- निगम-मंडल में नियुक्तियों पर लगा ब्रेक!

गौरव चौहान
मप्र में निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्ति की आस लगाए बैठे नेताओं को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। जानकारी के अनुसार, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने फिलहाल इन नियुक्तियों पर रोक लगा दी है। यह निर्णय क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई चर्चा के बाद लिया गया है। नई गाइडलाइन के तहत अब सबसे पहले जनभागीदारी समितियों में नियुक्तियां की जाएंगी। इन समितियों को जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को अवसर देने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि पहले इन समितियों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाए, इसके बाद निगम-मंडलों में नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की जाए।
सूत्रों के मुताबिक, निगम-मंडलों में नियुक्तियों के लिए नामों की सूची लगभग तैयार थी। इस संबंध में मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच भी महत्वपूर्ण बैठक हो चुकी थी, जिसमें सहमति से नामों पर चर्चा की गई थी। हालांकि, अंतिम समय में संगठन ने नियुक्तियों को होल्ड करने का निर्णय लिया, जिससे संकेत मिलता है कि पार्टी अब इस प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना चाहती है। बताया जा रहा है कि एक दर्जन से अधिक निगम-मंडलों में प्रस्तावित नियुक्तियां फिलहाल रोक दी गई हैं। इसके पीछे संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की रणनीति को प्रमुख कारण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नियुक्तियों को लेकर कोई भी निर्णय व्यापक विचार-विमर्श और संतुलन के साथ लिया जाए।
अब एक माह बाद खुलेगी सूची
निगम-मंडल, बोर्ड और आयोगों में अब नियुक्तियां करीब एक महीने और टल गई हैं। अब संगठन का फोकस स्थानीय समितियों में लोकल लीडर्स के एडजस्टमेंट पर है। यानी अब एक महीने बाद ही राजनीतिक नियुक्तियों की सूची खुलेगी। भाजपा के सीनियर लीडर्स की मानें तो पार्टी का पूरा फोकस पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर है। जिन नेताओं को निगम मंडलों में एडजस्ट किया जा सकता है उनके नामों पर चर्चा हो चुकी है। कुछेक नामों को छोड़कर लगभग सभी नामों की लिस्ट तैयार कर ली गई है। पार्टी फिलहाल किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचते हुए राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन करना चाहती है। चुनाव परिणाम आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया को गति मिलने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने, संभावित असंतोष को नियंत्रित करने और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की रणनीति का हिस्सा है। कुल मिलाकर, निगम-मंडल नियुक्तियों पर लगी यह रोक अस्थायी जरूर है, लेकिन इससे यह स्पष्ट हो गया है कि आगे की नियुक्तियां पूरी रणनीति और समन्वय के साथ ही की जाएंगी।
पांच राज्यों के चुनाव परिणाम का इंतजार
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद ही निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियां होंगी। 4 मई को 5 राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद निगम-मंडलों में नियुक्तियों की लिस्ट घोषित होना शुरू हो जाएगी। गौरतलब है के नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्त किए जा रहे हैं। पहली लिस्ट में नगर परिषदों और नगर पालिकाओं को मिलाकर 169 निकायों में एल्डरमैन नियुक्त किए जा चुके हैं। विश्वविद्यालयों की कार्यपरिषद में भी संघ, भाजपा और विद्यार्थी परिषद से जुड़े नेताओं को शामिल किया जा रहा है। अभी नगर निगमों सहित 244 निकायों में एल्डरमैन नियुक्त होने हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने निगम मंडलों को लेकर कहा कि निगम-मंडल की नियुक्तियां छोटा विषय है। 50-60 लोग ही निगम-मंडल में अध्यक्ष बनेंगे। अभी नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्तियां हो रहीं हैं। जनभागीदारी समितियां बना रहे हैं। हमारे मोर्चों में नियुक्तियां हो रहीं हैं नीचे की इकाइयां बन रहीं हैं। हजारों कार्यकर्ताओं और नागरिकों को शासन की समितियों और अन्य व्यवस्थाओं में पद देने का काम कर रहे हैं। निगम मंडल तो जब पार्टी चाहेगी तब घोषित हो जाएंगे।
सहकारी बैंकों में राजनीतिक नियुक्तियों की तैयारी
मप्र से बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां चुनाव से पहले सहकारी बैंकों और समितियों में राजनीतिक नियुक्तियों की तैयारी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, सहकारिता विभाग में लंबे समय से लंबित नियुक्तियों को अब तेजी से पूरा करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत अपेक्स बैंक सहित जिला सहकारी बैंकों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, संचालक मंडल और अन्य समितियों में पदाधिकारियों की नियुक्ति जल्द हो सकती है। बताया जा रहा है कि निगम-मंडलों के साथ-साथ सहकारी संस्थाओं में भी राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है। यह नियुक्तियां आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए बेहद अहम मानी जा रही हैं। हाल ही में इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच मुलाकात भी हो चुकी है। इसके अलावा क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जमवाल के साथ भी इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई है। सूत्रों की मानें तो पहले इन पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी और उसके बाद सहकारी संस्थाओं में चुनाव कराने की रणनीति पर काम होगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सहकारिता क्षेत्र में ये नियुक्तियां चुनावी समीकरणों को साधने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। अब देखना होगा कि इन नियुक्तियों का ऐलान कब तक होता है और इसका आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ता। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि अपेक्स बैंक सहित जिला सहकारी बैंकों में जल्द पदाधिकारी नियुक्त होंगे। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, संचालक मंडल और अन्य समितियों में नियुक्तियां होंगी। मंत्री सारंग ने कहा कि सहकारिता के चुनावों पर कोई रोक नहीं हैं। चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। हमारी सरकार सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए कटिबद्ध है। जल्द से जल्द चुनाव कराए जाएंगे।
