खुशहाल किसान समृद्ध मप्र की पहचान

किसान
  • मप्र ने कृषि के क्षेत्र में स्थापित किए नए कीर्तिमान

डबल इंजन सरकार की नीतियों और सहयोग से मप्र कृषि के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश ने कृषि के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा हैं। साथ ही फसलों के उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर रिकार्ड बनाया। मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता, संकल्पों को पूरी करने की प्रतिबद्धता और अन्नदाता के आर्थिक सशक्तिकरण के लक्ष्य का ही परिणाम है कि आज खुशहाल किसान समृद्ध मप्र की पहचान बन गए हैं।

विनोद कुमार उपाध्याय/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।
मप्र आज देश का सबसे बड़ा अनाज उत्पादक राज्य बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी नीतियां किसान हितैषी हैं। वे खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए कृत-संकल्पित होकर किसानों को विभिन्न योजनाओं में लाभांवित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता, संकल्पों को पूरी करने की प्रतिबद्धता और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लक्ष्य का ही परिणाम है कि आज मप्र देश का अन्न क्षेत्र बन गया है। राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में कृषि उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण अंतर्गत कई कार्यक्रम चलाये जा रहे है, जिससे प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। खरीफ 2024 के धान उत्पादक कृषकों को जिन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय किया है, उन्हें प्रोत्साहन राशि प्रदान की जायेगी। चार हजार रूपये प्रति हैक्टेयर की दर से प्रोत्साहन राशि का वितरण किया जायेगा, जिसमें एक कृषक को अधिकतम दस हजार रूपये की राशि प्रोत्साहन के रूप में प्रदाय की जायेगी। राज्य सरकार द्वारा रबी 2024-25 में उपार्जित गेहूं पर 175 रुपए प्रति क्विटंल प्रोत्साहन राशि प्रदाय की जा रही है। प्रदेश में पहली बार भारत सरकार की सपोर्ट प्राइस स्कीम में सोयाबीन का उपार्जन किया गया, जिसमें 2 लाख 12 हजार 568 कृषकों से 6.22 लाख मीट्रिक मात्रा का उपार्जन किया गया, जिसके न्यूनतम समर्थन मूल्य की राशि 3043.04 करोड़ रुपए है। श्रीअन्न के उत्पादन को बढावा देने के लिए रानी दुर्गावती श्रीअन्न (मोटा अनाज) प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। इसमें किसानों को 3900 रुपए प्रति हैक्टेयर डी.बी.टी. के माध्यम से उनके बैंक खाते में देय होंगे। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ ही फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, सॉयल हेल्थ कार्ड और सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि का लाभ भी मिल रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फसल के नुकसान का समय पर आंकलन एवं राहत राशि का वितरण किसानों को समय पर मप्र में मिल रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नामांकन और दावा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एनसीआईपी पोर्टल के साथ अपने भूमि रिकॉर्ड को सफलतापूर्वक एकीकृत करने एवं इस पोर्टल को और अधिक किसान अनुकूल बनाने के लिए उत्कृष्टता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है।
आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शासन द्वारा नमो ड्रोन दीदी योजनांतर्गत प्रदेश में 89 दीदीओं को स्वाबलंबी बनाया गया है। इनके माध्यम से 4200 हैक्टेयर में तरल उर्वरक का छिडक़ाव तथा राशि रूपये 21.22 लाख की शुद्ध आय प्राप्त की। इस वर्ष 2025-26 में 1066 दीदियों को इसका लाभ दिया जा रहा है। ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदाय किये जाने के लिये विभागीय कौशल विकास केन्द्र के माध्यम से ट्रैक्टर सर्विस मैकेनिक तथा कम्बाइन हार्वेस्टर मशीन ऑपरेटर का प्रशिक्षण देश की प्रतिष्ठित निर्माता कंपनी के सहयोग से दिया जाता है। विभागीय केन्द्रों के माध्यम से वर्ष 2024-25 तक 7361 प्रशिक्षणार्थियों को नि:शुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें से 1939 प्रशिक्षणार्थियों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ। कौशल विकास केन्द्रों के माध्यम से किसान ड्रोन पायलट प्रशिक्षण एवं ड्रोन तकनीशियन का प्रशिक्षण प्रदान कराया जा रहा है। प्रशिक्षण में 50 प्रतिशत शुल्क का भुगतान राज्य शासन द्वारा वहन किया जा रहा है। कुल 412 युवाओं को ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण तथा 33 प्रशिक्षणार्थियों को ड्रोन तकनीशियन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कृषकों को सस्ती दर पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने एवं ग्रामीण युवाओं को स्वावलंबी बनाये जाने के लिये शासन के जन संकल्प पत्र-2023 के अनुपालन में हर वर्ष 1000 कस्टम हायरिंग केन्द्र स्थापित किये जा रहे हैं। पूरे देश में इस योजना की पहल मप्र शासन द्वारा वर्ष 2012 में की गई तथा अब तक 4730 कस्टम हायरिंग केन्द्र प्रदेश स्तर पर स्थापित होकर कृषकों को लाभ दे रहे है। आवेदक को प्रोजेक्ट की लागत अधिकतम राशि रू. 25 लाख तक के प्रोजेक्ट पर 40 प्रतिशत अधिकतम राशि रूपये 10 लाख का अनुदान दिया जाता है। प्रदेश में एपिडा अन्तर्गत 11.48 लाख हैक्टयर फसल उत्पादन क्षेत्र एवं वनोपज संग्रहण क्षेत्र सहित 20.55 लाख हेक्टेयर जैविक क्षेत्र पंजीकृत है। एक जिला-एक उत्पाद अंतर्गत कृषि संबंधी 06 उत्पाद कोदो-कुटकी-अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिंगरौली, तुअर दाल- नरसिंहपुर, चना-दमोह, बासमती चावल-रायसेन, चिन्नोर चावल-बालाघाट, सरसों-भिण्ड एवं मुरैना, अंतर्गत 10 जिले शामिल किये गये है। फार्म गेट ऐप के तहत किसान अपनी उपज का विवरण, फोटो मोबाइल एप्लिकेशन पर डाल कर मंडी मे पंजीकृत व्यापारियों के साथ मोल भाव कर सकता है। सौदा तय होने पर किसान की सहमति प्राप्त कर व्यापारी सीधे किसान के गांव या खेत से उपज उठा लेता है। इससे भौतिक रूप से माल के परिवहन की आवश्यकता नहीं रहती। यह उपज न बिकने की अनिश्चितता को समाप्त करता है। मंडी में सही दाम न मिलने पर भी, विशेषकर छोटे और मध्यम किसान जिनके पास अपने परिवहन के साधन नहीं होते है, उन्हें अब मजबूरी में उपज नहीं बेचना पड़ती है। भाड़े की बचत होती है। मंडी के माध्यम से किसान को मंडी अनुबंधित व्यापारी का चयन कर खेत या गोदाम पर ही फसल को बेचने की सुविधा है।

44 लाख हैक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि किसानों की बेहतरी एवं खुशहाली के लिये राज्य सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, बिजली के बिल से बचाने के लिये कृषि सोलर पंप पर बड़ा अनुदान, कृषि आधारित उद्योगों को विशेष बढ़ावा और पशुपालन व डेयरी के लिये अनुदान सहित किसानों को केन्द्र व राज्य सरकार तमाम सुविधाएं मुहैया करा रहीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि पिछले सवा साल के भीतर प्रदेश में 7 लाख हैक्टेयर से अधिक सिंचाई रकबा बढ़ा है, जबकि वर्ष 2003 में प्रदेश में मात्र लगभग साढ़े 7 लाख हैक्टेयर में सिंचाई होती थी। इस प्रकार आजादी के बाद प्रदेश में जितना सिंचाई का रकबा था, उतनी सिंचाई सुविधा पिछले सवा साल में सरकार ने उपलब्ध करा दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2003 के बाद कुल मिलाकर 44 लाख हैक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ाया गया है। इसमें लगातार बढ़ोत्तरी जारी है। इसी क्रम में केन-बेतवा और पार्वती-काली सिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना से बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल संभाग सहित प्रदेश के बहुत बड़े हिस्से में सिंचाई सुविधाओं का क्रांतिकारी विस्तार हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि खेती में कम लागत आए, इसके लिये सरकार किसानों को तमाम सुविधाएं मुहैया करा रही है। सरकार द्वारा किसानों को बिजली के बड़े बिल से बचाने के लिये 10 व 5 हॉर्स पॉवर के सोलर पंप पर 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा किसानों को खेती के लिये सरकार बिना ब्याज के कृषि ऋण उपलब्ध करा रही है। साथ ही इस साल सरकार ने देश में सबसे अधिक समर्थन मूल्य 2600 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूँ की खरीदी की है। आने वाले साल में इसमें और बढ़ोत्तरी की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि सरकार द्वारा बीहड़ों में नेपियर घास लगवाई जायेगी। साथ ही कृषि आधारित उद्योग विकसित करने के प्रयास भी होंगे। किसानों को उन्नत कृषि तकनीक व कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के लिये सरकार व्यापक स्तर पर किसान मेलों का आयोजन भी करा रही है। इसी क्रम में जल्द ही मुरैना में वृहद किसान मेला आयोजित होगा, इससे ग्वालियर-चंबल अंचल के किसान लाभान्वित होंगे। उन्होंने ग्वालियर जिले में सुपर सीडर की बड़े पैमाने पर बोवनी एवं ड्रोन दीदियों के प्रशिक्षण की सराहना की। साथ ही कहा किसानों की खुशहाली के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दोनों सरकारें लगातार काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की तर्ज पर प्रदेश सरकार द्वारा भी मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना चलाई जा रही है। इन दोनों योजनाओं से प्रत्येक किसान के खाते में हर साल 10 हजार रूपए पहुँच रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि सरकार कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की कड़ी में दालों से टैक्स कम कर दाल कारखानों को विशेष प्रोत्साहन दे रही है। उन्होंने दुग्ध उत्पादन में बढ़ोत्तरी एवं नरवाई प्रबंधन के लिये सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहन की जानकारी भी दी। वहीं कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री ऐदल सिंह कंषाना का कहना है कि किसान खुशहाल होगा तो देश भी खुशहाल होगा। इसी भाव के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में केन्द्र व राज्य सरकार किसानों के हित में काम कर रहीं हैं। उन्होंने कहा प्रदेश में सिंचाई रकबे में क्रांतिकारी विस्तार हुआ है।

फूल उत्पादन में मप्र का डंका
मप्र ने फूलों के उत्पादन में देश में अलग पहचान बनाई है। देश में मप्र फूल उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। गुना जिले के गुलाब की महक जयपुर, दिल्ली, मुंबई के बाद अब पेरिस और लंदन में भी पहुंच रही है, वहीं राजधानी भोपाल में एक महिला किसान फूलों से हर महीने 4 लाख रुपए कमा रही है। सरकार का कहना है कि छोटी कृषि जोत वाले किसान, जिनके पास एक-दो या तीन एकड़ भूमि है, फूलों का उत्पादन कर अच्छा लाभ कमा सकते हैं। मप्र के उत्पादित फूलों की मांग देश के महानगरों के साथ विदेशों में भी बढ़ी है। गुना जिले के गुलाब की महक जयपुर, दिल्ली, मुंबई के बाद अब पेरिस और लंदन में भी पहुंच रही है। शिक्षित युवाओं के साथ गांव के किसान भी फूलों के उत्पादन की ओर आकर्षित हुए हैं। राजधानी भोपाल की ग्राम पंचायत बरखेड़ा बोंदर की रहने वाली लक्ष्मीबाई कुशवाह ने धान, गेहूं, सोयाबीन की खेती छोडक़र गुलाब, जरबेरा और गेंदा के फूलों का उत्पादन शुरू किया और हर महीने 3 से 4 लाख रुपये कमा रही हैं। ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनसे प्रदेश में फूलों का उत्पादन बढ़ा है। मप्र में प्रमुख रूप से गेंदा, गुलाब, सेवंती, ग्लैडियोलस, रजनीगंधा और औषधीय पुष्पों में इसबगोल, अश्वगंधा, सफेद मूसली और कोलिक्स का उत्पादन किया जाता है। प्रदेश में सर्वाधिक उत्पादन क्षेत्र गेंदा का है। सूबे में 24 हजार 214 हेक्टेयर में गेंदे की खेती की जा रही है। दूसरे स्थान पर गुलाब 4 हजार 502 हेक्टेयर, तीसरे स्थान पर सेवंती 1 हजार 709 हेक्टेयर, चौथे स्थान पर ग्लैडियोलस 1 हजार 58 हेक्टेयर, पांचवें स्थान पर रजनीगंधा 263 हेक्टेयर और अन्य पुष्प 11 हजार 227 हेक्टेयर में बोए जा रहे हैं। प्रदेश में फूलों की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 15.01 मैट्रिक टन है, जो फूलों के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इस उत्पादकता के लिए प्रदेश की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और सरकार का सहयोग जिम्मेदार है। फूलों के उत्पादन, गुणवत्ता में सुधार और मार्केटिंग पर मप्र शासन का उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग लगातार काम कर रहा है। साल 2024-25 में उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र में 14 हजार 438 हेक्टेयर का विस्तार हुआ, जिसमें फूलों का रकबा 5 हजार 329 हेक्टेयर बढ़ा। प्रदेश में 33 प्रतिशत से अधिक फूलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने में उद्यानिकी विभाग की हाईटेक नर्सरी और प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को तकनीकी जानकारी प्रदान करना जारी है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार के सहयोग से ग्वालियर जिले में 13 करोड़ रुपए की लागत से हाईटेक फ्लोरीकल्चर नर्सरी विकसित की जा रही है। यह नर्सरी मप्र में पुष्प उत्पादन के लिए वरदान साबित होगी। वह दिन दूर नहीं जब मप्र फूलों के उत्पादन में देश का सिरमौर बनेगा।

मिल रही 12 हजार की वित्तीय मदद
देश के किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार उन्हें कई तरह से मदद देती है। जिसमें वित्तीय सहायता भी शामिल होती है। हाल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त जारी की है जिसमें 7 करोड़ से भी ज्यादा किसानों के खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए। केंद्र सरकार के दिखाए रास्ते पर चलते हुए मप्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत सालाना 6 हजार रुपये सीधे उनके खाते में भेजे जाते हैं। इसके अनुसार प्रदेश के किसानों के खाते में हर साल 12 हजार रुपये की राशि पहुंचती है। जो कि न केवल किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है बल्कि प्रदेश के कृषि क्षेत्र का भी विस्तार कर रही है।
मप्र में सीएम डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की शुरुआत साल 2000 में की गई थी। इस योजान के तहत सरकार प्रदेश के उन किसानों को अलग से 6 हजार रुपये की वित्तीय सहायता देती है जिनके खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की राशि भेजी जाती है। बता दें कि, पीएस किसान की तरह ही इस योजना के तहत भी किसानों के खाते में योजना की 6 हजार रुपये की राशि साल में 2-2 हजार की 3 किस्तों में दी जाती है। बता दे कि , 14 अगस्त 2025 को सीएम मोहन यादव मे प्रदेश के करीब 83 लाख किसानों के खाते में 1671 करोड़ रुपये भेजे हैं। मप्र कृषि विभाग द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए केवल वे ही किसान आवेदन कर सकते हैं जो मूल रूप से मप्र के रहने वाले हैं और साथ ही जिनका नाम पीएम किसान सम्मान निधि के लिए पंजीकृत है। बता दें कि, प्रदेश के जो किसान पीएम किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी है वो अपने आप ही सीएम किसान कल्याण योजना के पात्र हो जाते हैं। इसके अलावा प्रदेश सरकार की इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों के पास खुद की जमीन होनी चाहिए, जिसका रिकॉर्ड राजस्व विभाग में दर्ज हो। बता दें कि, अगर आप पीएम किसान के लाभार्थी हैं तो आपको इस योजना के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं है।

मंडियां हुईं डिजिटल
मप्र की मंडियों में तकनीक का इस्तेमाल व्यापार के लगभग हर चरण में किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने मंडियों में व्यापार आसान बनाने के लिए साल 2021 में ई-मंडी मॉडल जमीन पर उतारा था। इस दौरान ई-मंडी प्रदेश की आठ मंडियों में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत लागू की गई थी। लेकिन, अब प्रदेश की सभी 259 मंडियों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है। अब किसान मंडी में प्रवेश से लेकर अनुबंध, बिक्री, प्रमाणन, लाइसेंसिंग और भुगतान तक एक आसान प्रक्रिया का अनुभव कर रहे हैं। किसान तुरंत पता लगा सकते हैं कि उनकी उपज किस व्यापारी ने और किस कीमत पर खरीदी है। इस डिजिटल परिवर्तन ने कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित किया है, दक्षता बढ़ाई है, और अनावश्यक देरी और प्रक्रियाओं को खत्म करने का काम किया है। मंडी बोर्ड के प्रबंध निदेशक कुमार पुरुषोत्तम के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 21.34 लाख से अधिक किसान पंजीकृत हो चुके हैं। कृषि सुधार में इसके उत्कृष्ट योगदान के लिए इस योजना को प्रतिष्ठित स्कॉच ऑर्डर ऑफ मेरिट अवार्ड 2023 से भी सम्मानित किया गया है। कुमार पुरुषोत्तम के अनुसार, मप्र के 64,000 से अधिक मंडी व्यापारी अब खरीदे गए माल के परिवहन के लिए अपना गेट पास खुद बनाने के लिए ई-लाइसेंस प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। इस कारण मंडी कर्मचारियों द्वारा हाथ से लाइसेंस जारी करने का काम लगभग शून्य हो गया है। इस प्रणाली के माध्यम से रिकॉर्ड रखने में भी सुधार किया गया है। अब हर भुगतान डिजिटल रूप से दर्ज होता है। इससे मंडी समितियों को किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सहयोग से विकसित ई-लाइसेंस प्रणाली वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर केवल मप्र में ही उपलब्ध है। अब तक, 1.13 करोड़ से अधिक लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से 94 लाख लाइसेंस सीधे व्यापारियों द्वारा और 19.52 लाख लाइसेंस मंडी अधिकारियों द्वारा बनाए गए हैं। पुरुषोत्तम ने एमपी फार्म गेट ऐप की सफलता पर भी बात की है। यह एक एंड्रॉइड आधारित मोबाइल एप्लिकेशन है जो किसानों को मंडी आए बिना अपने घर, खेत या गोदाम से सीधे अपनी उपज बेचने का अधिकार देता है। किसान अपनी उपज की कीमत खुद तय कर व्यापार कर सकते हैं। अब तक, 6.79 लाख से अधिक किसान इस ऐप का उपयोग करके 7.71 करोड़ क्विंटल विभिन्न फसलें बेच चुके हैं। इसने किसानों को यह चुनने की आजादी दी है कि वे अपनी उपज मंडी में बेचना चाहते हैं या सीधे अपने स्थान से। पुरुषोत्तम के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म मंडियों में भीड़ कम कर रहे हैं। अब किसान मंडी पहुंचने से पहले ही अपने मोबाइल फोन पर एंट्री स्लिप बना सकते हैं। एक बार डाटा दर्ज होने के बाद, वह रिकॉर्ड कर लिया जाता है। ऐसे में भविष्य में उसे दोबारा दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। इससे किसान बिना किसी देरी के सीधे नीलामी स्थल पर जाकर अपनी उपज बेच सकते हैं। ऐप नीलामी की वास्तविक समय की जानकारी भी प्रदान करता है, जिससे किसान के फोन पर तुरंत यह पता चल जाता है कि किस व्यापारी ने उनकी उपज किस कीमत पर खरीदी है। ई-मंडी योजना के तहत, मंडी प्रांगण की सभी काम – जैसे नीलामी, तुलाई और भुगतान अब पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत हो गई हैं। व्यापारियों और तुलावटियों को इन डिजिटल प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। अब तुलाई का अंतिम वजन पारंपरिक हाथ से लिखी पर्चियों के बजाए सीधे एंड्रॉइड डिवाइस पर दर्ज किया जाता है। व्यापारी अपनी सुरक्षित डिजिटल आईडी के माध्यम से अपने भुगतान रिकॉर्ड देख सकते हैं और भुगतान प्रविष्टियों की पुष्टि कर सकते हैं। बिक्री का सारा डेटा वास्तविक समय में ऑनलाइन रिकॉर्ड में संग्रहीत हो जाता है, जबकि किसानों को एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से तत्काल अपडेट मिलते हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी है, कागजी कार्रवाई कम हुई है और किसानों तथा बाजार संचालकों के बीच विश्वास मजबूत हुआ है।

मप्र कृषि में किए कई नवाचार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि मप्र की उर्वर धरा में खेती-किसानी लाभ का व्यवसाय है। हमने इसी दिशा में काम किया। नई कृषि विधियों को अपनाया, कई नवाचार किए। यही कारण है कि आज मप्र कृषि विकास के मामले में पंजाब, हरियाणा और अन्य कई राज्यों से आगे निकलकर देश में अव्वल स्थान पर है। हम खेती-किसानी और किसान दोनों की समृद्धि के लिए प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि कृषि एवं सहकारिता में मप्र में बीते दशकों में लगातार काम हुआ है। खेती के साथ-साथ सिंचाई पर भी हमने काम किया है। वित्त वर्ष 2002-03 तक मप्र में मात्र 7 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित थी। आज मप्र की 55 लाख से अधिक कृषि हेक्टेयर भूमि को हम सिंचित क्षेत्र में लेकर आए हैं। हम किसानों को सुविधा सम्पन्न बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। अगले तीन सालों में हमारी सरकार प्रदेश के 30 लाख किसानों को न केवल सोलर पम्प देगी, वरन् उनके द्वारा उत्पादित अतिरिक्त सोलर ऊर्जा का क्रय भी करेगी। इससे किसानों को दोहरा फायदा होगा। इसके अलावा हम किसानों को मात्र 5 रूपए की राशि पर बिजली कनेक्शन भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि मप्र ऊर्जा के मामले में भी आगे है। देश में सबसे सस्ती बिजली देने वाला प्रदेश मप्र है। दिल्ली मेट्रो भी मप्र की बिजली से चलायमान है।
वहीं उद्यानिकी विभाग फलों की खेती में नवाचार करने जा रहा है। प्रदेश में अमरीका में मिलने वाले पैशन फ्रूट (कृष्णा फल ) की खेती की तैयारी की जा रही है। किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। बीज भी दिए जाएंगे। साथ ही किसानों को एवोकाडो व अंजीर, ब्लूबेरी की खेती के लिए भी प्रेरित किया जा रहा। दरअसल, उद्यानिकी विभाग एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत नए बगीचे लगवा रहा है। विभाग का कहना है, विदेशी फल की खेती का प्रयोग सफल होते ही किसानों की संया बढ़ाई जाएगी। नर्मदापुरम में अनाज-दलहनी फसलों के साथ ही पारंपरिक फल-सब्जी की खेती की जाती है। इसमें कोई नवाचार नहीं हुआ है। दूसरे प्रदेशों और विदेशी फलों को भी जिले की उपजाऊ जमीन पर पैदा किया जा सकता है। ऐसे में उद्यानिकी विभाग ने नए बगीचे लगाने की योजना बनाई है। किसानों को एक हेक्टेयर में कृष्णा फल, ब्लूबेरी, अंजीर लगाने को प्रेरित किया जा रहा है। इसके अलावा किसान बगीचे में आम, अमरूद, अनार, सीताफल भी लगा सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, जिले में काली और नमी वाली मिट्टी ज्यादा है। यहां कृष्णा फल, एवोकाडो, ब्लूबेरी, अंजीर भी लगाए जा सकते हैं। ऐसे में पहले चरण में किसानों को कम रकबे में यह प्रयोग करने को कहा गया है। प्रयोग सफल होते ही विदेशी फलों के पौधे लगाने के लिए रकबा बढ़ाया जाएगा। देशभर के बाजारों में कृष्णा फल, एवोकाडो, ब्लूबेरी, अंजीर की मांग ज्यादा है। औषधि के साथ इन फलों का कई प्रकार से उपयोग किया जाता है। किसान इसकी फसल लगाएंगे तो उन्हें अतिरिक्त आय होगी।

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