- मप्र के सांसद तमिलनाडु से लड़ रहे विधानसभा चुनाव

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र में जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। वर्तमान में राज्य से 3 सीटें (दिग्विजय सिंह, सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन) खाली हो रही हैं, लेकिन तमिलनाडु में हो रहे विधानसभा चुनाव में मप्र से राज्यसभा सांसद एल मुरुगन तमिलनाडु की अविनाशी सीट से विधायकी का चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में अगर वे चुनाव जीत जाते हैं तो मप्र में राज्यसभा की एक और सीट खाली हो जाएगी। ऐसे में मप्र में तीन नहीं चार राज्यसभा सीटों पर चुनाव होगा। एल मुरुगन भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। साल 2021 में उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया, तब वह मप्र से राज्यसभा सांसद बने। वह अभी केंद्र में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के राज्य मंत्री हैं। इससे पहले वह मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। इससे पहले वह साल 2011, 2012 उपचुनाव और 2021 में भी विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन तब तीनों ही बार उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। इसके अलावा वह साल 2024 में नीलगिरी से लोकसभा चुनाव लड़े थे, लेकिन तब उन्हें डीएमके के ए राजा से हार झेलनी पड़ी थी। अब दोबारा से वह विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं। तमिलनाडु में इस बार 23 अप्रैल 2026 को वोट डाले जाएंगे और पूरे राज्य में एक ही चरण में चुनाव होगा। वहीं मतगणना 4 मई को होगी।
4 मई पर सबकी नजर
मप्र से राज्यसभा की तीन सीटें खाली होना तय है लेकिन चौथी सीट को लेकर सकबी नजर 4 मई को आने वाले विधानसभा चुनाव परिणामों पर है। मुरुगन यदि चुनाव जीते तो राज्यसभा में उनकी सीट भी खाली हो जाएगी। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक के लिए है। डॉ. मुरुगन मप्र से दूसरी बार उच्च सदन में गए हैं। विधानसभा चुनाव में उनकी जीत-हार के बाद ही मप्र से राज्यसभा की चौथी सीट पर चुनाव की तस्वीर स्पष्ट होगी। राज्यसभा में मप्र का प्रतिनिधित्व कर रहे दिग्विजय सिंह, डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो गया। लेकिन डॉ. मुरुगन विधानसभा का चुनाव जीत गए तो इस बात की संभावना है कि भाजपा उन्हें दक्षिण के तमिलनाडु राज्य में संगठन का जनाधार मजबूत करने का टास्क सौंपे। ऐसी स्थिति में राज्यसभा की चौथी सीट भी खाली हो जाएगी जिसका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक है। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा की सीट पर कुरियन को उच्च सदन में भेजा गया था। भाजपा संगठन में वह अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सहित कई प्रमुख पदों पर रहे। राज्यसभा में उनका कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो गया। इसी दिन उनके क्षेत्र में वोटिंग भी हो गई। अब 4 मई को चुनावी नतीजे के बाद उनकी राजनैतिक भूमिका तय होगी। वैसे सुप्रीम कोर्ट की वकालत के साथ अपने निर्वाचन क्षेत्र पर उनका फोकस है।
