सहारा कंपनी में निवेशकों के छह हजार करोड़ से ज्यादा डूबे

  • सहारा निवेश घोटाले पर सदन में हंगामा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
विधानसभा के प्रश्नकाल में सहारा समूह से जुड़े निवेशकों की राशि वापसी का मामला जोरदार तरीके से उठा। कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि सहारा ने प्रदेश के निवेशकों के 6 हजार 689 करोड़ रुपये डकार लिए, लेकिन अब तक महज 355 करोड़ रुपये ही लौटाए गए हैं। जवाब में राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया कि इस मामले में 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि छोटे निवेशकों ने अपनी गाढ़ी कमाई निवेश की थी और प्रकरण उच्च न्यायालय में रिट याचिकाओं के रूप में भी विचाराधीन रहा है। मंत्री के अनुसार, सभी एफआईआर मुरैना में दर्ज कर मुख्य प्रकरण में मर्ज की गई हैं। अब तक 355 करोड़ रुपये निवेशकों को वितरित किए जा चुके हैं। इस पर जयवर्धन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि पिछले छह वर्षों में कुल 123 एफआईआर दर्ज हुईं, जिनमें से कई लंबित हैं और गृह विभाग के पास समुचित जानकारी तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि कुल राशि की तुलना में रिकवरी मात्र 5 प्रतिशत है और सरकार स्पष्ट करे कि शेष राशि की वसूली के लिए क्या ठोस योजना है। मंत्री ने जवाब दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत कार्रवाई की जा रही है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मामला न्यायिक प्रकृति का है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में ही सभी निर्णय लिए जा रहे हैं। शासन की अपनी सीमाएं हैं और कार्रवाई न्यायालय के आदेशों के अनुरूप ही होगी।
 प्रदेश में सहारा समूह में निवेश करने वालों की कुल संख्या, कुल प्राप्त आवेदन 9 लाख 6 हजार 661 हैं। इनमें से लगभग 7.50 लाख आवेदकों का निराकरण सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हो गया है। सहारा समूहे में निवेशकों ने कुल 6,689 करोड़ रुपए निवेश किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने सीआरसीएस, सहारा रिफंड पोर्टल बनाया है। उसके माध्यम से 355 करोड़ रुपए की राशि छोटे निवेशकों में वितरित की जा चुकी है। इस पर जववद्र्धन सिंह ने कहा, मंत्री पटेल ने स्वीकारा है कि कुल मिलाकर मप्र के 6.50 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि का गबन हुआ है और मात्र 300 करोड़ रुपए के आसपास रिकवरी हुई है, जो केवल 5 प्रतिशत है। अभी जो 6,300 करोड़ की राशि छोटे निवेशकों को अप्राप्त है। क्या सरकार उसकी रिकवरी की कोई योजना बना रही है? उन्हें कब तक यह राशि वापस दिलाई जाएगी? यह भी बताया जाए की सहारा कंपनी की मप्र में कितनी संपतियां है, और कितनी अभी तक कुर्क हो चकी है। क्या सरकार उनको अपने पास लेकर नीलामी की योजना बना रही है? उसमें कुछ ऐसे आरोप भी है कि कुछ बड़े-बड़े नेताओं ने भी जमीने खरीदी है। इसके जवाब में राज्यमंत्री पटेल ने बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिट पिटीरशन के आधार पर पोर्टल बनाया गया है। स्टॉक एक्सर्वेज बोर्ड ऑफ इंडिया (संची) में इसमें लगा हुआ है। मामले में सेबी स्वयं सुप्रीम कोर्ट गई है और सुप्रीम कोर्ट के अधीन रिफंड की सारी कार्रवाई चल रही है।
कई संपत्तियां अटैच
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सहारा समूह की कई संपत्तियां अटैच की गई है। अब यह मग्र पुलिस की सीमा से बाहर का विषय है और सुप्रीम कोर्ट स्वयं इसकी समीक्षा कर रहा है। चर्चा में हिस्सा लेते हुए संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह विषय सबज्युडिशरी है। उनकी जिनती भी प्रॉपटी है. वह ऑनलाइन है और इसलिए एकदम सीधा यह कह देना कि संपत्ति किसी नेता के पास है, ऐसा नहीं है। सहारा की पूरी प्रॉपर्टी ऑनलाइन है और मामला सुप्रीम कोर्ट में विवारधीन है। जमीन की नीलामी भी सुप्रीम कोर्ट के अधीनस्थ हो रही है. इसलिए इसमें गृह विभाग की भूमिका नहीं है। सदस्य का प्रश्न अच्छा है, लेकिन इसमें शासन की कुछ मजबूरियां है, क्योंकि सभी निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हो रहे हैं।

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