खरीदी घोटाले में लोकायुक्त बढ़ाएगा जांच का दायरा

खरीदी घोटाले
  • नगरीय विकास एवं आवास विभाग से मिल सकती है जानकारी…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में खरीदी और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के मामले में लोकायुक्त संगठन अब तक की सबसे बड़ी जांच करने जा रहा है। अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या के लिहाज से यह संगठन की सबसे व्यापक जांच होगी। विभागीय स्तर पर अब तक 392 अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा – चुकी है। अगले सप्ताह नगरीय विकास एवं आवास विभाग से इन सभी मामलों की विस्तृत जानकारी और दस्तावेज लोकायुक्त संगठन को मिल सकते हैं। दरअसल, निकायों में खरीदी की गड़बडिय़ां सामने आने के बाद लोकायुक्त संगठन ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। उसने आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास विभाग को पत्र भेजकर पिछले तीन साल में एमपी ई-नगर पालिका और जेम पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदी का ब्योरा मांगा था। इसमें खरीदी से संबंधित दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, एआइ से किए गए विश्लेषण और संबंधित अधिकारी कर्मचारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई थी। विभागीय कार्रवाई के पूरे रिकार्ड मिलने पर जांच के बाद मामले में प्रकरण पंजीबद्ध करने की तैयारी है। लोकायुक्त संगठन संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के बयान दर्ज करेगा और दस्तावेजों की जांच करेगा। प्रकरणों की संख्या और अलग-अलग निकायों में हुई गड़बडिय़ों को देखते हुए जांच में एक वर्ष से अधिक समय लग सकता है।
खनिज के अवैध कारोबार के 62 हजार मामले दर्ज
प्रदेश में अवैध उत्खनन, परिवहन, भंडारण पर लगातार बढ़ रहे मामलों को लेकर एनजीटी से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने सख्ती दिखाई है। समय-समय पर न्यायालय की सख्ती के बाद कार्रवाई की जा रही है। ई-खनिज पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, विगत वर्षों में अवैध उत्खनन, परिवहन के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है और इसके जरिए सरकारी खजाने में करोड़ों रुपये का अर्थदंड भी जमा कराया गया है। बीते पांच वर्षों में अवैध उत्खनन, परिवहन के 62 हजार 727 प्रकरण दर्ज किए गए। इनमें से 35 हजार 292 प्रकरणों का निराकरण किया और 326 करोड़ 37 लाख 81 हजार रुपये अर्थदंड वसूला गया। पांच साल में 35 हजार 292 प्रकरण निराकृत वर्ष 2022-23 में 6,779 मामलों का निपटारा हुआ। वर्ष 2023-24 में 7599 प्रकरण निराकृत हुए। वर्ष 2024-25 में सबसे अधिक 8,323 मामलों का निराकरण किया गया।
संभागवार निकायों में बड़ी गड़बडिय़ां
भोपाल: सीहोर में निजी जमीन पर सडक़ निर्माण, लटेरी (विदिशा) में तालाब गहरीकरण और खनिज रायल्टी में गड़बड़ी।
इंदौर: पेटलावद (झाबुआ) में दुकान आवंटन, भीकनगांव (खरगोन) में अवैध कालोनियों की मंजूरी और धार में सामग्री खरीदी में अनियमितता । जबलपुर: न्यूटन चिखली (छिंदवाड़ा) में जेम से खरीदी, सिवनी में हाईमास्ट-एलईडी खरीदी और डिंडौरी में घटिया सडक़ निर्माण। ग्वालियर: चंदेरी में जलप्रदाय योजना, भिंड में टेंडर और गोहद में डस्टबिन खरीदी में गड़बड़ी।
रीवा:  अमरपाटन में फर्जी मजदूरी भुगतान, कोटर में वाहन खरीदी और मऊगंज में फर्जी बिल।
शहडोल: बिजुरी (अनूपपुर) में अधिक भुगतान, अनूपपुर में पीएम आवास और ब्यौहारी में टेंडर अनियमितता ।

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