इनकम टैक्स का मास्टरस्ट्रोक, हिंदी में जारी करने लगे नोटिस

इनकम टैक्स
  • आयकर विभाग ने किया बदलाव, अंग्रेजी में आए नोटिस समझ नहीं पा रहे थे बाबू और क्लर्क, इसलिए दबा देते थे फाइल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। कहा जाता है कि कानून की भाषा जटिल होती है, लेकिन मध्य प्रदेश में अंग्रेजी एक बड़ी बाधा बन गई थी। राज्य के सरकारी विभागों में करोड़ों रुपए का टैक्स (टीडीएस) सिर्फ इसलिए नहीं कट पा रहा था क्योंकि बाबू और क्लर्क अंग्रेजी में आए नोटिस को समझ ही नहीं पा रहे थे। वे फाइलों को आगे बढ़ाने के बजाय उन्हें दबा देते थे। आयकर विभाग ने जब नोटिसों का जवाब न आने के बाद अभियोजन की कार्रवाई शुरू की तो राज्य के विभागों के अफसरों ने उन्हें चौंका देने वाली जानकारी दी। अफसरों ने आयकर की टीडीएस विंग को बताया कि उन्हें नोटिस समय पर उनके स्टाफ ने पुटअप ही नहीं किए क्योंकि वे अंग्रेजी में थे। इसके बाद आयकर विभाग की टीडीएस विंग ने बड़ा बदलाव करते हुए नोटिसों को हिंदी में जारी करने के साथ मातृभाषा हिंदी में ही पत्राचार शुरू कर दिया। इसका असर अब दिखाई भी देने लगा है।
बाबू बोले- साहब, अंग्रेजी समझ नहीं आती, इसलिए फाइल पुटअप नहीं की
मामला तब खुला जब इनकम टैक्स की टीडीएस विंग ने आयकर अधिनियम की धारा 194-एलए के तहत भू-अर्जन के मुआवजे पर टीडीएस न कटने को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की। प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों को तलब किया गया, तो उन्होंने एक चौंकाने वाली हकीकत बयां की। उन्होंने बताया कि निचले स्तर के कर्मचारियों और क्लकों का कहना था कि नोटिस और नियम अंग्रेजी में होते हैं, जो समझ से बाहर हैं। गलती न हो जाए, इस डर से वे फाइल अधिकारियों तक पुटअप ही नहीं करते थे। इसका नतीजा यह हुआ कि मुआवजे की बी राशि बिना टैक्स कटे ही बंटती रही और सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हुआ।
इन विभागों से बढ़ा रेवेन्यू का ग्राफ
आयकर विभाग के इस कदम के बाद राज्य के उन प्रमुख विभागों से टैक्स कलेक्शन में भारी उछाल देखा गया है, जहाँ पहले कटौती नाममात्र की थी। प्रदेश में अब मुआवजे की राशि पर अब टीडीएस की सटीक कटौती हो रही है। इसके अलावा लोक निर्माण और पीएचई में ठेकेदारों को होने वाले भुगतान पर भी टीडीएस काटकर आयकर विभाग के पास जमा कराया जा रहा है। इसके अलावा स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन, स्वास्थ्य जेसे विभागों में ली जाने वाली सेवाओं (सर्विस) के लिए और आयोजनों एवं भुगतानों पर बीटैक्स लिया जा रहा है। प्रदेश में सरकार के वेतन भत्तों के अलावा विभागों द्वारा किए जाने वाले भुगतानों पर भी नियमानुसार टीडीएस काटा जाने लगा है, जिससे टीडीएस को इस साल इन विभागों से लगभग 500 करोड़ रूपए अतिरिक्त रेवेन्यू के रूप में मिल चुका है। एमपी और सीजी सर्किल में आयकर विभाग के लिए इस साल लगभग 33 हजार करोड़ का टारगेट है, जिसमें से लगभग 21 हजार करोड़ रुपए टीडीएस के जरिए मिलते हैं।
समस्या की जड़ को पकड़ा
इनकम टैक्स के एमपी-सीजी सर्किल की टीडीएस कमिश्नर भारती सिंह ने इस समस्या की जड़ को पकड़ा। उन्होंने आदेश दिया कि अब आयकर विभाग के नोटिस हिंदी में भी जारी किए जाएंगे। आमतौर पर आयकर विभाग की टीडीएस विंग के सभी नोटिस कंप्यूटर से जारी होते हैं और उसके लिए अंग्रेजी भाषा तय है। अब टीडीएस विंग ये नोटिस हिंदी में टांसलेट कर जारी करने लगी है। नोटिस की भाषा बदलने के बाद अब जो विभाग महीनों तक नोटिस का जवाब नहीं देते थे, वे भी समय पर रिप्लाई कर रहे हैं और टीडीएस की आय में अजाफा होने लगा है। हिंदी में नोटिस जारी होने के बाद क्लकों के लिए नियमों को समझना आसान हुआ, जिससे फाइलों का मूवमेंट तेज हो गया एवं सरकारी विभागों ने तय नियमों के अनुसार टीडीएस काटना शुरू कर दिया है।

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