदी की जा रही है। पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए क्षमता उपयोग कारक कम से कम 22 प्रतिशत होना चाहिए। तकनीकी जोखिमों को कम करने और परियोजनाओं से बिजली आपूर्ति की समयबद्ध शुरुआत सुनिश्चित करने के लिए केवल व्यावसायिक रूप से स्थापित और परिचालन में मौजूद तकनीकों का ही उपयोग किया जाना चाहिए। केवल संशोधित मॉडल और निर्माता सूची में सूचीबद्ध पवन टरबाइन मॉडल का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
सस्ती और स्वच्छ बिजली पर फोकस
दरअसल विड एनर्जी सस्ती और कम प्रदूषण वाली बिजली है। इसके स्थान पर कोयला आधारित बिजली महंगी और प्रदूषण पैदा करने वाली होती है। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। नवकरणीय एनर्जी को बढ़ावा मिलने से कोयला आधारित बिजली की निर्भरता कम हो जाएगी। अभी प्रदेश में कोयला आधारित बिजली की आपूर्ति अधिक हो रही है। इससे प्रदेश के उपभोक्ताओं को बिजली महंगी भी पड़ रही है। प्रदेश की बिजली कंपनियां भी लगातार घाटे में चल रही है। इससे हर साल प्रदेश में बिजली के टैरिफ में इजाफा हो जाता है। ऊर्जा विभाग के सचिव विशेष गढ़पाले ने कहा कि सरकार ने विंड एनर्जी खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत 25 साल का करार किया जाएगा। विंड एनर्जी सस्ती दरों पर उपलब्ध होती है, तो 800 मेगावॉट की जगह 1600 मेगावॉट तक बिजली खरीदी जा सकती है।
25 वर्षों के लिए होगा एग्रीमेंट
मप्र सरकार ने नवकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। अब राज्य सरकार प्रदेश के बाहर स्थापित पवन ऊर्जा परियोजनाओं से भी बिजली खरीदेगी। इसके लिए मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने 800 मेगावाट विंड पावर खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह बिजली 25 वर्षों की अवधि के लिए बोली के माध्यम से खरीदी जाएगी। इस निविदा की सबसे खास बात इसमें शामिल ग्रीनशू ऑप्शन है। यानी तय मात्रा से अधिक बिजली खरीदने का विकल्प। इसके तहत यदि प्राप्त दरें और शर्तें राज्य सरकार के लिए अनुकूल रहती हैं, तो 800 मेगावाट के अतिरिक्त उतनी ही और बिजली खरीदी जा सकेगी। इस तरह कुल पवन ऊर्जा खरीद क्षमता 1600 मेगावॉट तक पहुंच सकती है। परियोजनाओं को देश के किसी भी राज्य में स्थापित किया जा सकेगा। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, मध्यप्रदेश में पवन ऊर्जा की संभावनाएं सीमित हैं। इसके विपरीत गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में तेज और स्थिर पवन प्रवाह के कारण बड़े पैमाने पर विंड पावर परियोजनाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। ऐसे में इन राज्यों से बिजली खरीदना प्रदेश के लिए व्यावहारिक और लाभकारी विकल्प माना जा रहा है। दूसरे राज्यों से विंड एनर्जी खरीदने से प्रदेश को कम लागत में स्वच्छ और हरित बिजली उपलब्ध होगी केंद्र और राज्य सरकार द्वारा तय नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
