
- महिलाएं और बच्चे हुए ज्यादा शिकार
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। इंदौर शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण पाने के लिए नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे नसबंदी अभियान और करोड़ों रुपये के खर्च के दावे जमीन पर पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़े शहर की भयावह स्थिति को दर्शा रहे हैं। वर्ष 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 31 मार्च तक कुल 13 हजार 640 नागरिक कुत्तों के हमले का शिकार होकर अस्पतालों तक पहुंचे हैं। यह आंकड़ा बताता है कि निगम के तमाम प्रयासों के बावजूद सडक़ों पर आवारा कुत्तों का खौफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
शहर के 20 से अधिक क्षेत्र बने डेंजर जोन: स्वास्थ्य विभाग ने डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं के आधार पर शहर के उन इलाकों की पहचान की है जो अब हॉट स्पॉट बन चुके हैं। इन क्षेत्रों में खजराना की हिना कॉलोनी, शाहीन नगर मुख्य मार्ग और जमजम चौराहा शामिल हैं।
इसके अलावा आजाद नगर, चंदननगर, मूसाखेड़ी, एकता नगर, शांतिनगर, मरीमाता चौराहा बाणगंगा, कुलकर्णी का भ_ा, हेमू कालानी और मुखर्जी नगर में भी कुत्तों का अत्यधिक आतंक देखा जा रहा है। अन्य प्रभावित क्षेत्रों में गणेशधाम, बापट चौराहा, सुखलिया, विजयनगर, वीणा नगर, श्यामनगर, ग्राम तलावली चांदा और देवास नाका जैसे नाम शामिल हैं जहां से लगातार घायलों के अस्पताल पहुंचने की खबरें मिल रही हैं।
मार्च महीने में कुत्तों के हमलों में आई भारी तेजी
आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि केवल मार्च के महीने में ही आवारा कुत्तों ने 4 हजार 722 लोगों को काटकर घायल किया है। इन हमलों के शिकार होने वालों में समाज का सबसे संवेदनशील वर्ग यानी महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार घायलों में 833 महिलाएं और 787 नाबालिग बच्चे हैं। नगर निगम पिछले कई वर्षों से आवारा कुत्तों को पकडऩे और उनकी नसबंदी करने की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखने का दावा करता रहा है लेकिन डॉग बाइट की घटनाओं का यह बढ़ता ग्राफ इन दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगा रहा है।
