सरकार को अफसरों पर विश्वास नहीं तो एनसीबी को बंद कर दें

अफसरों पर विश्वास
  • हाईकोर्ट ने कहा…
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय के कॉल डिटेल रिकॉर्ड का अधिकार नहीं देने पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। भारत सरकार के गृह मंत्रालय का पत्र न केवल नासमझी भरा है, बल्कि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (एनसीबी) के अफसरों का मनोबल गिराने वाला भी है। इन्हें अवैध अफीम उत्पादन और व्यापार को कंट्रोल करने का काम सौंपा गया है, जो आसान नहीं है। अपराध में शामिल लोगों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) तक एनसीबी को पहुंच न देकर सरकार ने सचमुच इसे एक अप्रभावी एजेंसी बना दिया है। कोर्ट की राय है कि अगर सरकार को अपने ही अधिकारियों की काबिलियत पर शक है तो उसे सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स को जारी रखने की जरूरत पर फिर से विचार करना चाहिए, क्योंकि टैक्स देने वालों के पैसे खर्च कर बिना जरूरी अधिकारों के कोई एजेंसी बनाने का कोई मतलब नहीं है। यह टिप्पणी मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की कोर्ट ने एक जमानत याचिका पर फैसला देते हुए की है। मालूम हो, जावरा में एक खेत में छापा मारकर सज्जन सिंह को गिरफ्तार किया था। वह उस खेत में कार्यरत था, जहां एक कमरे में। ड्रग्स बनाने वाला रसायन और सामान जब्त किया गया था। वह 13 जनवरी 2025 से न्यायिक हिरासत में है। उसकी जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई थी। सुनवाई के दौरान उसके वकील ने दलील दी कि आरोपी केवल खेत रे में एमडी की देखरेख और सिंचाई करता था, उसे किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ निर्माण की जानकारी नहीं थी। हालांकि कोर्ट ने उसकी जमानत से इनकार कर दिया।
फैसले पर पुनर्विचार करे केंद्र सरकार
एनसीबी की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि जिस कमरे में सज्जन सिंह रहता था, वहां से ही रसायन मिला था। उसकी निशानदेही पर खेत में दबाकर रखे गए अंन्य उपकरण भी बरामद किए गए। कोर्ट ने एनसीबी से पूछा था कि क्या आरोपी और सह आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड प्राप्त किए गए हैं। इस पर एनसीबीं की ओर से पेश हुए एसपी वीएस कुमार ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत एनसीबी को लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी के रूप में शामिल नहीं किया गया है, इसलिए केंद्र सरकार ने 24 अप्रेल 2025 के अपने पत्र में सीडीआर लेने का अधिकार देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इसी पत्र को लेकर गृह मंत्रालय के रवैये पर टिप्पणी की है। साथ ही कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को निर्देश जारी किए हैं कि एनसीबी पर अपने फैसले में पुनर्विचार करे।

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