- ई-ऑफिस सिस्टम को लेकर मप्र सरकार की तैयारी

गौरव चौहान
मप्र सरकार लोगों को सारी सरकारी सुविधाएं ऑनलाइन मुहैया कराने के मिशन पर काम कर रही है। इसके तहत अब सरकार अपने ई-ऑफिस सिस्टम का ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार करने जा रही है। इसके लिए अब तहसील और ब्लॉक सत्र पर कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से जल्द ही ई-ऑफिस सिस्टम के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से तहसील और ब्लॉक स्तर के सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम लागू करने के संबंध में सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए जाएंगे।
गौरतलब है कि एक जनवरी, 2025 से मंत्रालय में ई-ऑफिस सिस्टम लागू हुआ था। सीएम डॉ. मोहन यादव ने इसका शुभारंभ किया था। इसे लागू करने का उद्देश्य मंत्रालय के कामकाज में पारदर्शिता एवं गतिशीलता लाना और फाइलों का मूवमेंट ऑनलाइन शुरू करना था। शुरुआत में मंत्रालय के अधिकारी कर्मचारियों को ई-ऑफिस सिस्टम पर काम करने में दिक्कत हुई, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें नए सिस्टम पर काम करना रास आने लगा। वर्तमान में मंत्रालय में ई-ऑफिस सिस्टम के जरिए विभिन्न विभागों में रोजाना 400 से ज्यादा फाइलों का ऑनलाइन मूवमेंट हो रहा है। मंत्रालय के बाद दूसरे चरण में सभी विभागाध्यक्ष कार्यालयों में और तीसरे चरण में सभी जिला मुख्यालयों के सरकारी कार्यालयों में ई- ऑफिस सिस्टम लागू किया गया। हालांकि अभी जिलों में अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस सिस्टम पर काम करने में कतरा रहे हैं, लेकिन मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम पर काम करना अनिवार्य है। हालांकि मंत्रालय में ई-ऑफिस सिस्टम लागू हुए एक साल से ज्यादा हो गया, लेकिन प्रदेश सरकार के मंत्री अब भी फाइलों को मैनुअली आगे बढ़ा रहे हैं। अब तक एक भी मंत्री ने ई-ऑफिस सिस्टम के जरिए फाइलें निपटाने में रुचि नहीं दिखाई है। यह स्थिति तब है, जब मंत्रियों के निजी स्टाफ/निज सचिव/निज सहायक को ई-ऑफिस सिस्टम का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
ई-ऑफिस सिस्टम से कई फायदे
ई-ऑफिस सिस्टम लागू होने से कार्यालयों में फाइलों का मूवमेंट तेज हो गया है। इस सिस्टम में लिपिक से लेकर मुख्य सचिव तक फाइल निपटाने की समय-सीमा तय है। इसलिए अधिकारी-कर्मचारियों जवाबदेही तय हो गई है। ई-ऑफिस सिस्टम में हर फाइल को ट्रेस करना आसान है। संबंधित विभाग का अधिकारी या कर्मचारी किसी भी फाइल की लोकेशन ट्रेस कर सकता है। इमरजेंसी में एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस में अधिकारियों को फाइल लेकर नहीं जाना पड़ता है। एक क्लिक पर फाइल कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाती है। ई-ऑफिस शुरू होने के बाद कार्यालयों में कागजी रिकॉर्ड रखने की समस्या खत्म हो गई और कागज की बचत होने लगी है।
जल्द समीक्षा करेंगे मुख्य सचिव
मंत्रालय, विभागाध्यक्ष कार्यालयों और जिलों के सरकारी कार्यालय में ई-ऑफिस सिस्टम लागू होने के बाद अब तहसील और ब्लॉक स्तर के सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि मुख्य सचिव जैन व्यस्त शेड्यूल के चलते लंबे समय से ई-ऑफिस सिस्टम की समीक्षा नहीं कर पाए हैं। अब वे जल्द ही मंत्रालय के साथ ही विभागाध्यक्ष कार्यालयों और जिला स्तर पर कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम के क्रियान्वयन के संबंध में फीडबैक लेंगे। मुख्य सचिव ई-ऑफिस सिस्टम पर काम करने में शुरुआत में सामने आई परेशानियों और तहसील व ब्लॉक स्तर के कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम लागू करने के संबंध में अधिकारियों से चर्चा करेंगे। बता दें कि अब से करीब नौ साल पहले यानी वर्ष 2017 में प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम लागू करने की कार्ययोजना बनाई गई थी। इसके लिए मंत्रालय में नए कंप्यूटर और स्कैनर खरीदे गए थे। अपर मुख्य सचिव से लेकर मंत्रालय के कर्मचारियों को राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) के माध्यम से सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण दिया गया था। तत्कालीन शिवराज सरकार के कार्यकाल में मार्च, 2018 में मंत्रियों को भी इसका प्रशिक्षण भी दिया गया था। इसके बाद मंत्रालय में ई-ऑफिस सिस्टम लागू किया गया, लेकिन इस बीच विधानसभा चुनाव नजदीक आ गए और यह सिस्टम ठंडे बस्ते में चला गया। अक्टूबर, 2024 में अनुराग जैन ने मुख्य सचिव की कुर्सी संभालते ही अधिकारियों को एक जनवरी, 2025 तक मंत्रालय में हर हाल में ई-ऑफिस सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए थे। इस पर सामान्य प्रशासन विभाग ने ई-ऑफिस सिस्टम लागू करने की तैयारियां तेज कर दी और एक जनवरी, 2025 से मंत्रालय में नया सिस्टम लागू हो गया।
