अलग धर्म कोड का… मुद्दा गरमाया

अलग धर्म कोड
  • कांग्रेस पर आदिवासियों के बीच हिंदू न होने का भ्रम फैलाने का आरोप

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में जनगणना शुरू होने से पहले अलग धर्म कोड का मुद्दा गरमा गया है। आदिवासियों के लिए हिंदू धर्म से अलग पहचान और जनगणना में अलग से आदिवासी धर्म कोड शामिल करने की मुहिम जोर पकड़ रही है। कांग्रेस आदिवासियों के बीच जाकर उन्हें स्वयं को हिंदू न मानने का भ्रम फैलाने की कोशिश में जुटी हुई है। इसके लिए पार्टी के नेता जनगणना में आदिवासियों को अलग धर्म कोड की मांग कर रहे हैं। वे मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में जाकर आदिवासी समुदाय से अपील कर रहे हैं कि जनगणना में धर्म के कालम में वह स्वयं को हिंदू न बताएं। इसको लेकर भाजपा कांग्रेेस पर हमलावर है। भाजपा का कहना है कि अब जनगणना के बहाने कांग्रेस हिंदू ही नहीं, बल्कि समाज का बंटवारा करना चाहती है।
गौरतलब है कि राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा कुछ समय पहले आदिवासियों से की गई गर्व से कहो हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं की अपील के बाद कांग्रेस की यह कोशिश तेज हुई है। अब बड़वानी में सिंघार के ताजा बयान से मप्र में कांग्रेस की आदिवासी बनाम हिंदू के दांव से राजनीतिक माहौल गरमा रहा है। बता दें कि मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग की संख्या अधिक होने से यह वर्ग सरकार बनाने और बिगाडऩे में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस आदिवासी वर्ग को साधने में कोई कोर कसर नहीं छोड़तीं। मध्य प्रदेश से ही जननायक बिरसा मुंडा की जयंती को गौरव दिवस के रूप में मनाने की परंपरा आरंभ हुई है। पिछले दो दशक से आदिवासी समुदाय भाजपा के साथ है, अलबत्ता, 2018 में कांग्रेस की ओर आदिवासी समाज का झुकाव होने से कमल नाथ को सरकार में आने का मौका जरूर मिल गया था, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस को प्रदेश की किसी भी एसटी आरक्षित सीट पर जीत नहीं मिली। यही वजह है कि 2028 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले शुरू हो रही जनगणना को लेकर कांग्रेस सक्रिय हो गई है। उसने आदिवासी बनाम हिंदू बहस वर्ष 2028-29 के चुनाव को ध्यान में रखकर छेड़ी है।
धर्म कोड की मांग राष्ट्रपति तक जाएगी
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने देश में चल रही 16वीं जनगणना में आदिवासियों के लिए धर्म का कोड सृजित करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा इसकी मांग लगातार की जा रही है। आदिवासी एकता परिषद के माध्यम से यह मांग देश के राष्ट्रपति तक जाना चाहिए। जनगणना में आदिवासियों का धर्म कोड होने से उनकी संस्कृति उनकी पहचान बचेगी। आदिवासियों समाजजनों ने भी इस हस्ताक्षर अभियान में समर्थन दिया है। जनगणना में आदिवासी समुदाय को अलग से पहचान दिलाने की कांग्रेस की इस राजनीति कोशिश को समाज को बांटने के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। ऐसे में यह परवान नहीं चढ़ी तो यह कांग्रेस के लिए राजनीतिक जोखिम बन सकती है। दरअसल, कांग्रेस के पास आदिवासी समुदाय के बीच जाकर बताने के लिए फिलहाल कुछ खास नहीं है, वहीं द्रौपदी मुर्मु को राष्ट्रपति पद तक पहुंचाने का श्रेय भाजपा अपने खाते में रखती है। इसके साथ ही पेसा नियम जैसी कवायद भी भाजपा सरकार कर चुकी है। माओवाद समाप्ति के बाद आदिवासी वर्ग मुख्यधारा में शामिल हो रहा है। देश के विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के सम वैचारिक संगठन आदिवासी समुदाय के बीच मतांतरण रोकने के साथ उनके कल्याण के लिए कार्यक्रमों को लगातार जारी रखे हुए हैं। संघ की कोशिश है कि रामायण और महाभारत काल के तमाम उदाहरण के माध्यम से आदिवासियों को उनके हिंदू होने का बोध कराते हुए मुख्य धारा में लाया जाए। मध्य प्रदेश भाजपा के मंत्री रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि राहुल गांधी और कांग्रेस की संस्कृति ही सनातन धर्म के विरोध के लिए है। ये विदेशी षडय़ंत्रों को बढ़ावा दे रहे हैं। अब जनगणना के बहाने कांग्रेस हिंदू ही नहीं, बल्कि समाज का बंटवारा करना चाहती है। उमंग सिंघार का यह बयान हिंदू समाज के साथ ही आदिवासी समुदाय को भी कमजोर बनाने की साजिश है। कांग्रेस आदिवासियों को देश की मुख्यधारा से काटना चाहती है।

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