देश की ग्रोथ इंजन बना मप्र!

  • मोहन ‘राज’ की नीतियों का असर

मप्र में डॉ. मोहन यादव सरकार की नीति और नियत का असर दिखने लगा है। आज मप्र देश में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था 16.70 लाख करोड़ के पार पहुंच गई है। मुख्यमंत्री का कहना है कि विकास के हर पैमाने पर मप्र एक समान काम कर रहा है। इसी का परिणाम है कि आज मप्र विकास का पर्याय बना हुआ है।

गौरव चौहान/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मप्र सतत और समावेशी विकास का पर्याय बन रहा है। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, औद्योगिक विस्तार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रही है। मप्र सरकार ने वित्तीय संसाधनों के समुचित प्रबंधन से अच्छे परिणाम देने का मॉडल तैयार किया है। मुख्यमंत्री कहते हैं कि हम कम संसाधनों में भी बेहतर से बेहतर रिजल्ट दे रहे हैं। आज हमारा मप्र देश में सबसे तेज गति से आगे बढऩे वाले प्रदेश के रूप में पहचाना जा रहा है। मप्र 11.60 प्रतिशत की विकास दर से तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार के पास 106 प्रकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए समानुपातिक आवंटन के लिए पर्याप्त धनराशि है। जनकल्याण के साथ हम प्रदेश के औद्योगिक और अधोसंरचनात्मक विकास के लिए भी सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि हमारी सरकार ने विकास के लिए हर क्षेत्र में बहुत अच्छा काम किया है। हमारी कृषि विकास दर भी पहले से बेहतर हुई है। हमने बीते दो साल में औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान देकर जीआईएस और रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव कर मप्र में निवेश के लिए एक नया माहौल तैयार किया है। उन्होंने कहा कि बीते दो साल में प्रदेश में करीब 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर आया है। यह हमारे अपने राज्य की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। लाड़ली बहना योजना में हमारी 1 करोड़ 25 लाख 27 हजार बहने हैं। इनके हित में हम हर महीने 1500-1500 रुपये खाते में डाल रहे हैं। किसानों को किसान सम्मान निधि भी दे रहे हैं। भारत सरकार के वित्तीय व्यवस्था के जो उच्चतम मापदंड है उसके दायरे में रहकर हम अपनी आय-व्यय को विनियमित कर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का फोकस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित भारत बनाने के संकल्प को सिद्ध करने में मध्यप्रदेश का अधिकाधिक योगदान देने पर केन्द्रित है। इसके लिए उन्होंने विकसित मध्यप्रदेश का 2047 विजन डॉक्युमेंट तैयार किया है। इसमें कृषि, उद्योग, एमएसएमई, सिंचाई, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन को बढ़ावा देकर प्रदेश के बहुआयामी विकास को पंख देने पर जोर है। इन्हीं लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उन्होंने वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार और वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया है। उद्योग वर्ष में भोपाल में ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट आयोजित कर 30.70 लाख करोड़ रूपयों से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव प्राप्त किए जिनमें से 8.57 लाख करोड़ रूपयों से ज्यादा के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। इसी समिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से 18 नई नीतियों का लोकार्पण कराया गया। इनमें एमएसएमई विकास नीति, स्टार्ट-अप नीति और औद्योगिक भूमि तथा भवन आवंटन प्रबंधन नियम भी शामिल है। इन नीतियों के क्रियान्वयन से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ी हैं और बड़े निवेशक आकर्षित हो रहे हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने तथा उद्योगों को बड़े शहरों की अपेक्षा संभाग, जिला और तहसील स्तर पर ले जाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में रीजनल इन्डस्ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन का नवाचार किया, जिसमें आशातीत सफलता प्राप्त हुई। इन कॉन्क्लेव की शुरूआत उज्जैन से हुई। जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा और नर्मदापुरम सहित कुल सात आरआईसी हुईं। इनके अलावा रतलाम में रीजनल इन्डस्ट्री स्किल एण्ड एम्पलायमेंट कॉनक्लेव का सफल आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री ने देश-विदेश के अनेक प्रमुख शहरों में जाकर उद्योगपतियों और निवेशकों से सीधे संवाद किया। उन्होंने अनेक शहरों में रोड-शो भी किए। मुख्यमंत्री का विजन है कि विकास केवल किसी विशेष क्षेत्र तक सीमित न रहकर समपूर्ण प्रदेश का संतुलित और समग्र विकास होना चाहिए। मुख्यमंत्री के ये कार्य दर्शातें हैं कि वे स्वयं औद्योगिक विकास के लिए दिन-रात समर्पित है और प्राण-पण से जुटे हुए हैं।
विकास का माइलस्टोन
मप्र में विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए तथा इसकी महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री के विजन डॉक्यूमेंट 2047 और विकास के रोडमैप में वह सब कुछ है, जो प्रदेश की आर्थिक उन्नति की दिशा दिखा रहा है। अगर राज्य का प्रशासनिक ढांचा मुख्यमंत्री की राजनीतिक इच्छाशक्ति के अनुरूप इस रोडमैप के क्रियान्वयन के लिए एक संकल्प के साथ आगे बढ़े, तो मप्र आने वाले समय में उद्योग, व्यापार, रोजगार, अध्यात्म, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और टूरिज्म के साथ 21वीं सदी के स्पेस टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पूरे देश में एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। इस रोडमैप में सबसे विशेष बात यह है कि प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजते और संरक्षित करते हुए 21वीं शताब्दी के विकसित भारत के उन आयामों पर काम करने का संकल्प है जो इस शताब्दी में हमारे जीवन को बड़े स्तर पर प्रभावित करने जा रहे हैं। जहां तक समृद्ध विरासत और आधुनिकता के संगम की बात है तो अगर प्रदेश में पहली बार कृष्ण पाथेय पर काम हो रहा है, राम वन गमन पथ को गति दी जा रही है, सिंहस्थ की जोर शोर से तैयारी चल रही है तो साथ में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एमपी स्पेस-टेक पॉलिसी, 2026 और स्टेट एआई मिशन पर भी काम हो रहा है. यह पहली बार है जब प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट डेटा के उद्योग से खेती को बड़े पैमाने पर उन्नत बनाने की बात हो रही है. इसी वर्ष 23 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि स्पेस टेक नीति-2026 से मप्र भारत का नया ‘स्पेस टेक’ हब बनेगा और इसी तरह भारत की नई अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में मप्र एक सशक्त भूमिका निभाएगा. इसके पहले 15 जनवरी को भोपाल में क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें सरकार ने शासन, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, ग्रामीण विकास, शहरी प्रबंधन और औद्योगिक स्वचालन में एआई के व्यावहारिक और प्रभावशाली उपयोग को प्रदर्शित किया था. इस एआई इम्पैक्ट सम्मेलन का महत्व इसलिए भी था क्योंकि नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट, 2026 जो फरवरी में आयोजित किया गया और जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया, में मप्र ने भी भाग लिया और इस एआई इम्पैक्ट समिट का पूरा जोर ही इस बात पर था कि कैसे एआई हमारे जीवन के हर क्षेत्र में बहुत बड़े स्तर पर इम्पैक्ट डालने वाला है। इस दृष्टि से मप्र में सही समय पर एआई पर कार्य होना आरंभ हुआ है। उज्जैन में आयोजित होने वाले आगामी सिंहस्थ में भी एआई का उपयोग इस आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित करने में दिख सकता है।
डॉ. मोहन यादव के रोडमैप का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रदेश की आर्थिक आत्मनिर्भरता है. मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अगले पांच वर्षों में राज्य के बजट को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है. वर्तमान में राज्य की विकास दर 14-15 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है. इस गति को बनाए रखने के लिए एमएसएमई और औद्योगिक क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि मप्र देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन सके। इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चार स्तंभों-युवा, महिला, गरीब और किसान को आधार बनाकर डॉ. यादव ने चार विशेष मिशनों की घोषणा की है। लाड़ली बहना योजना के माध्यम से नारी सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प और रक्षाबंधन पर राशि बढ़ाना इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। इसके साथ ही, बिरसा मुंडा के सम्मान में धरती आबा योजना के जरिए जनजातीय वर्ग के उत्थान के लिए सरकार ने विकास की गति बढ़ाई है। इसी तरह केंद्र सरकार के नक्सल विरोधी अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हुए मप्र ने केंद्र सरकार की डेडलाइन यानी 31 मार्च, 2026 के बहुत पहले दिसंबर में ही नक्सलवाद का पूरी तरह से खात्मा कर दिया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 11 दिसंबर 2025 को राज्य से नक्सलवाद के खात्मे का ऐलान करते हुए लाल सलाम को आखिरी सलाम कहा. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मुझे इस बात का संतोष भी है और गर्व भी है. हमारे पुलिस के जवानों ने अपनी शहादत देते हुए भी इस काम को अंजाम दिया. यह बड़ी चुनौती थी. माननीय गृह मंत्री जी, माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि हम मार्च 2026 तक नक्सलवाद का सफाया करें. हमें इस बात का संतोष भी है और सुख भी है कि हमारे मप्र की पुलिस ने 11 दिसंबर को नक्सलवादियों के लाल सलाम को आखिरी सलाम कर दिया है।
प्रति व्यक्ति आय 22 लाख का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आने वाले वर्षों के लिए राज्य को विकसित मप्र 2047 की दृष्टि से तैयार करने का जो संकल्प लिया है, वो देश के अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय है। विकसित मप्र 2047 एक दूरदर्शी पहल है। राज्य सरकार के इस पहल का असर प्रदेश के भविष्य पर भी पडऩे वाला है। विकसित मप्र 2047 की परिकल्पना साकार होने के परिणाम स्वरूप प्रदेश में औद्योगिकीकरण को गति मिलेगी। राज्य में रोजगार सृजन होगा।आधारभूत संरचनाओं का विस्तार होगा। राज्य का सामाजिक न्याय और समावेशी विकास होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह प्रयास है कि प्रदेश न केवल आर्थिक वृद्धि करे बल्कि यहां का हर नागरिक विकास की मुख्यधारा से जुड़े। मोहन युग की यह पहल आने वाले वर्षों में मप्र को विकसित भारत की परिकल्पना का अग्रणी राज्य बनाएगी। वर्ष 2047 तक प्रदेश का समेकित विकास करते हुए सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) को 15.03 लाख करोड़ से बढ़ाकर 250 लाख करोड़ (2 ट्रिलियन डॉलर) करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय को एक लाख 60 हजार रूपये से बढ़ाकर 22 लाख रूपये करने का भी लक्ष्य रखा गया है। दृष्टि पत्र में वर्ष 2047 में एक समृद्ध मप्र की परिकल्पना की गयी है जो कि सभी के सामूहिक प्रयासों से संपन्न, सुखद और सांस्कृतिक मप्र की नींव पर निर्मित होगा। इस प्रकार वर्ष 2047 का मप्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रेरणा मंत्र सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबके प्रयास के अनुसरण से निर्मित होगा। मप्र 2047 दृष्टिपत्र अनुसार वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। सकल घरेलू उत्पाद में कृषि 43 प्रतिशत, सेवाएं 36 और उद्योग 21 प्रतिशत योगदान देते हैं। वर्ष 2047 तक उद्योगों और स्टार्ट-अप को बढ़ावा देकर, रोजगार के अवसर सृजित कर अर्थव्यवस्था को संतुलित करते हुए जीडीपी में कृषि का योगदान 24-28 प्रतिशत, उद्योग का योगदान 21-25 प्रतिशत और सेवाओं का योगदान 49-53 प्रतिशत तक लाने का प्रयास किया जायेगा। सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हुए प्रति व्यक्ति औसत आयु को 67.4 वर्ष से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 84 वर्ष से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया। साथ ही साक्षरता दर को 75.2 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 100 प्रतिशत करने का प्रयास किया जाएगा। ऊर्जा के क्षेत्र में कुल ऊर्जा स्त्रोत में नवकरणीय ऊर्जा का प्रतिशत 22.5 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत से अधिक किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश को लेकर पूरे देश में आज सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा है, वह है मप्र। उन्होंने कहा कि निवेश के मामले में हमारा प्रदेश देश का मॉडल स्टेट बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज मप्र कई मामलों में देश में अव्वल है। प्रदेश को और आगे ले जाना है। हमारी सरकार खेती-किसानी, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और नए-नए उद्योग धंधों की स्थापना के जरिए प्रदेश के युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। हमारी सरकार सबके साथ और सहयोग से सबके विकास के लिए साझा प्रयासों एवं सबको पूरे विश्वास में लेकर विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम प्रदेश के किसानों की जिंदगी बेहतर बनाना चाहते हैं। इसीलिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन से दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, आधुनिक खेती के प्रोत्साहन और किसानों को सम्मान निधि देकर उनके जीवन में स्वावलंबन लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग रोजाना नए-नए उद्योग धंधों की स्थापना हो रही है। इससे हमारे युवाओं को रोजगार भी मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। उन्होंने कहा कि मप्र में भरपूर लैंड बैंक, सरप्लस बिजली और मजबूत अधोसंरचना है। मप्र निवेशकों के लिए अनुकूल है। प्रदेश में बड़ी मात्रा में निवेश लाने के लिए हमने कई अप्रासंगिक कानून बदले हैं। उद्योग लगाने के लिए शासकीय अनुमतियां भी कम से कम कर दी हैं। हम निवेशकों के हित में 18 नई औद्योगिक नीतियां भी लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में मजबूत कानून व्यवस्था हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। असामाजिक और गुंडा तत्वों के लिए प्रदेश में कोई स्थान नहीं है। कानून को अपने हाथ में लेने वाले ऐसे तत्वों का प्रदेश से सफाया कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम राज्य की बेहतरी के लिए नए फैसले लेने में पीछे नहीं हटेंगे। लोकलुभावन वादों की जगह हम जनहित के निर्णयों पर तेजी से आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि कृषि, प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार है। प्रदेश में लागू होने वाले नदी जोड़ो अभियान से प्रदेश के सिंचित क्षेत्र में पर्याप्त वृद्धि होगी और मध्यप्रदेश कृषि विकास व किसान कल्याण में स्वर्णिम अध्याय लिखेगा। कृषकों को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोलर सिंचाई पम्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस पहल से किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी। उद्यमिता को भी निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में वन्य जीव सम्पदा में निरंतर वृद्धि हो रही है। प्रदेश में गत वर्ष शुरू किये गये 2 टाईगर अभयारण्य, चीता अभयारण्य के साथ जंगली भैंसे और गैंडे जैसे जीवों की संख्या बढ़ाते हुए वन और वन्य जीवों पर केन्द्रित पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए भी प्रयास किया जा रहा है। इस गतिविधियों से वनांचल में रोजगार के अवसर भी निर्मित हो रहे हैं। प्रदेश में नई रेल लाईनों का भी निरंतर विस्तार हो रहा है, इंदौर-मनमाड़ ट्रेन के आरंभ होने से मालवा और निमाड़ में व्यापार-व्यवसाय को प्रोत्साहन मिलेगा। जनसहभागिता से प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। प्रदेशवासी अपने परिश्रम और निष्ठा से समृद्धि और सफलता के नए द्वार खोलेंगे। विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य प्राप्ति में मध्यप्रदेश हरसंभव योगदान देगा।
संपन्न बना रहा पर्यटन
मप्र के साफ-सुथरे शहर, सुरक्षा, हेरिटेज, टाइगर रिजर्व और स्पिरिचुअल डेस्टिनेश के परफेक्ट कॉम्बिनेशन ने देसी-विदेशी पर्यटकों को दिल जीत लिया है। संस्कृति, वन्यजीव, धर्म और प्रकृति, चारों का बेजोड़ संगम देखने को मिल रहा है। यह ग्रोथ मप्र की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और सुरक्षित पर्यटन नीति का नतीजा है। पर्यटन की दृष्टि से मप्र एक समृद्ध और विविधतापूर्ण राज्य है। इसकी सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरें, प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीव संपदा का आकर्षण अतुलनीय मप्र के रूप में पर्यटकों की पहली पसंद बन रहा है। राज्य सरकार मप्र को पर्यटन में नंबर 1 बनाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए कई कवायदें की जा रहीं हैं। पर्यटन की दृष्टि से मप्र एक समृद्ध और विविधतापूर्ण राज्य है। इसकी सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरें, प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीव संपदा का आकर्षण अतुलनीय मप्र के रूप में पर्यटकों की पहली पसंद बन रहा है। महाकाल लोक, ओंकारेश्वर महालोक, श्रीराम वनगमन पथ, देवी लोक, राजा राम लोक, हनुमान जैसी परियोजनाओं ने धार्मिक पर्यटन को आध्यात्मिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। मप्र, जिसे भारत का हृदय कहा जाता है, धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत का एक समृद्ध ताना-बाना है, जिसमें कई ऐसे स्थल हैं जो तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में, राज्य सरकार इन स्थलों को बढ़ाने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है, जो राज्य की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मप्र के विविध धार्मिक परिदृश्य में हिंदू, जैन, बौद्ध और इस्लाम सभी शामिल हैं, जो आध्यात्मिक साधकों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य है। हाल के वर्षों में मप्र में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, विशेष रूप से उज्जैन में महाकाल महालोक के सफल शुभारंभ के बाद। महाकाल महालोक में आगंतुकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जो आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के उत्प्रेरक के रूप में धार्मिक पर्यटन की क्षमता को रेखांकित करता है। डॉ. यादव के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने पूरे राज्य में महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और संवर्धन को प्राथमिकता दी है। इस पहल का उद्देश्य न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है, बल्कि आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाना भी है। महाकाल महालोक इन प्रयासों का केंद्र बिंदु है, जिसे महाकालेश्वर मंदिर के आसपास एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यह पुनर्विकास प्रबंधन को बेहतर बनाता है और इस ऐतिहासिक स्थल के आध्यात्मिक वातावरण को समृद्ध करता है। प्रदेश के अनेक धार्मिक स्थलों का उनकी परम्पराओं के अनुरूप विकास किया जा रहा हहै। सलकनपुर में देवी लोक को शक्ति मंदिर स्थल के रूप में विकसित किया गया है, ताकि सुगमता से देवी दर्शन के साथ ही तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर पहुंच और सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं। छिंदवाड़ा में श्रीहनुमान लोक भगवान हनुमान का उत्सव मनाएगा, जिसमें भक्तों और पर्यटकों के लिए एक आकर्षक वातावरण बनाया जाएगा। ओरछा में रामराजा लोक भगवान राम का सम्मान करेगा और अध्यात्म और इतिहास दोनों में रुचि रखने वाले आगंतुकों को आकर्षित करेगा। सागर में संत रविदास लोक के पुनरुद्धार का उद्देश्य संत रविदास की विरासत का सम्मान करना है, ताकि उनके अनुयायियों और उनकी शिक्षाओं में रुचि रखने वाले पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। जबलपुर में रानी दुर्गावती स्मारक और रानी अवंतीबाई स्मारक जैसे ऐतिहासिक स्थलों को भी उनके सांस्कृतिक महत्व को उजागर करते हुए बढ़ाया जा रहा है, साथ ही इतिहास और अध्यात्म दोनों में रुचि रखने वाले आगंतुकों का भी ध्यान रखा जा रहा है। इसके अलावा, अमरकंटक में माँ नर्मदा महालोक में आगंतुकों की सुविधाओं को बढ़ाने और इसकी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ावा देने के लिए सुधार किए जा रहे हैं। सरकार खरगोन में देवी अहिल्याबाई लोक, बड़वानी जिले में नागलवाड़ी लोक जैसे नए आध्यात्मिक स्थलों को विकसित करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसमें शांत वातावरण बनाने पर जोर दिया जा रहा है। ग्वालियर में जाम सावंली हनुमान लोक में भगवान हनुमान की शक्ति और भक्ति का पर्व मनाया जाएगा, वहीं जानापाव जिसे भगवान परशुराम की जन्म स्थली के रूप में जाना जाता है, वहां परशुराम लोक विकसित किया जाएगा, जिसमें भगवान परशुराम को समर्पित एक नया मंदिर बनाया जाएगा, जहां आगंतुकों के लिए विभिन्न सुविधाएँ भी होंगी। इस परियोजना में नर्मदा जल को लाना और आसान पहुंच के लिए रोपवे का निर्माण करना भी शामिल है। दतिया में मां पीतांबरा लोक, देवी पीतांबरा को समर्पित एक और महत्वपूर्ण स्थल है। रतनगढ़ में माता मंदिर लोक देवी दुर्गा को समर्पित एक प्रतिष्ठित मंदिर के साथ एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल भी बन जाएगा।

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