वनक्षेत्र में अवैध कटाई, शिकार और अतिक्रमण में हो रहा इजाफा

वनक्षेत्र में अवैध कटाई
  • 79705 वर्ग किमी का वनक्षेत्र प्रभावित…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र के वन प्रबंधन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अहम कड़ी मानी जाने वाली वन प्रबंधन समितियां निष्क्रिय हो गई हैं। इससे प्रदेश के वनक्षेत्र में शिकार, अवैध कटाई और अतिक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। प्रदेश के वनक्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए 15608 वन वन समितियां गठित की गई है। इनमें से 8 से 10 हजार वन प्रबंधन समितियां निष्क्रिय पड़ी हुई हैं। इन प्रबंधन समितियों के पास 79705 वर्ग किम के वनक्षेत्र के प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
वन समितियों के निष्क्रिय होने से प्रदेश का वन प्रबंधन भी प्रभावित हो रहा है। इसको देखते हुए वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े ने इन वन प्रबंधन समितियों को सक्रिय करने के निर्देश भी जारी किए हैं। गौरतलब है कि मप्र में बीते साल 56 बाघों की मौत हो चुकी है। प्रदेश के वनक्षेत्र में शिकारियों का मूवमेंट लगातार बढ़ रहा है। शिकारियों को पकडऩे और वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने वीएन अंबाडे ने 10 जनवरी से 15 फरवरी तक ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2 चलाए जाने के आदेश भी जारी किए हैं। प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व, 63 सामान्य वन मण्डल एवं 11 परियोजना मंडलों ने वन्य जीवों के अवैध शिकार के शिकारियों तथा मांस के शौकीन व्यक्तियों द्वारा अपनाये जाने वाले फंदा, विद्युत करंट, खेयर ट्रैप. खटका जैसे साधन से शिकार करने वालों के खिलाफ ऑपरेशन वाइलड लाइफ चलाया जाएगा।
इसके लिए प्रदेश के प्रत्येक वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मण्डल इकाई में एक उप वन मण्डल स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाने के निर्देश हैं। इसके साथ ही प्रदेश वनक्षेत्रों में गठित वन प्रबंधन समितियों को भी सक्रिय करने के निर्देश जारी किए हैं।
वन सुरक्षा समिति
सघन वन क्षेत्रों में चनखंड सीमा की 5 किलोमीटर दूरी तक स्थित ग्रामों में गठित की जाने वाली संयुक्त वन प्रबंधन समिति को वन सुरक्षा समिति कहा जाता है। वन सुरक्षा समिति सघन वन क्षेत्रों में अवैध कटाई, चराई एवं अग्नि से क्षेत्र की सुरक्षा करती है। इसके एवज में उन्हें आवंटित क्षेत्र से समस्त लघु वनोपज रॉयल्टी मुक्त निस्तार एवं काष्ठ की विक्री से प्राप्त राजस्व की 20 प्रतिशत लाभांश दिए जाने का प्रावधान है।
ग्राम वन समित्ति: बिगड़े वनक्षेत्रों में वनखंड की सीमा से पांच किलोमीटर दूरी तक स्थित ग्रामों में गठित की जाने वाली समिति को ग्राम वन समिति कहा जाता है। ग्राम वन समिति के सहयोग से पुन: स्थापित होने पर आवंटित यन क्षेत्र से प्राप्त होने वाली समस्त लघु वनोपज एवं काष्ठ अनुपातिक विदोहन व्यय घटाकर ग्राम वन समिति को प्रदाय करने का प्रावधान है।
ईको विकास समिति: जैव विविधता के संरक्षण के लिए गठित राष्ट्रीय उद्यान तथा अभ्यारण्य बफ र क्षेत्रों की सीमा से 5 किलोमीटर की परिधि में स्थित ग्रामों में ईको विकास समिति गठित करने का प्रावधान है। इन समितियों के सामाजिक आर्थिक उत्थान का कार्य ईको विकास कार्यक्रम के तहत किया जाता है।

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