साइबर ठगों से निपटने मध्यप्रदेश में पर्याप्त संसाधन नहीं

  • एकमात्र साइबर थाने के भरोसे पूरा प्रदेश…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
चैटजीपीटी, एआई और हर हाथों में स्मार्टफोन आ जाने से अपराध का तरीका बदल गया है।  मप्र साइबर अपराधियों के टारगेट पर है। लेकिन विडंबना यह है की हाईटेक ठगों के सामने मप्र की जनता और पुलिस बेबस है। प्रदेश में एक तरफ साइबर ठगी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, वहीं मप्र में उनसे निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। साइबर ठगों से निपटने के लिए अधिकतर बड़े राज्यों ने अपने संसाधन बढ़ाए हैं लेकिन मप्र इसमें पिछड़ा ही रह गया। भोपाल में प्रदेश का एकमात्र साइबर थाना है, जबकि उत्तर प्रदेश में 75 हैं। पूरे देश की बात करें तो 500 से अधिक साइबर थाने हैं।
गौरतलब है कि साइबर ठगी के मामले बढऩे के बाद पुलिस मुख्यालय ने दो वर्ष पहले सभी जिलों में एक-एक साइबर थाना बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। वर्ष 2026-27 के बजट में राशि मिलने की आशा थी, पर अभी तक थानों के लिए बल ही स्वीकृत नहीं हुआ है। प्रदेश में जिस तरह साइबर ठगी के मामले बढ़ रहे हैं ऐसे में अगर अपराधियों से निपटना है तो सूबे की पुलिस को भी हाईटेक होना पड़ेगा। लेकिन अफसोस की पुलिस आज भी उसी पुराने ढर्रे पर काम करने को मजबूर है। क्योंकि यदि बदलना भी चाहे तो स्टाफ और संसाधन का अभाव आड़े आ जाता है। सूबे के सायबर सिस्टम को दुरूस्त बनाने के लिए 750 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार भी किया गया लेकिन वो कागजों में उलझकर रहा गया। इन सालों में कई मर्तबा बैठक भी हुई लेकिन वो बैठक सिर्फ बैठक ही रह गई।

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