
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। नियमानुसार किसी भी विभाग में वरिष्ठता के अनुसार पदस्थापना की जाती है। लेकिन मप्र के ग्रामीण विकास विभाग में सबकुछ उलटा-पुलटा चल रहा है। इस कारण पोस्टिंग का गणित ऐसा गड़बड़ाया है कि वरिष्ठों के ऊपर कनिष्ठों को बॉस बनाकर पदस्थ कर दिया गया है। इससे विभाग में विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। यह स्थिति तब है, जबकि ग्रामीण विकास विभाग में संभागों में पदस्थापना के लिए पात्र अधिकारियों की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में संभाग आयुक्त कार्यालय में पदस्थापना के लिए पात्र संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारियों की संख्या 40 से ज्यादा है। इसके बावजूद 10 में से तीन संभागों में महत्वपूर्ण पदों पर, यानी 33 प्रतिशत पदों को नियम विरुद्ध भरा गया है। इससे पिछले वर्षों में संभागों में संयुक्त आयुक्त बनने की चाह लिए करीब 60 से ज्यादा पात्र अधिकारियों में से 20 से ज्यादा रिटायर हो चुके हैं।
जानकारी के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग में मुख्यालय से बाहर संभाग आयुक्त बनाने में सीनियारिटी को जमकर दरकिनार किया जा रहा है। प्रदेश के 10 संभाग आयुक्त कार्यालयों में संयुक्त आयुक्त (विकास) का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। अब इन पदों को लेकर विभाग में खींचतान मची हुई है। प्रदेश के 10 संभागों में से एक इंदौर संभाग आयुक्त कार्यालय ऐसा है, जहां संयुक्त आयुक्त पद से एक पद ऊपर (सीनियर), यानी अतिरिक्त संचालक स्तर के अधिकारी, अपने मूल पद से एक पद नीचे यानी संयुक्त आयुक्त का पद छोडऩे को तैयार नहीं हैं। इनका नाम दीतू सिंह राणदा है और यह इंदौर में विकास आयुक्त हैं। इनका मूल पद अतिरिक्त संचालक का है, लेकिन अपने स्तर से एक पद नीचे के पद, संयुक्त आयुक्त के पद पर जमे हुए हैं।
भोपाल-नर्मदापुरम में भी गड़बड़ी
दो संभागों में जूनियर को सीनियर पद पर बैठा दिया है। यानी संयुक्त आयुक्त पद से मूलत: दो पद नीचे के अधिकारियों को संभागीय संयुक्त आयुक्त के पद पर बिठाया गया है। जिन अफसरों को पदस्थ किया है, वे मूलत: सीईओ जनपद स्तर के अधिकारी हैं। पद खाली होने के कारण उन्हें स्थानापन्न उपायुक्त बना दिया गया था। पहला मामला भोपाल संभाग के संयुक्त आयुक्त विनोद यादव का है। इनके अधीनस्थ दो वरिष्ठ उपायुक्तों वृंदावन मीना और अशोक उइके द्वारा लगभग एक से डेढ़ वर्ष तक अपने जूनियर के अधीन जिला रायसेन में काम किया गया। बाद में उइके का तो निधन भी हो चुका है, जबकि दूसरे का तबादला हो गया। ऐसा ही दूसरा मामला नर्मदापुरम संभाग का है। यहां नवल मीना के पास संयुक्त आयुक्त का प्रभार है, जबकि इसी कार्यालय में उनसे वरिष्ठ स्थायी उपायुक्त दिवाकर पटेल उनके अधीन काम कर रहे हैं। ग्रामीण विकास विभाग के सीनियर अफसरों को संभागीय विकास आयुक्त के अलावा पहले जिला पंचायत सीईओ के 13 पदों पर पदस्थापना दी जाती थी। तब कोई विवाद नहीं था, लेकिन अब इन पदों पर आईएएस या राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर ही पदस्थ किए जाते हैं। ऐसे में सीनियर अफसरों के पास मुख्यालय के अलावा फील्ड में सिर्फ 10 संभागीय आयुक्त के पद शेष रह गए हैं।
